नई दिल्ली। मंगलवार को बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के अगले अध्यक्ष की जिम्मेदारी पाकिस्तान को सौंप दी गई है।
पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ ने बाखुशी इस जिम्मेदारी को संभालने का ऐलान किया है कि पाकिस्तान अपनी अध्यक्षता का संचालन “विजन को कार्यरूप देना : कनेक्टिविटी, नवाचार और साझा समृद्धि।” थीम पर करेगा।
यह भी तय है कि एससीओ के तत्वाधान में होने वाली तकरीबन 30 बैठकें (अधिकारियों व मंत्रियों व राष्ट्रप्रमुख को मिला कर) अगले एक वर्ष के भीतर पाकिस्तान में होंगी।
क्या पीएम मोदी जाएंगे इस्लामाबाद?
ऐसे में सवाल यह है कि भारत के अधिकारी इन बैठकों में हिस्सा लेंगे या नहीं? क्या भारत के पीएम नरेन्द्र मोदी अगले वर्ष 2027 (जुलाई से सितंबर के बीच) होने वाले शिखर सम्मेलन में हर बार की तरह हिस्सा लेने के लिए पाकिस्तान जाएंगे?
इस सवाल का सही-सही जवाब तो बाद में मिलेगा लेकिन दोनों देशों के संबंधों के मौजूदा परिवेश को देखते हुए संभावना बहुत कम दिखती है।
वैसे वर्ष 2024 में एससीओ के विदेश मंत्रियों की एक बैठक पाकिस्तान में हुई थी जिसमें हिस्सा लेने के लिए विदेश मंत्री एस जयशंकर ने वहां का दौरा किया था।
वर्ष 2023 में एससीओ की अध्यक्षता भारत ने की थी। तब भी दोनों देशों के संबंधों में काफी तनाव बना हुआ था। लेकिन तब एससीओ के विदेश मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लेने के लिए पाकिस्तान के तत्कालीन विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो ने भारत (गोवा) की यात्रा की थी। बाद में शिखर सम्मेलन का आयोजन आन लाइन ही किया गया था, जिसमें पाकिस्तान के पीएम ने भी हिस्सा लिया था।
पीएम मोदी वर्ष 2015 से अभी तक अस्ताना शिखर सम्मेलन (वर्ष 2024) के अलावा भौतिक तौर पर होने वाले हर शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेते रहे हैं। वर्ष 2020, 2021 व 2023 में वर्चुअल मोड में आयोजन हुआ था।
वर्ष 2025 में तियानजिन (चीन) और वर्ष 2022 में समरकंद शिखर सम्मेलन में पीएम मोदी और पाक पीएम शहबाज शरीफ ने मंच साझा किया लेकिन इनके बीच कोई औपचारिक या अनौपचारिक संवाद भी नहीं हुआ।
वर्ष 2015 में पीएम मोदी ने तत्कालीन पीएम नवाज शरीफ से एससीओ की ऊफा शिखर सम्मेलन में अलग से मुलाकात की थी। इसके बाद दोनों देशों के विदेश मंत्रियों व एनएसए की मुलाकात भी हुई।
बताते चलें कि पीएम मोदी ने 25 दिसंबर, 2015 को पाकिस्तान का अचानक दौरा किया था। उसके बाद वर्ष 2016 में सार्क शिखर सम्मेलन में उनके इस्लामाबाद जाने की चर्चाएं चल रही थी। लेकिन भारत व अन्य सदस्यों ने आतंकवादी हमलों को देखते हुए सार्क सम्मेलन में जाने से इनकार कर दिया था। उसके बाद सार्क संगठन ठंडे बस्ते में है।










