नई दिल्ली। हनुमान अंश फिल्म का गाना ‘जब जिद्द पे आ गई पार्वती’ सोशल मीडिया पर काफी ट्रेंड कर रहा है। इस गाने को लोग खूब पसंद कर रहे हैं और जिस बोली में ये गाना गाया गया है, वो भी लोगों को काफी पसंद आ रहा है।
ये वायरल गाना असल में बुंदेली बोली में गाया है। ये बोली उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में बोली जाती है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस बोली का इतिहास क्या है? बुंदेली बोली में बुंदेलखंड का इतिहास छिपा है। आइए जानें कैसे शुरू हुई बुंदेली बोली और इसे इतना खास कौन-सी चीजें बनाती हैं।
बुंदेला राजपूतों के साम्राज्य में शुरू हुई बुंदेली
बुंदेली बोली मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में बोली जाती है। उत्तर प्रदेश का झांसी, महोबा, जालौन, ललितपुर, हमीरपुर और मध्य प्रदेश के सागर, पन्ना, जबलपुर, दतिया, टीकमगढ़ और छतरपुर दैसे जिलों में बोली जाती है।
बुंदेलखंड को उसका नाम लगभग 14वीं शताब्दी के पास मिला, जब बुंदेला राजपूतों ने इस क्षेत्र में अपना साम्राज्य स्थापित किया। बुंदेला राजपूतों के संरक्षण में बुंदेली बोली काफी फली-फूली और राजकाज से लेकर आम लोगों की बोली का हिस्सा बन गई।
क्यों खास है बुंदेली बोली?
बुंदेली बोली की सबसे बड़ी खासियत उसकी मिठास है। यहां अजनबी को भी दाऊ, भैया या काका कहकर संबोधित किया जाता है। ये बोली का उच्चारण और शब्द बहुत ही आसान हैं इसलिए लोगों की जुबां पर आसानी से आ जाते हैं।
कई लोग बुंदेली और ब्रज बोली को एक ही समझ लेते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि इनमें काफी समानता देखने को मिलती है। यूं समझ लीजिए कि इन दोनों बोलियों में 19-20 का फर्क है। इसलिए अगर आप इन बोलियों को नहीं जानते, तो हो सकता है आप भी इन्हें एक ही समझने की भूल कर बैठें। हालांकि, ब्रज के गीतों में भक्ति रस ज्यादा देखने को मिलती है, वहीं बुंदेली लोकगीतों में भक्ति के साथ-साथ वीर रस भी सुनाई देता है।
वीर रस और आल्हा गायन
बुंदेली बोली वीरों की भी भाषा है। बुंदेलखंड का मशहूर आल्हा गायन भी बुंदेली में गाया जाता है, जो पूरे देश में मशहूर है। इन गीतों में आल्हा और ऊदल की वीरता की कहानियां सुनाई जाती हैं, जो सुनने वालों के रोंगटे खड़े कर देता है।
बुंदेली लोकगीतों की झलक
बुंदेली लोकगीतों की बात करें, तो आपको एक पर एक गीत सुनने को मिल जाएंगे, जिनमें प्रेम, उलाहना, उत्सव और भक्ति जैसी भावनाएं सुनने को मिल जाएंगी।
बुंदेलखंड का ददरा शैली में गाया गीत ‘बर जावै पन्ना को बाजार, हमरी ननद हिराय गई बटुआ सी रे…’ और ‘सैया रोटी जबई बनहै, पैले करधोनी ले आओ…’ पति-पत्नी के प्यार, नोंक-झोंक और शादीशुदा जीवन की तस्वीर पेश करते हैं।
हनुमान अंश में छाया बुंदेली बोली का गाना
फिल्म हनुमान अंश में जब जिद्द पे आ गईं पार्वती में बुंदेली बोली और लोकधुनों का इस्तेमाल हुआ है। ये गाना भले ही इस फिल्म के लिए बनाया गया है, लेकिन इसमें इस्तेमाल हुए बुंदेली के शब्द और धुन इसे बहुत खास बनाते हैं, जो सुनने में काफी अच्छे लग रहे हैं। यहीं वजह भी है कि लोगों की जुबां पर ये गाना छा गया है।










