भारत-चीन संबंध निर्णायक मोड़ पर, संभल कर बढ़ाने होंगे कदम : मनमोहन सिंह

नई दिल्ली। सीमा विवाद को लेकर भारत और चीन के बीच रिश्तों में आई तल्खी पर पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने सोमवार को कहा कि भारत और चीन के संबंध निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुके हैं। ऐसे में सरकार को बहुत संभल कर कदम रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार का रुख ही तय करेगा कि आगे दोनों देशों के रिश्ते कैसे रहेंगे।

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मनमोहन सिंह ने कहा कि 15-16 जून, 2020 को गलवान घाटी (लद्दाख) में भारत के 20 साहसी जवानों ने सर्वोच्च शहादत दी। इन बहादुर सैनिकों ने साहस के साथ अपना कर्तव्य निभाते हुए देश के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। देश के इन सपूतों ने अपनी अंतिम सांस तक मातृभूमि की रक्षा की। इस सर्वोच्च त्याग के लिए हम इन साहसी सैनिकों व उनके परिवारों के कृतज्ञ हैं लेकिन उनका यह बलिदान व्यर्थ नहीं जाना चाहिए।

उन्होंने प्रधानमंत्री और केंद्र सरकार से आग्रह किया कि वो वक्त की चुनौतियों का सामना करें और कर्नल बी. संतोष बाबू व हमारे सैनिकों की कुर्बानी की कसौटी पर खरा उतरें, जिन्होंने ‘राष्ट्रीय सुरक्षा’ व ‘भूभागीय अखंडता’ के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी। इससे कुछ भी कम जनादेश से ऐतिहासिक विश्वासघात होगा।

वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने कहा कि आज हम इतिहास के एक नाजुक मोड़ पर खड़े हैं, जहां हमारी सरकार के निर्णय व सरकार द्वारा उठाए गए कदम तय करेंगे कि भविष्य की पीढ़ियां हमारा आंकलन कैसे करें। उन्होंने कहा कि जो देश का नेतृत्व कर रहे हैं, उनके कंधों पर कर्तव्य का गहन दायित्व है। प्रजातंत्र में यह दायित्व देश के प्रधानमंत्री का है। उन्हें अपने शब्दों व ऐलानों द्वारा देश की सुरक्षा और सामरिक व भूभागीय हितों पर पड़ने वाले प्रभाव के प्रति सदैव बेहद सावधान होना चाहिए।

पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा कि ‘चीन ने अप्रैल, 2020 से लेकर आज तक भारतीय सीमा में गलवान वैली और पांगोंग त्सो लेक में अनेक बार जबरन घुसपैठ की है। हम न तो उनकी धमिकयों व दबाव के सामने झुकेंगे और न ही अपनी भूभागीय अखंडता से कोई समझौता स्वीकार करेंगे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को अपने बयान से उनके षड्यंत्रकारी रुख को बल नहीं देना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि सरकार के सभी अंग इस खतरे का सामना करने व स्थिति को और ज्यादा गंभीर होने से रोकने के लिए परस्पर सहमति से काम करें।’

मनमोहन सिंह ने कहा, “यही समय है जब पूरे राष्ट्र को एकजुट होना है और संगठित होकर इस दुस्साहस का जवाब देना है। हम सरकार को आगाह करेंगे कि भ्रामक प्रचार कभी भी कूटनीति और मजबूत नेतृत्व का विकल्प नहीं हो सकता। पिछलग्गू सहयोगियों द्वारा प्रचारित झूठ के आडबंर से सच्चाई को नहीं दबाया जा सकता।

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