पाक्सो कोर्ट ने क्यों ले लिया 20 दिन में ही फांसी का फैसला ?

लखनऊ. ढाई साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म और बाद में हत्या मामले में गाज़ियाबाद की जिला अदालत की पाक्सो कोर्ट ने सिर्फ बीस दिन की सुनवाई के बाद दोषी को फांसी की सज़ा सुना दी है.

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पाक्सो कोर्ट के विशेष न्यायाधीश महेन्द्र श्रीवास्तव ने फांसी के साथ ही अभियुक्त पर एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है.

आश्चर्यजनक और सबसे दुखदाई पहलू यह है कि दुष्कर्म करने वाला चन्दन पाण्डेय पीड़ित बच्ची के पिता का दोस्त था और बच्ची उसे चाचा कहती थी. दुष्कर्म के बाद उसने हत्या ही इसलिए की ताकि उसकी पहचान न खुल जाए. अदालत के सामने अभियोजन पक्ष ने दस गवाह पेश किये.

19 अक्टूबर 2020 को गाज़ियाबाद के कविनगर से बच्ची अचानक अपने घर के पास से लापता हो गई थी. पुलिस को जानकारी मिली तो परिवार के सबसे करीबी चन्दन पाण्डेय से ही पुलिस ने सबसे पहली पूछताछ की लेकिन वह पुलिस को गुमराह करने में कामयाब हो गया.

दूसरे दिन कविनगर में नाले के किनारे झाड़ियों में बच्ची की लाश मिल गई. पोस्टमार्टम में दुष्कर्म की पुष्टि हुई. इसके बाद पुलिस फिर सक्रिय हुई. फिर से चन्दन को पकड़कर पूछताछ शुरू की. थोड़ी सी सख्ती में ही वह टूट गया. उसने अपना जुर्म क़ुबूल कर लिया. उसके खिलाफ पाक्सो एक्ट के तहत केस दर्ज कर लिया गया. तब से वह डासना जेल में बंद है.

पुलिस ने कोर्ट में समय से चार्जशीट फ़ाइल कर दी. अदालत में सिर्फ बीस दिन की सुनवाई में विशेष न्यायाधीश महेन्द्र श्रीवास्तव ने अभियुक्त को फांसी की सजा सुनाई. अदालत ने सजा का एलान किया तो बच्ची की माँ ने पुलिस का शुक्रिया अदा किया. उन्होंने कहा कि वह फांसी पर चढ़ जाए तो तसल्ली मिले.

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