‘इसे ले जाओ, पागल हो गया है’ ड्रग्स के नशे में संजय दत्त की हरकत देखकर बोले थे सुनील दत्त

सुनील दत्त की आज 92वीं बर्थ एनिवर्सिरी है। एक सफल अभिनेता के तौर पर करियर बनाने के बाद उन्होंने राजनीति की ओर रुख किया। राजनीति में लोग उनकी सादगी के कायल थे। सुनील दत्त हर किसी की मदद करने के लिए आगे रहते थे। उनके चाहने वाले आज भी उन्हें याद करते हैं। सुनील दत्त ने अपने बेटे संजय दत्त को फिल्म ‘रॉकी’ से लॉन्च किया। संजय दत्त को जब नशे की लत लग गई थी तब उन्होंने उसे इससे बाहर निकालने के लिए सबकुछ किया।

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नशे की हालत में पिता के सामने पहुंचे थे संजय दत्त
संजय दत्त ने ऐसा ही किस्सा बताया जब वो सुनील दत्त के ऑफिस पहुंचे थे और उस दौरान वो ड्रग्स के नशे में थे। उनकी हालत ऐसी हो गई थी कि सामने उन्हें कुछ और ही दिखने लगा था। इंडिया टुडे कॉन्क्लेव 2016 में संजय दत्त ने बताया कि ‘मैं वहां गया और समय से वहां पहुंच गया था। वो मेरे सामने बैठे थे।

मुझे यह भी नहीं पता कि वह क्या बोल रहे थे। वो धीरे-धीरे कुछ कह रहे थे और मैं केवल कहने की कोशिश कर रहा था “जी जी”। मैंने देखा कि उनके सिर से एक रोशनी निकल रही थी और वह मोमबत्ती की तरह जल उठी। मैंने उन्हें मोमबत्ती की तरह पिघलते देखा और मैं उन पर कूद पड़ा और उनका चेहरा एक साथ रखने की कोशिश करने लगा और रोशनी को बंद कर दिया।‘

सुनील दत्त का क्या था रिएक्शन
संजय दत्त आगे कहते हैं कि ‘आज जब मैं उस बारे में सोचता हूं तो अंदाजा लगा सकता हूं कि उन्होंने क्या महसूस किया होगा।‘ तभी उन्होंने अपने आदमी से कहा, ‘इसको लेके जाओ ये पागल हो गया है।‘

नशे की लत से निकालने में की मदद
सुनील दत्त ने कभी भी संजय दत्त को अकेला नहीं छोड़ा। जब भी संजय दत्त ने अपने पिता से मदद मांगी वो हमेशा उनके बचाव में आए। अभिनेता ने यह भी खुलासा किया था कि वो नशे की वजह से दो दिन तक सोए रहे थे जब वो उठे तो उन्हें भूख लगी थी। संजय ने कहा था, ‘मैंने खुद को शीशे में देखा। ड्रग की वजह से मैं ऐसा हो गया था और मैं जानता था कि मैं मरने जा रहा हूं। मैंने अपने पिता से जाकर कहा कि मुझे मदद की जरूरत है।‘

मुंबई में रहने के लिए मनाया
सुनील दत्त ने संजय को बुरी आदत से बाहर निकालने में मदद की। उन्होंने उन्हें ड्रग रिहैब के बाद मुंबई में रहने के लिए मनाया। संजय दत्त अमेरिका रहना चाहते थे वो तो सुनील दत्त ही थे जिन्होंने उनसे कहा था कि एक बार वो मुंबई आकर देखें कि क्या यहां कुछ हो पाता है। उन्होंने उनकी बात मानी और जल्द ही उन्हें फिल्मों के ऑफर मिलने लगे और इस तरह संजय दत्त का करियर आगे बढ़ने लगा।

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