अपराधियों से रिश्ता किसी हालत में बर्दाश्त नहीं : यूपी डीजीपी

कानपुर। पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) मुकुल गोयल ने कहा कि पुलिस-अपराधी गठजोड़ तोड़ने के लिए सख्त कदम उठाए जाएंगे। अपराधियों से रिश्ता किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। दोषी पुलिसवालों को विभाग के बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा। रविवार को अपने कानपुर के पहले दौरे के दौरान डीजीपी ने पुलिस लाइन में आधुनिक अस्पताल का उद्घाटन किया।

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बिकरू कांड, हाथरस और उन्नाव कांड में पुलिस और अपराधियों के बीच रिश्तों की परतें खुलकर सामने आई थीं। इस पर डीजीपी ने कहा कि 99 प्रतिशत लोग अपनी ड्यूटी पूरी इमानदारी से करते हैं। एक फीसदी में भी कुछ लोगों की वजह से महकमा बदनाम होता है। ऐसे लोगों को चिह्नित किया जा रहा है और कार्रवाई भी हो रही है। अपराधियों से रिश्ते निभाने वाले पुलिस कर्मियों को बर्खास्त किया जाएगा।

शहीदों के परिजनों को जल्द नौकरी
डीजीपी ने कहा कि बिकरू कांड में शहीद डिप्टी एसपी और एक सिपाही के परिजनों को नौकरी मिल चुकी है। बाकी शहीदों के परिजनों की फाइल भी लगभग तैयार है। जल्द ही उन्हें भी नौकरी मिल जाएगी।

आतंकी संगठनों की तोड़ी जाएगी कमर
डीजीपी ने कहा कि कुछ स्लीपिंग मॉड्यूल्स पकड़े गए हैं। इंटेलीजेंस लगातार निगरानी कर रही है। एसटीएफ और एटीएस इस मामले को लेकर सक्रिय हैं और इसमें जल्दी ही अन्य गिरफ्तारियां होंगी।

अपराध नियंत्रण के लिए तीन मंत्र जरूरी
डीजीपी ने कहा कि अपराध नियंत्रण पुलिस के लिए प्रमुख है। तीन मंत्रों से अपराध नियंत्रित किया जा सकता है। अपराध पंजीकरण, इन्वेस्टिगेशन और सही प्रॉसीक्यूशन के जरिए अपराध नियंत्रित किया जाता है।

कानपुर में जल्द दिखेगा नया इंफ्रास्ट्रक्चर
पुलिस कमिश्नरेट बनने के बाद विभाग का नया इन्फ्रास्ट्रक्चर जल्द दिखेगा। बताया कि तीन दिन पहले मुख्यमंत्री ने समीक्षा की है। प्रस्ताव आना भी शुरू हो गए हैं। बहुत जल्द सारी व्यवस्थाओं को पूरा करा दिया जाएगा।

कानपुर जैसा पुलिस अस्पताल दूसरे जनपदों में भी
डीजीपी सुबह करीब 10:30 बजे पुलिस लाइन पहुंचे। यहां पुलिस कमिश्नर असीम अरुण, एडीजी जोन भानु भास्कर, कमिश्नर डॉ. राज शेखर, आईजी रेंज मोहित अग्रवाल समेत एडिश्नल पुलिस कमिश्नर आनंद प्रकाश तिवारी ने स्वागत किया। पुलिस लाइन में सलामी के बाद उन्होंने महापौर प्रमिला पाण्डेय के साथ आधुनिक पुलिस अस्पताल का उद्घाटन किया।

डीजीपी ने कहा कि कानपुर का पुलिस अस्पताल प्रदेश के लिए मिसाल बनेगा। मैं दो साल कानपुर में डीआईजी रह चुका हूं और इस अस्पताल को बहुत नजदीक से देखा है। कानपुर की जनता विचारों से प्रगतिशील है। हमेशा कानून व्यवस्था में मदद की है। हम उम्मीद करते हैं कि ऐसे ही आगे भी मदद करती रहेगी।

सार्थक प्रयास से मुश्किलें हो जाती हैं आसान
डीजीपी बोले, हम उम्मीद करते हैं कि जनता के सहयोग और अफसरों की सोच से पुलिस अस्पताल का विस्तार होता रहेगा। अस्पताल विकसित हो जाएगा तो पुलिस कर्मियों और उनके परिजनों को दूसरे अस्पताल का रुख नहीं करना पड़ेगा।

हर वक्त सरकार से अपेक्षा बेमानी
डीजीपी ने कहा कि हर काम के लिए सरकार से अपेक्षा नहीं करनी चाहिए। कानपुर कमिश्नरेट ने अपने स्तर से प्रयास करके पुलिस अस्पताल खड़ा किया है। जनता और उद्यमियों के सहयोग से जरूरी संसाधन जुटाएं। दूसरे जिलों के पुलिस कप्तानों को भी अपने स्टाफ के लिए ऐसी पहल करनी चाहिए।

एडीसीपी को सरहाना, सहयोग करने वालों को प्रश्स्ति पत्र
डीजीपी ने पुलिस अस्पताल बनाने में पहल करने वाले पुलिस कमिश्नर, पूर्व एडिश्नल सीपी हेडक्वाटर्स डॉ. मनोज कुमार और एडीसीपी डॉ. अनिल कुमार की सरहाना की। योगदान देने में मुथूट फाइनेंस कंपनी के पूर्व डीजीपी हिमाचल प्रदेश संजय कुमार और नागेन्द्र मिश्रा को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। डीजीपी ने कहा कि इस अस्पताल को मूर्त रूप देने में आईएमए, सीएमओ और निजी डॉक्टरों की जितनी प्रशंसा की जाए कम है।

पुलिस हॉस्पिटल पर एक नजर
– 16 ऑक्सीजन बेड फैसिलिटी के साथ शुरू हुआ था अस्पताल, बच्चों के लिए 3 बेड रिजर्व किए गए हैं
– दूसरी लहर में सीटी स्कोर 17,18 व 21 तक के 46 पुलिस कर्मी और उनके परिजन भर्ती किए गए थे
– सिर्फ 7 मरीजों को दूसरे अस्पतालों में रेफर किया गया, बाकी यहीं पर ठीक हुए
– 900 से अधिक कोविड टेस्ट कराए गए, फ्लू ओपीडी में 1020 मरीजों को लाभ मिला
– अब हॉस्पिटल में छह ऑक्सीजन कंसनट्रेटर और ऑक्सीजन पाइप लाइन डाली गई है

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