नई दिल्ली। कोरोना वायरस को रोकने के लिए लाकडाउन 4 लागू है। इस दौरान करीब 60 दिनों से बंद पड़े उद्योग धंधों और कारखानों की वजह से लाखों लोग बेरोजगार हो गए हैं। कई बड़ी कंपनियों में छंटनी की गई है जिसके वजह से हाजारों हुनर मंद लोग घर बैठने को मजबूर हो गए हैं। लगातार हो रही छटनी को देखते हुए सरकार ने छंटनी के शिकार लोगों के लिए आर्थिक मदद का एलान किया है
साथ ही नौकरी से हटाए जाने वाले कर्मचारियों को रिस्किल्ड किया जाएगा। रिस्किलिंग के लिए वर्कर्स रिस्किलिंग फंड बनाया जाएगा। इस फंड से 15 दिनों के वेतन के बराबर की राशि कर्मचारियों को कौशल विकास (स्किलिंग) के नाम पर दी जाएगी। छंटनी के शिकार होने पर दिए जाने वाले अन्य प्रकार के मुआवजों के अलावा यह राशि दी जाएगी। प्रस्तावित इंडस्ट्रीयल रिलेशन कोड के क्लॉज 83 में इस बात का प्रावधान किया गया है।
गत अप्रैल के आखिरी सप्ताह में संसद की स्थायी समिति ने इंडस्ट्रीयल रिलेशन कोड से संबंधित अपनी रिपोर्ट संसद को सौंपी है। हाल ही में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने राहत पैकेज की घोषणा के दौरान श्रम संहिता में बदलाव का जिक्र किया था। श्रम कानून में बदलाव के लिए चार कोड बनाए जा रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक इनमें से एक कोड को अंतिम रूप दिया जा चुका है, तीन कोड को अंतिम रूप देने का काम जारी है।
स्थायी समिति की रिपोर्ट के मुताबिक छंटनी के शिकार कर्मचारियों के लिए रिस्किल्ड फंड में सभी औद्योगिक इकाइयां अपना योगदान देंगी। स्थायी समिति की रिपोर्ट में मंत्रालय के पक्ष के मुताबिक हटाए गए कर्मचारियों को रिस्किल्ड फंड से 45 दिनों के भीतर यह राशि दे दी जाएगी। हालांकि, कंपनी के बंद होने की स्थिति में रिस्किलिंग के नाम पर 15 दिन के वेतन के बराबर की राशि नहीं दी जाएगी।
स्थायी समिति ने इस मामले में अपनी सिफारिश में कहा कि 15 दिनों की जगह कम से कम 30 दिनों के वेतन के बराबर की राशि दी चाहिए। समिति ने यह भी कहा कि छंटनी के शिकार हुए कर्मचारी को यह राशि सीधे उनके खाते में दी जाती है तो इससे रिस्किलिंग का उद्देश्य पूरा नहीं होगा। इसलिए रिस्किलिंग के नाम पर मिलने वाली राशि स्किल ट्रेनिंग सेंटर को दी जानी चाहिए। यह सेंटर नेशनल स्किल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन से पंजीकृत होना चाहिए।











