‘शक्तियों का दुरुपयोग कर रहा EC’, चिदंबरम ने भी चुनाव आयोग पर लगाए आरोप

 नई दिल्ली। बिहार मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण पर विवाद गहराता जा रहा है। विपक्ष लगातार सरकार को इस मामले पर घेरने की कोशिश में लगा है। इस बीच राहुल गांधी ने पिछले दिनों दावा किया कि उनके पास कई ऐसे सबूत हैं, जो बताते हैं कि चुनाव आयोग द्वारा वोटों में धांधली की जा रही है। अब इस विवाद पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद पी चिदंबरम ने अपनी प्रतिक्रिया दी है।

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कांग्रेस नेता ने आरोप लगाते हुए कहा कि चुनाव आयोग राज्यों के चुनावी चरित्र और पैटर्न को बदलने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा कि इस शक्तियों के दुरुपयोग से राजनीतिक और कानूनी रूप से लड़ा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि बिहार मतदाता पुनरीक्षण प्रक्रिया दिन प्रतिदिन और अधिक विवादास्पद होती जा रही है।

जानिए पी चिदंबरम ने क्या लगाए आरोप?

रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में लिखा कि बिहार में 65 लाख मतदाताओं के मताधिकार से वंचित होने का खतरा है, वहीं तमिलनाडु में 6.5 लाख लोगों को मतदाता के रूप में जोड़ने की खबरें चिंताजनक और स्पष्ट रूप से अवैध हैं।

उन्होंने आगे लिखा कि ऐसे लोगों को ‘स्थायी रूप से प्रवासी’ कहना प्रवासी श्रमिकों का अपमान है और तमिलनाडु के मतदाताओं के अपनी पसंद की सरकार चुनने के अधिकार में घोर हस्तक्षेप है।

कांग्रेस नेता ने उठाए ये सवाल

इसके अलावा कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने पूछा कि प्रवासी श्रमिकों को राज्य विधानसभा चुनाव में मतदान करने के लिए बिहार या अपने गृह राज्य क्यों नहीं लौटना चाहिए, जैसा कि वे आमतौर पर करते हैं। उन्होंने कहा, “क्या छठ पूजा के समय प्रवासी श्रमिक बिहार नहीं लौटते?”

चिदंबरम ने कहा, “मतदाता के रूप में नामांकित होने के लिए किसी व्यक्ति के पास एक निश्चित और स्थायी कानूनी घर होना चाहिए। प्रवासी श्रमिक का बिहार (या किसी अन्य राज्य) में ऐसा घर होता है। वह तमिलनाडु में मतदाता के रूप में कैसे नामांकित हो सकता है?”

उन्होंने आगे पूछा कि अगर प्रवासी मज़दूर के परिवार का बिहार में स्थायी घर है और वह बिहार में रहता है, तो उसे तमिलनाडु में “स्थायी रूप से प्रवासी” कैसे माना जा सकता है।

शक्तियों का दुरुपयोग कर रहा चुनाव आयोग

वहीं, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने कहा कि चुनाव आयोग अपनी शक्तियों का दुरुपयोग कर रहा है और राज्यों के चुनावी चरित्र और पैटर्न को बदलने की कोशिश कर रहा है। शक्तियों के इस दुरुपयोग का राजनीतिक और कानूनी रूप से विरोध किया जाना चाहिए।

SIR पर छिड़ा है विवाद

गौरतलब है कि बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के खिलाफ लगातार विपक्ष प्रदर्शन कर रहा है। विपक्ष का आरोप है कि चुनाव आयोग की इस कवायद का उद्देश्य विधानसभा चुनावों से पहले बिहार में “मतदाताओं को मताधिकार से वंचित” करना है। वे संसद के दोनों सदनों में इस मुद्दे पर चर्चा की मांग कर रहे हैं।

(इनपुट पीटीआई के साथ)

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