बिहार के बाद अब देशभर में SIR की तैयारी, अक्टूबर से हो सकती है शुरुआत

नई दिल्ली। बिहार में मतदाता सूची के विशेष सघन पुनरीक्षण (एसआइआर) का काम पूरा होते ही चुनाव आयोग अब बिहार की तर्ज पर देश भर में एसआइआर कराएगा। इसकी शुरूआत अक्टूबर के पहले हफ्ते से हो सकती है। चुनाव आयोग ने बुधवार को सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारियों (सीईओ ) के साथ चर्चा में एसआइआर से जुड़ी तैयारियों को जांचा। साथ ही बिहार में कराए गए एसआइआर के दौरान दिए गए दिशा-निर्देशों का बारीकी से अध्ययन करने के निर्देश दिए।

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बिहार में एसआइआर का काम इसी महीने 30 सितंबर को पूरा रहा है। इस दिन बिहार की अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित हो जाएगी। चुनाव आयोग की ओर से बुलाए गए देश के सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के सीईओ सम्मेलन में एसआईआर के साथ चुनाव सुधारों को लेकर दिए गए दिशा-निर्देशों के अमल को भी जांचा गया।

बिहार में सभी शंकाओं को तुरंत खत्म किया- चुनाव आयोग

इस दौरान बिहार सीईओ की ओर से वहां कराए गए एसआइआर को लेकर एक प्रस्तुति भी दी गई। जिसमें एसआइआर के दौरान सामने आयी चुनौतियों और उससे निपटने के लिए उठाए गए कदमों को भी साझा किया गया। साथ ही बताया कि इस दौरान उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती फैलाए जा रहे फेंक नेरेटिव से निपटने की थी। इसके लिए सभी राजनीतिक दलों और जिला निर्वाचन अधिकारियों के साथ ही उन्होंने लगातार बैठकें की। उनकी किसी भी तरह की शंकाओं को तुरंत ही खत्म किया।

सम्मेलन की शुरूआत मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और उनके सहयोगी चुनाव आयुक्त डा. सुखवीर सिंह संधू व डॉ. विवेक जोशी ने एसआइआर से जुड़ी तैयारियों को लेकर पूर्व में दिए गए निर्देशों के अमल से की। साथ ही पूछा बूथ लेवल आफीसर(बीएलओ) का प्रशिक्षण दे दिया गया है या नहीं। राजनीतिक दलों से जुड़े बूथ लेवल एजेंट (बीएलए) की तैनाती दे दी गई या नहीं। राजनीतिक दलों के साथ बैठक की गई या नहीं। आयोग ने राज्यों को जिले वार नए सिरे से एसआइआर से जुड़ी तैयारियों को जांचने और उसके निर्देशों के बारे में सभी बताने के निर्देश दिए, ताकि किसी भी स्तर पर भ्रम की स्थिति न पैदा हो।

मई 2026 से पहले देश भर में एसआइआर को पूरा करने लक्ष्य

देश भर में मतदाता सूची का एक साथ एसआइआर कराने की तैयारियों के साथ ही चुनाव आयोग ने इस काम को मई 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य भी निर्धारित किया है।

आयोग से जुड़े उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक अगले वर्ष मई में तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, असम, केरल और पुडुचेरी में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले इस काम को पूरा कर लिया जाएगा। आयोग ने सम्मेलन में साफ कहा कि मतदाता सूची में इसके बाद किसी तरह की कोई भी त्रुटि मिली तो संबंधित अधिकारियों की भी जिम्मेदारी तय होगी।

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