देश भर में या सिर्फ चुनावी राज्यों में होगा SIR! सोमवार शाम को ऐलान

निर्वाचन आयोग बिहार के बाद अब देश के अन्य राज्यों में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) कराने जा रहा है। इस देशव्यापी एसआईआर की घोषणा करने के लिए निर्वाचन आयोग सोमवार शाम को एक विशेष संवाददाता सम्मेलन करेगा। हालांकि, यह अभी तय नहीं है कि एसआईआर पूरे देश में शुरू होगा या अभी सिर्फ चुनावी राज्यों में होगा।

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हालांकि पूरी जानकारी का अभी इंतजार है, लेकिन निर्वाचन आयोग द्वारा प्रेस कांफ्रेंस में एसआईआर के पहले चरण की घोषणा किये जाने की संभावना है, जिसमें 10 से 15 राज्य शामिल होंगे। कहा जा रहा है कि इनमें वे राज्य भी शामिल होंगे जहां 2026 में विधानसभा चुनाव होने हैं। तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, केरल, असम और पुडुचेरी में अगले साल चुनाव होने हैं। कहा जा रहा है कि जिन राज्यों में इस समय स्थानीय निकाय चुनाव चल रहे हैं या होने वाले हैं, वहां फिलहाल यह प्रक्रिया नहीं होगी।

बिहार की तर्ज पर होगा

बिहार में हाल ही में यह विशेष पुनरीक्षण पूरा हुआ है, जिसके बाद वहां नई मतदाता सूची पर चुनाव हो रहा है। वहां अंतिम मतदाता सूची 30 सितंबर को प्रकाशित की गई, जिसमें लगभग 7.42 करोड़ नाम दर्ज हैं। हालांकि बिहार में हुआ एसआईआर विवादों से घिरा रहा। इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अभी भी सुनवाई जारी है।

पुरानी सूची बनेगी आधार

बिहार की तरह ही हर राज्य में पिछली बार हुए एसआईआर को कटऑफ वर्ष माना जाएगा। जैसे बिहार में 2003 की सूची को आधार बनाया गया था, वैसे ही अन्य राज्यों में भी पिछली एसआईआर को मानक के रूप में अपनाया जाएगा। ज्यादातर राज्यों में पिछला एसआईआर 2002 से 2004 के बीच हुआ था। अब वर्तमान वोटर्स की जांच उसी सूची से की जाएगी। सत्यापित करने के बाद नाम हटाए जाएंगे और जोड़े जाएंगे।

अवैध मतदाताओं की पहचान उद्देश्य

चुनाव आयोग का कहना है कि इस विशेष अभियान का मुख्य उद्देश्य अवैध मतदाताओं खासकर विदेशी अवैध प्रवासियों को मतदाता सूची से हटाना है। खासतौर पर बांग्लादेश और म्यांमार से आए लोगों की पहचान कर उनके नाम हटाए जाएंगे। हालांकि, बिहार में भी यही दावा किया गया था, लेकिन आयोग ने अभी तक हटाए गए अवैध विदेशियों का डेटा नहीं दिया है। विपक्षी दलों का कहना है कि यह प्रक्रिया गरीब, विस्थापित और अल्पसंख्यक समुदायों के लिए नुकसानदेह साबित हो सकती है।

चुनाव आयोग देशव्यापी एसआईआर के लिए अब तक दो बार राज्यों के चुनाव अधिकारियों के साथ बैठक कर चुका है। कई राज्यों ने अपनी पुरानी मतदाता सूचियां वेबसाइट पर सार्वजनिक कर दी हैं ताकि लोग उन्हें देखकर अपनी प्रविष्टियां जांच सकें। दिल्ली में भी 2008 की सूची वेबसाइट पर डाली गई है, जबकि उत्तराखंड ने 2006 की सूची जारी की है।

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