ऑपरेशन सिंदूर का अधूरा काम पूरा करेगा भारत? राफेल-तेजस-ब्रह्मोस की तैनाती

नई दिल्ली: लाल किला के पास हुए बम धमाकों के तार पाकिस्तान तक पहुंच रहे हैं। जांच एजेंसियों को पाकिस्तान के आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के हाथ होने के सबूत मिलते दिख रहे हैं। बताया जा रहा है कि जिस फरीदाबाद मॉड्यूल के पास करीब 2900 किलो अमोनियम नाइट्रेट जैसा विस्फोटक मिला है, उसके संबंध जैश से जुड़ते हैं।

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अधिकारियों ने जैश-ए-मोहम्मद और अंसार गजवत-उल-हिंद से जुड़े एक सफेदपोश आतंकी मॉड्यूल का पर्दाफाश किया है। यह मॉड्यूल कश्मीर, हरियाणा और उत्तर प्रदेश तक फैला हुआ था। डिफेंस एनालिस्ट लेफ्टिनेंट कर्नल (रि.) जेएस सोढ़ी के अनुसार, आतंकवाद के इस मर्ज की जड़ें पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (POK) और हाजी पीर ही हैं, जिसे फिर से हासिल करने का भारत के पास बड़ा मौका है। सर्दियों में इन्हीं इलाकों से आतंकी घुसपैठ करते हैं, ऐसे में भारत को ऑपरेशन सिंदूर की तरह बड़ी कार्रवाई करनी चाहिए।

जैश सरगना मसूद अजहर की बहन को कमान

डिफेंस एनालिस्ट लेफ्टिनेंट (रि.) कर्नल जेएस सोढ़ी के अनुसार, ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान और POK में आतंकी ठिकानों पर 80-90 घंटे तक सटीक हवाई हमले किए गए। इस ऑपरेशन में जैश-ए-मोहम्मद के बहावलपुर मुख्यालय और लश्कर-ए-तैयबा के मुरीदके ठिकानों को नष्ट किया गया। इसके बाद भी पाकिस्तान अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है।

वहीं, जैश-ए-मोहम्मद की महिला विंग का गठन किया गया है, जिसकी कमान इस आतंकी संगठन के सरगना मसूद अजहर की बहन सैयदा अजहर को दे दी गई है। लालकिला धमाके में शामिल आरोपी डॉक्टर शाहीन शाहिदा भी भारत में जैश ए मोहम्मद की महिला कमान संभाल रही थी। डॉक्टर शाहीन शाहिद लगभग पिछले दो साल से विस्फोटक जमा कर रही थी। सूत्रों की मानें तो जांच के दौरान उसने कबूल किया है कि वह और उसके साथी डॉक्टर भारत में बड़े आतंकी हमले को अंजाम देने की साजिश रच रहे थे।

ऑपरेशन गुलमर्ग चलाकर POK कर लिया था कब्जा

नवभारत टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान ने 1947-48 के युद्ध के दौरान ऑपरेशन गुलमर्ग चलाया था। इसके तहत पाकिस्तान कबायलियों की मदद से जम्मू-कश्मीर का एक तिहाई हिस्सा अपने कब्जे में ले लिया। भारत अगर उस वक्त संयुक्त राष्ट्र नहीं जाता तो आज हालात कुछ और होते। यही हिस्सा पीओके कहलाता है। पीओके रणनीतिक रूप से भारत के लिए काफी अहम है।

यह जम्मू-कश्मीर के साथ-साथ कई अंतरराष्ट्रीय सीमा साझा करता है। इसमें पश्चिम में पाकिस्तान का पंजाब और उत्तर-पश्चिम सीमांत प्रांत यानी खैबर-पख्तूनख्वा, उत्तर-पश्चिम में अफगानिस्तान का लाखन हॉल और उत्तर में चीन का शिंजियांग प्रांत शामिल है। करीब 13 हजार वर्ग किमी के इस इलाके में तकरीबन 30 लाख आबादी रहती है।

POK की जंग में क्या चीन में कूदेगा

डिफेंस एक्सपर्ट जेएस सोढ़ी के अनुसार, पीओके हासिल करना इतना आसान नहीं है। 2019 में पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल दीपक कपूर ने बयान दिया था कि पीओके को हासिल करना बेहद मुश्किल है। 9 अगस्त, 2023 को एक लेख में पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल एमएम नरवणे ने भी कहा था कि आज के जमाने में टू-फ्रंट वॉर कोई नहीं जीत पाया है। सोढ़ी के अनुसार, अगर पीओके के लिए जंग होगी तो उसमें सिर्फ पाकिस्तान से जंग नहीं होगी, उसमें चीन भी कूदेगा। ऐसे में भारत को अपनी पूरी तैयारी करनी चाहिए, ताकि चीन ऐसे संघर्ष में न कूदे।

हाजी पीर दर्रा भारत के लिए कितना जरूरी है

डिफेंस एनालिस्ट सोढ़ी बताते हैं कि हाजी पीर दर्रा हिमालय की पीर पंजाल पर्वत श्रृंखला में है। यह दर्रा जम्मू-कश्मीर के पुंछ को POK के रावलकोट से जोड़ता है। भारत हाजी पीर दर्रे को अपने पास रखकर पाकिस्तान को जम्मू और कश्मीर में घुसपैठ करने से रोक सकता था। हाजी पीर दर्रा 2,637 मीटर (8,652 फीट) की ऊंचाई पर है। हाजी पीर दर्रा अगर भारत के पास हो तो रणनीतिक रूप से यह कई तरह से फायदेमंद है। अभी यह पाकिस्तान के कब्जे में है। अगर यह दर्रा भारत के पास होता तो इससे पुंछ और उरी के बीच सड़क की दूरी 282 किलोमीटर से घटकर 56 किलोमीटर हो जाती है। इससे जम्मू और कश्मीर घाटी के बीच बेहतर कनेक्टिविटी होती। सैन्य आवाजाही में आसानी होती है।

आजादी से पहले क्या थी हाजी पीर की स्थिति

बंटवारे से पहले उत्तर कश्मीर यानी जम्मू घाटी को दक्षिण कश्मीर यानी घाटी से जोड़ने वाली मुख्य सड़क हाजी पीर से ही होकर गुजरती थी। हालांकि, 1948 में पाकिस्तान ने PoK पर कब्जा कर लिया, जिसमें हाजी पीर दर्रा भी शामिल था। इससे यह रास्ता भारत के हाथ से निकल गया। यह दर्रा भारत को PoK के एक बड़े हिस्से तक आसानी से पहुंचने में मदद करता। इससे पाकिस्तान को लगातार अपनी नाजुक स्थिति का एहसास होता रहता। भारत ने 1965 के युद्ध में हाजी पीर वापस पा लिया था, मगर ताशकंद समझौते के दौरान पाकिस्तान को अपनी जीती हुई जमीन पाकिस्तान को वापस कर दी थी। पाकिस्तान हाजी पीर दर्रे का इस्तेमाल कश्मीर में घुसपैठ और आतंकवाद के लिए लगातार करता आ रहा है।

भारत के युद्धाभ्यास चीन-पाकिस्तान-बांग्लादेश को मैसेज

डिफेंस एनालिस्ट जेएस सोढ़ी बताते हैं कि भारत की ओर से इन दिनों पूर्वी और पश्चिमी हिस्से में बड़े पैमाने पर युद्धाभ्यास किया जा रहा है। भारतीय सेना के इस युद्धाभ्यास में राफेल, ब्रह्मोस, तेजस और सुखोई जैसे जंगी जेट्स अपनी ताकत दिखाने वाले हैं। वहीं, पूर्वोत्तर में भी चीन सीमा के पास भारतीय वायुसेना के राफेल, तेजस और सुखोई फाइटर्स अपना दम दिखाएंगे, जिसका मकसद पाकिस्तान और बांग्लादेश के साथ-साथ चीन को भी सख्त संदेश देना है। इन्हीं लड़ाकू विमानों और मिसाइलों ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान स्थित आतंकी ठिकानों पर जमकर तबाही मचाई थी।

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