G20 में पहली बार मेजबानी हैंडओवर नहीं हुई, ट्रम्प के न आने से नाराज था साउथ अफ्रीका

South African President Cyril Ramaphosa addresses the opening session of a G20 Leaders' Summit plenary session at the Nasrec Expo Centre in Johannesburg on November 22, 2025. (Photo by Misper Apawu / POOL / AFP)

साउथ अफ्रीका में 20वां G20 समिट रविवार को बिना औपचारिक हैंडओवर के समाप्त हो गया। साउथ अफ्रीकी राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा ने किसी अमेरिकी अधिकारी को गवेल (अध्यक्षता का प्रतीक हथौड़ा) नहीं सौंपा।

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विदेश मंत्री रोनाल्ड लामोला ने कहा कि आज कोई औपचारिक हैंडओवर सेरेमनी नहीं होगी। अमेरिका चाहे तो सोमवार से DIRCO (दक्षिण अफ्रीका के विदेश मंत्रालय) के दफ्तर से G20 से जुड़े दस्तावेज ले सकता है।

इसके बाद व्हाइट हाउस की डिप्टी सेकेट्ररी अन्ना केली ने आरोप लगाया कि साउथ अफ्रीका ने G20 का औपचारिक हैंडओवर नहीं कर गलत किया है।

साउथ अफ्रीकी राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा ने रविवार को G20 समिट के समापन का ऐलान किया।
साउथ अफ्रीकी राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा ने रविवार को G20 समिट के समापन का ऐलान किया।

जूनियर अधिकारी को ‘गवेल’ देने को तैयार नहीं हुए अफ्रीकी राष्ट्रपति

दरअसल, हर G20 समिट में पिछले साल की मेजबानी करने वाला देश, अगले मेजबानी करने वाले देश को औपचारिक रूप से ‘गवेल’ सौंपता है। यह एक लाइव सेरेमनी होती है, जिसमें दोनों देशों के नेता आमने-सामने मौजूद रहते हैं। इस बार अमेरिका की तरफ से राष्ट्रपति ट्रम्प शामिल नहीं हुए।

ट्रम्प ने कहा कि साउथ अफ्रीका में गोरे ईसाइयों को मारा जा रहा है और उनकी जमीन छीनी जा रही है। इसके विरोध में उन्होंने शामिल होने से इनकार कर दिया था। हालांकि बाद में उन्होंने G20 हैंडओवर के लिए एक राजदूत को भेजने की बात कही थी लेकिन साउथ अफ्रीकी राष्ट्रपति ने कहा था कि वे किसी जूनियर अधिकारी को गवेल देने की बजाए एक खाली कुर्सी को मेजबानी सौंप देंगे।

साउथ अफ्रीका बोला- ट्रम्प को समिट का सम्मान करना चाहिए था

दक्षिण अफ्रीका के विदेश मंत्री रोनाल्ड लामोला ने कहा कि अमेरिका G20 का सदस्य है, उसे समिट में अपनी मौजूदगी दिखानी चाहिए थी। यह एक लीडर्स समिट है, इसमें इसमें राष्ट्रपति या फिर कोई मंत्री शामिल होना चाहिए।

DIRCO ने कहा कि अमेरिका के साथ उनका कोई राजनयिक विवाद नहीं है। लेकिन G20 जैसे मंच पर किसी जूनियर अधिकारी को भेजकर हैंडओवर नहीं किया जा सकता। यह कोई विवाद नहीं, बल्कि सम्मान का सवाल है।

G20 समिट के फैमिली फोटो सेशन में वर्ल्ड लीडर्स शामिल हुए।
G20 समिट के फैमिली फोटो सेशन में वर्ल्ड लीडर्स शामिल हुए।

मोदी बोले- AI के गलत इस्तेमाल पर रोक लगाना जरूरी

PM मोदी ने जोहान्सबर्ग में हो रहे G20 समिट के दौरान AI के गलत इस्तेमाल को लेकर चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि इससे दुनिया को बहुत बड़ा नुकसान हो सकता है, इसलिए सभी देशों को मिलकर इसके लिए मजबूत नियम-कानून बनाने चाहिए।

मोदी ने कहा कि AI पर एक ग्लोबल कॉम्पैक्ट (यानी अंतरराष्ट्रीय समझौता) होना जरूरी है। इसमें तीन चीजें सबसे जरूरी होंगी। निगरानी (Oversight), सुरक्षा (Safety) और पारदर्शिता (Transparency)।

उन्होंने खास तौर पर चेतावनी दी कि डीपफेक वीडियो-ऑडियो, अपराध और आतंकवाद में AI का इस्तेमाल बहुत खतरनाक है। मोदी ने कहा कि अगर अभी कदम नहीं उठाए गए, तो AI का गलत इस्तेमाल समाज के लिए बड़ी समस्या बन सकता है। इसलिए समय रहते पूरी दुनिया को एकजुट होकर कार्रवाई करनी चाहिए।

पीएम मोदी ने G20 समिट से इतर इटली की पीएम जॉर्जिया मेलोनी के साथ द्विपक्षीय बातचीत की।
पीएम मोदी ने G20 समिट से इतर इटली की पीएम जॉर्जिया मेलोनी के साथ द्विपक्षीय बातचीत की।
पीएम मोदी ने शनिवार को जापान की पीएम साने ताकाइची से भी द्विपक्षीय बैठक की।
पीएम मोदी ने शनिवार को जापान की पीएम साने ताकाइची से भी द्विपक्षीय बैठक की।
पीएम मोदी ने कनाडा के पीएम मार्क कार्नी से द्विपक्षीय बातचीत की।
पीएम मोदी ने कनाडा के पीएम मार्क कार्नी से द्विपक्षीय बातचीत की।

मोदी-रामफोसा की द्विपक्षीय बैठक, टेक्नोलॉजी, स्किल डेवलपमेंट पर चर्चा

पीएम मोदी ने रविवार को G20 शिखर सम्मेलन से इतर साउथ अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा के साथ द्विपक्षीय बैठक की।

इससे पहले मोदी ने बताया था कि, कल G20 शिखर सम्मेलन की बैठक अच्छी रही। उन्होंने कहा, ‘मैंने दो सत्रों में भाग लिया और प्रमुख मुद्दों पर अपने विचार साझा किए।’

मोदी ने X पर बताया कि, ‘जोहान्सबर्ग में G20 शिखर सम्मेलन के दौरान राष्ट्रपति रामफोसा के साथ शानदार बैठक हुई। हमने भारत-दक्षिण अफ्रीका साझेदारी के सभी पहलुओं की समीक्षा की, विशेष रूप से ट्रेड, कल्चर, इंवेस्टमेंट और टेक्नोलॉजी, स्किल डेवलपमेंट, AI, रेयर अर्थ मेटल में सहयोग में विविधता लाने पर।’ इसके साथ ही मोदी ने G20 की सफल अध्यक्षता के लिए राष्ट्रपति रामफोसा को बधाई दी।

मोदी ने साउथ अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा के साथ बैठक की।
मोदी ने साउथ अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा के साथ बैठक की।

IBSA बैठक में मोदी बोले- वैश्विक संस्थानों ​​​​​​में सुधार अब जरूरत बन गई है

मोदी G20 शिखर सम्मेलन के दौरान भारत-ब्राजील-दक्षिण अफ्रीका (IBSA) नेताओं की बैठक में शामिल हुए। इसमें विदेश मंत्री एस.जयशंकर भी शामिल हुए। ब्राजील के राष्ट्रपति लूला डि सिल्वा और दक्षिण अफ्रीकी राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा भी बैठक में मौजूद रहे।

इस दौरान मोदी ने 4 मुद्दों पर बात रखी-

  • वैश्विक संस्थाओं में सुधार जरूरी: IBSA को दुनिया को एक संदेश देना चाहिए कि संयुक्त राष्ट्र जैसे वैश्विक संस्थानों में सुधार अब वैकल्पिक नहीं, बल्कि जरूरी हो गया है। ये संस्थाएं 21वीं सदी की वास्तविकता से बहुत दूर हो चुकी हैं। अब बदलाव का समय आ गया है।
  • आतंकवाद के खिलाफ एकजुट लड़ाई: आतंकवाद के मुद्दे पर कोई दोहरा मापदंड नहीं चल सकता। तीनों देशों को इस लड़ाई में पूरा समन्वय रखना होगा।
  • आईबीएसए डिजिटल इनोवेशन एलायंस की शुरुआत: तकनीक का इस्तेमाल इंसानों के विकास के लिए किया जाए। इसके लिए एक नया ‘आईबीएसए डिजिटल इनोवेशन अलायंस’ बनाया जाना चाहिए।
  • IBSA फंड फॉर क्लाइमेट-रेजिलिएंट एग्रीकल्चर: खाद्य सुरक्षा और सतत विकास के लिए ‘IBSA फंड फॉर क्लाइमेट-रेजिलिएंट एग्रीकल्चर’ शुरू किया जाए। यह कोष जलवायु परिवर्तन से प्रभावित कृषि को मजबूत बनाने में मदद करेगा।

IBSA (India-Brazil-South Africa) एक त्रिपक्षीय अंतरराष्ट्रीय मंच है जो भारत, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका के बीच सहयोग को बढ़ावा देने के लिए बनाया गया है।

6 जून 2003 को ब्राजील में तीनों देशों के तत्कालीन विदेश मंत्रियों ने ब्रासीलिया घोषणापत्र (Brasília Declaration) पर हस्ताक्षर करके IBSA की औपचारिक शुरुआत की।

IBSA बैठक में भाग लेते पीएम मोदी, ब्राजीली राष्ट्रपति लूला डि सिल्वा और दक्षिण अफ्रीकी राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा।
IBSA बैठक में भाग लेते पीएम मोदी, ब्राजीली राष्ट्रपति लूला डि सिल्वा और दक्षिण अफ्रीकी राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा।
IBSA बैठक में भारत, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका के अधिकारी शामिल हुए।
IBSA बैठक में भारत, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका के अधिकारी शामिल हुए।

साउथ अफ्रीका के बनाए घोषणा पत्र को मंजूरी मिली

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के बॉयकॉट के बावजूद 20वीं G20 समिट के पहले दिन शनिवार को सदस्य देशों ने साउथ अफ्रीका के बनाए घोषणा पत्र को सर्वसम्मति से मंजूर कर लिया।

साउथ अफ्रीकी राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा ने बताया कि सभी देशों का अंतिम बयान पर सहमत होना बेहद जरूरी था, भले ही अमेरिका इसमें शामिल नहीं हुआ। वहीं, ट्रम्प ने आखिरी सेशन में 2026 की मेजबानी लेने के लिए एक अमेरिकी अधिकारी को भेजने की बात कही थी।

रॉयटर्स के मुताबिक, दक्षिण अफ्रीकी अध्यक्षता ने अमेरिकी अधिकारी को मेजबानी सौंपने के प्रस्ताव को नकार दिया। अफ्रीकी राष्ट्रपति रामफोसा आज G20 की अगली अध्यक्षता ‘खाली कुर्सी’ को सौंपेंगे।

साउथ अफ्रीकी राष्ट्रपति ने परंपरा तोड़ी

इस बार के G20 समिट में दो बड़ी परंपराएं टूट गईं और यही वजह है कि यह बैठक ऐतिहासिक रूप से अलग मानी जा रही है।

पहली परंपरा मेजबानी सौंपने की है। हर G20 समिट में पिछले साल की मेजबानी करने वाला देश, इस साल के मेजबानी देश को औपचारिक रूप से ‘गवेल’ (अध्यक्षता का प्रतीक) सौंपता है।

यह एक लाइव सेरेमनी होती है, जिसमें दोनों देशों के नेता आमने-सामने मौजूद रहते हैं। इस बार अमेरिका की तरफ से राष्ट्रपति ट्रम्प शामिल नहीं हुए।

2024 में G20 की मेजबानी अमेरिका (सैन फ्रांसिस्को) ने की थी, इसलिए गवेल ट्रम्प को ही सौंपना था। लेकिन उनकी गैरहाजिरी की वजह से साउथ अफ्रीकी राष्ट्रपति ने खाली कुर्सी को मेजबानी सौंपने का ऐलान किया है।

पहले दिन ही पास हुआ G20 समिट का घोषणापत्र

दूसरी बड़ी परंपरा घोषणापत्र से जुड़ी है। G20 समिट के अंत में सभी देश मिलकर एकमत से संयुक्त घोषणापत्र जारी करते हैं।

यानी दो दिन की बैठकें, चर्चाएं, ड्राफ्टिंग सब पूरा होने के बाद अंतिम सत्र में घोषणापत्र जारी किया जाता है। लेकिन इस बार घोषणापत्र पहले ही दिन सर्वसम्मति से पास हो गया।

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