EVM से बैलेट पेपर और SIR तक… चुनाव आयोग और राज्यों के बीच महामंथन

नई दिल्ली। केंद्रीय निर्वाचन आयोग ने सभी राज्य निर्वाचन आयोगों से राष्ट्रीय व संवैधानिक हित में परस्पर तालमेल और स्वीकार व्यवस्था के अनुरूप काम करने का सुझाव देते हुए कानूनी रूप से व्यवहार्य चुनावी ढांचे को ही अपनाने पर जोर दिया है।

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चुनाव आयोग ने यह सुझाव ऐसे समय दिए हैं, जब कर्नाटक के राज्य निर्वाचन आयोग ने 25 सालों बाद अपने स्थानीय चुनाव को ईवीएम की जगह फिर से बैलेट पेपर से कराने का ऐलान किया है। इसके साथ ही राजस्थान व झारखंड जैसे राज्यों में नगरीय निकाय व पंचायत चुनावों को बैलेट से कराने पर मंथन तेज हुआ है।

ECI ने राज्यों को तालमेल से काम करने को कहा

राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के राज्य निर्वाचन आयुक्तों के एक दिनी राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने मतदाता सूची की शुद्धता पर जोर देते हुए कहा कि यह लोकतंत्र का मूल आधार है। साथ ही कहा कि कुशल और पारदर्शी तरीके से चुनावों का संचालन भी लोकतंत्र को मजबूत बनाता है।

आयोग ने इस दौरान सभी राज्य निर्वाचन आयोग की सहमति से एक घोषणा पत्र भी जारी किया। जिसमें हर साल राज्य निर्वाचन आयुक्तों का एक राष्ट्रीय राउंड टेबल सम्मेलन आयोजित करने पर सहमति बनी है।आयोग ने राज्य निर्वाचन आयुक्तों के साथ एक मतदाता सूची बनाने पर भी चर्चा की।

साथ ही कहा गया कि इससे बूथ लेवल आफीसर पर अतिरिक्त दबाव नहीं पड़ेगा। हालांकि राज्य निर्वाचन आयुक्तों ने इसे लेकर आने वाली चुनौती गिनाई। ईवीएम की उपलब्धता व रखरखाव आदि से जुड़ी चुनौतियों भी गिनाई। आयोग ने अपने उप चुनाव आयुक्तों की अगुवाई में इसके अध्ययन के लिए कानूनी व तकनीकी अधिकारियों की संयुक्त टीम गठित करने पर सहमति दी जो तीन महीनों में प्रस्ताव प्रस्तुत करेगी।

घोषणा पत्र के अहम बिंदु

  • एक मतदाता सूची तैयार करने की तलाशेंगे संभावनाएं।
  • राज्य निर्वाचन आयोग के अधिकारियों व कर्मचारियों को ट्रिपल आइडीईएम के जरिए दिलाया जाएगा प्रशिक्षण।
  • राज्य निर्वाचन आयोग को भी ईसीआई नेट के इस्तेमाल की मिलेगी अनुमति।
  • ईसीआई और एसईसी अपने चुनावी कानूनों के बीच तालमेल बिठाने पर मिलकर करेगी काम।
  • दोनों ही एक-दूसरे से चुनावी से जुड़ी अच्छी पहलों को करेंगे साझा।

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