नई दिल्ली: संसद के मानसून सत्र का पहला दिन पिछले कई सालों के संसद सत्र से एकदम अलग रहा। भले ही सत्र की शुरूआत पारंपरिक तरीके से पीएम नरेंद्र मोदी के प्रेस स्टेटमेंट के साथ हुई लेकिन उसके बाद जो हुआ वह शायद पहली बार हुआ। पेपर लीक का विरोध कर रहे प्रदर्शनकारी युवा भारी सुरक्षा इंतजाम के बीच भी जंतर मंतर से निकलकर संसद के दरवाजे तक पहुंच गए। प्रेस क्लब के सामने संसद के जिस गेट तक प्रदर्शनकारी पहुंचे वो गेट बंद ही रहता है। तमाम बैरिकेड्स को पार करते हुए प्रदर्शनकारी संसद के एकदम करीब पहुंच गए।
अचानक बंद किए संसद के सभी गेट
संसद के अंदर का माहौल भी एकदम अलग था। आंदोलन को सपोर्ट करने विपक्ष के कई सांसद जंतर मंतर चले गए थे। लोकसभा और राज्यसभा दोनों की कार्यवाही बार बार स्थगित होती रही। 12 बजे के आसपास जब प्रदर्शनकारी संसद के दरवाजे तक पहुंच गए तो संसद के बाकी सभी गेट भी बंद कर दिए गए। जिस गेट से सांसदों की गाड़ी आती-जाती है वह गेट बंद कर दिया गया और सिक्योरिटी एकदम मुस्तैद हो गई।
क्विक रिएक्शन टीम एक्शन मोड में आ गई और 15-20 मिनट तक यह गेट भी पूरी तरह बंद रखा गया। साउथ गेट पर जहां सिक्योरिटी मुस्तैद थी वहीं नॉर्थ गेट के बाहर से नारों की आवाजें गूंज रही थी। करीब पौने एक बजे नारों की आवाज के साथ ही आंसू गैस के गोले दागने की आवाजें भी संसद परिसर के अंदर तक गूंजने लगी।
आसमान में साफ नजर रहा था धुंआ
शुरू में आंसू गैस के गोले दागने की फ्रिक्वेंसी कम थी लेकिन कुछ देर बाद कई गोले लगातार दागे गए। संसद परिसर में मौजूद लगभग सभी के आंख और कान नॉर्थ गेट की तरफ ही लगे रहे जहां दीवार के दूसरी तरफ आंदोलकारी अपनी आवाज बुलंद कर रहे थे और उन आवाजों के साथ आंसू गैस गोले दागने की आवाजें मिक्स हो रही थी।
आसमान में धुंआ साफ दिख रहा था। राज्यसभा की कार्यवाही स्थगित हुई तो संसद के शार्दुल गेट के पास कांग्रेस सांसद रेणुका चौधरी आईं तभी जबरदस्त आवाज आई, उन्होंने पूछा ये किसकी आवाज है, सिक्योरिटी ने बताया कि आंसू गैस के गोले दागने की। जिसके बाद रेणुका चौधरी भड़कती हुई बोली कि ये सब कायर हैं जो बच्चों पर आंसू गैस के गोले दाग रहे हैं।
तभी कांग्रेस और विपक्ष के कुछ और सांसद भी वहां गेट पर पहुंचें। रेणुका चौधरी गुस्से में बोलती रहीं कि किसानों पर वॉटर कैनन और बच्चों पर टियर गैस, वाह क्या ताकतवर सरकार है। इमरान प्रतापगढ़ी भी उनके साथ ही थे और बोले कि बच्चों पर लाठीचार्ज करने वाली सरकार डरकोप होती है बहादुर नहीं। रेणुका चौधरी ने कहा कि ये मैं बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करुंगी, मैं जा रही हूं बाहर।
इंटरनेट भी हुआ बंद, गुस्से में दिखे सांसद
संसद के दरवाजे बंद थे और न कोई बाहर जा सकता था न ही कोई अंदर आ सकता था। इससे सांसद काफी गुस्से में दिखे। कई घंटे तक संसद के गेट बंद रहे और इंटरनेट भी काम नहीं कर रहा था। बाहर की आवाजें और संसद के अंदर इंटरनेट न चलना, संसद परिसर में इसी की चर्चा होती रही। कई सांसदों ने हाउस से निकल कर पूछा कि इंटरनेट क्यों काम नहीं कर रहा है।
बाहर से आती आंसू गैस की आवाजों को बीच कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि अगर आपको एग्जाम कंडक्ट करना नहीं आता तो छोड़ो किसी और को दो। ये सरकार स्टूडेंट पर जो लाठीचार्ज कर रही है ये डेमोक्रेसी पर हमला है। जो लोग अपनी बात रखने के लिए दिल्ली आते हैं उन पर लाठी चार्ज होता है उन्हें डराया जाता है तो ये डेमोक्रेसी नहीं है। सरकार बच्चों को युवाओं को तंग कर रही है और ये सरकार सत्ता में रहने लायक नहीं है।










