हॉकी इंडिया के बोर्ड की सहमति के बिना जर्सी का रंग कैसे बदला गया?

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने शनिवार को भारतीय हॉकी टीम की जर्सी का रंग नीला से केसरिया किए जाने के फैसले पर तत्काल पुनर्विचार की मांग की और सवाल किया कि इतना महत्वपूर्ण निर्णय ‘हॉकी इंडिया’ के कार्यकारी बोर्ड की जानकारी और सहमति के बिना कैसे लिया गया।

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उन्होंने यह भी कहा कि यह केवल खेल से जुड़ा निर्णय नहीं, बल्कि करोड़ों भारतीय नागरिकों की भावनाओं और देश की खेल परंपरा से जुड़ा विषय है।

कांग्रेस अध्यक्ष का सवाल

कांग्रेस अध्यक्ष ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ” भारतीय खिलाड़ी वर्षों से दुनिया भर में ‘‘मेन इन ब्लू’’, ‘‘द ब्लूज़’’ और ‘‘ब्लू टाइगर्स’’ जैसी पहचान से जाने जाते रहे हैं। यह पहचान केवल जर्सी के रंग की नहीं, बल्कि भारतीय खेलों की एक विरासत है और यह समझना कठिन है कि इस ऐतिहासिक पहचान को बदलने की आवश्यकता क्यों महसूस की गई।”

उन्होंने कहा कि मुद्दा किसी विशेष रंग का नहीं, बल्कि निर्णय लेने की प्रक्रिया, पारदर्शिता और जनभावनाओं के सम्मान का है। खड़गे ने कहा कि केसरिया, सफेद और हरा तीनों रंग राष्ट्रीय ध्वज में सम्मानपूर्वक स्थान रखते हैं।

कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि जिन लोगों की वैचारिक परंपरा का स्वतंत्रता आंदोलन में कोई योगदान नहीं रहा, वे आज हर राष्ट्रीय प्रतीक और सार्वजनिक संस्थान पर अपनी वैचारिक छाप छोड़ने की जल्दबाजी में दिखाई देते हैं।

उन्होंने दावा किया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने स्वतंत्रता के समय तिरंगे का विरोध किया था और तत्कालीन उप प्रधानमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल ने उसे चेतावनी भी दी थी।

खड़गे ने भगवाकरण पर उठाए सवाल

खड़गे ने आरोप लगाया कि पहले सड़कों के किनारे बने पैदल मार्गों, फिर संसद के कर्मचारियों की वेशभूषा, उसके बाद दूरदर्शन के प्रतीक चिह्न और अब खिलाड़ियों की जर्सी में बिना व्यापक सार्वजनिक सहमति के बदलाव किए जा रहे हैं।

उन्होंने सरकार और संबंधित संस्थाओं से भारतीय हॉकी टीम की जर्सी के रंग में बदलाव के फैसले पर तत्काल पुनर्विचार करने की मांग की।

कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि यह भी स्पष्ट किया जाना चाहिए कि इतना महत्वपूर्ण निर्णय हॉकी इंडिया के कार्यकारी बोर्ड की जानकारी और सहमति के बिना कैसे लिया गया।

पीटीआई के इनपुट के साथ

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