मास्को: भारत और फ्रांस के बीच 114 राफेल फाइटर जेट डील को लेकर बातचीत अपने अंतिम चरण में है। भारत ने संकेत दिया है कि वह रूस से सुखोई- 57 स्टील्थ फाइटर जेट नहीं लेगा। भारत के इस सख्त रुख के बीच रूस ने बड़ा ऑफर दिया है। रूस ने कहा है कि वह भारत को बहुत तेजी से 8 से 10 सुखोई-57 फाइटर जेट देने के लिए तैयार है। रूस का यह ऑफर ऐसे समय पर आया है जब भारत अपने स्वदेशी पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट पर पूरा फोकस कर रहा है। भारत इस समय चीन और पाकिस्तान दोनों के खतरे से जूझ रहा है। चीन बहुत तेजी से पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट भारतीय सीमा पर तैनात कर रहा है, वहीं छठवीं पीढ़ी के फाइटर जेट का प्रोटोटाइप उड़ा रहा है।
रूस ने यह भी कहा है कि वह सुखोई-57 स्टील्थ फाइटर जेट के साथ घातक लंबी दूरी की मिसाइलें देने के लिए तैयार है। ईटी नाऊ की रिपोर्ट के मुताबिक रूस भारत को R-77 मिसाइल का लंबी दूरी तक मार करने वाला वर्जन देने को तैयार है। यह वियांड विजुअल रेंज एयर टु एयर मिसाइल है। उच्च पदस्थ सूत्रों का कहना है कि रूस के इस ऑफर में 8-10 सुखोई-57 फाइटर जेट बहुत तेजी से सप्लाई करने का संदेश है। यह करीब आधा स्क्वाड्रन होता है। उन्होंने कहा कि अभी रूसी ऑफर पर कोई फैसला नहीं लिया गया है।
भारतीय वायुसेना के पास फाइटर जेट की भारी कमी
भारतीय वायुसेना अभी फाइटर जेट की भारी कमी से जूझ रही है। ऐसे में अगर भारत को जल्दी सुखोई-57 फाइटर जेट मिलते हैं तो यह फायदेमंद हो सकता है। अभी भारतीय वायुसेना के पास फाइटर जेट की केवल 30 स्क्वाड्रन ही है। इसमें दो स्क्वाड्रन राफेल के भी शामिल हैं। इसके अलावा भारतीय बेड़े में सुखोई-30 एमकेआई काफी बड़े पैमाने पर हैं। वहीं फ्रांसीसी मिराज 2000 फाइटर जेट, ब्रिटिश जगुआर और रूसी मिग-29 भी मौजूद हैं। ये तीनों ही अब काफी पुराने होते जा रहे हैं।
भारतीय वायुसेना अब 180 तेजस मार्क 1A फाइटर जेट लेने पर काम कर रही है लेकिन इसमें सबसे बड़ी बाधा अमेरिका के GE-404 इंजन बन रहे हैं। वायुसेना में अभी 40 स्क्वाड्रन की जरूरत है ताकि चीन और पाकिस्तान का मुकाबला किया जा सके। भारत के पास अगर पांचवीं पीढ़ी का फाइटर जेट लेना हो तो बहुत ही कम विकल्प है। अमेरिका ने भारत को एफ-35 फाइटर जेट का ऑफर दिया है लेकिन भारत ने अभी इस पर कोई फैसला नहीं लिया है। तुर्की और दक्षिण कोरिया के भी फाइटर जेट हैं लेकिन भारत उसे नहीं ले रहा है।
पाकिस्तान के पास पीएल 15 मिसाइल, रूस दे रहा R-77M
वहीं अगर राफेल की बात करें तो यह केवल 4.5 जनरेशन का फाइटर जेट है। तेजस मार्क 1A को भी 4.5 पीढ़ी का बनाया जाना है। एक्सपर्ट का कहना है कि वियांड विजुअल रेंज एयर टु एयर मिसाइल हवाई युद्ध के लिए बेहद अहम होती हैं। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान इन मिसाइलों ने कमाल दिखाया था। अगर सुखोई-57 R-77M मिसाइल के साथ आता है तो इसकी मारक क्षमता 200 किमी तक होगी। इसका भारतीय वायुसेना को काफी फायदा हो सकता है। पाकिस्तान के पास अभी पीएल-15 मिसाइले हैं और वह चीन से जे-35 फाइटर जेट लेने के लिए बात कर रहा है जो पीएल-17 मिसाइलों से लैस होंगे। वहीं पश्चिमी देशों खासकर अमेरिका का दबाव है कि वह रूस से हथियार और तेल नहीं खरीदे। ऐसे में भारत के लिए रूसी ऑफर फैसला लेना आसान नहीं होगा।












