तेहरान: ईरान ने अमेरिका के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) की समय सीमा समाप्त होने के बाद कड़ा रुख दिखाया है। ईरानी अधिकारियों ने संकेत दिया है कि वे अमेरिका के खिलाफ युद्ध में अधिक आक्रामकता दिखा सकते हैं। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) के राजनीतिक ब्यूरो के प्रमुख ब्रिगेडियर जनरल यदोल्लाह जवानी ने रविवार रात को सरकारी टेलीविजन को बताया कि उनकी सेनाएं देश की रक्षा के लिए आवश्यक कोई भी कार्रवाई करने के लिए तैयार हैं।
यदोल्लाह जवानी ने कहा, “युद्ध की शुरुआत दुश्मन ने की और हमारे प्रयास रक्षात्मक रहे हैं, हालांकि वे आक्रामक रूप भी ले सकते हैं।” उन्होंने इस बारे में विस्तार से नहीं बताया कि आक्रामक उपायों में क्या शामिल हो सकता है। हालांकि, उन्होंने यह जरूर कहा कि विरोधियों को “रणनीतिक आश्चर्य” के लिए तैयार रहना चाहिए। आईआरजीसी के प्रवक्ता हुसैन मोहेब्बी ने पिछले हफ्ते अमेरिका और क्षेत्रीय सहयोगियों के बुनियादी ढांचों- जैसे ऊर्जा नेटवर्क, बिजली संयंत्र और इंटरनेट से जुड़े सिस्टम को संभावित रूप से ईरान का निशाना बताया था। उन्होंने कहा था कि अगर अमेरिका हमला करता है, तो ईरान जवाब देने में पीछे नहीं हटेगा।
ईरान-अमेरिका समझौता ज्ञापन की समयसीमा खत्म
जून में हुए युद्धविराम समझौते के बावजूद, होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण को लेकर ईरान और अमेरिका के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है। पिछले महीने लड़ाई फिर से शुरू होने के बाद समझौता ज्ञापन प्रभावी रूप से टूट गया था, लेकिन यह समझौता आधिकारिक तौर पर सोमवार को समाप्त हो रहा है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने कहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच जो 60 दिनों का समझौता हुआ था, वो खत्म हो गया है। उन्होंने यह भी कहा कि जिस हिसाब से अमेरिका ने बड़े पैमाने पर इस समझौते का उल्लंघन किया है, उसके बाद कोई भी चर्चा बेकार है।
ईरान-अमेरिका में क्यों नहीं हो रही बातचीत?
ईरानी मीडिया ने बताया कि ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने सोमवार को कहा कि अमेरिका द्वारा 18 जून के मेमोरेंडम का बड़ा और बड़े पैमाने पर उल्लंघन किए जाने की वजह से, तेहरान और वाशिंगटन के बीच कोई बातचीत शुरू नहीं हुई। इसकी वजह से 60 दिन की डेडलाइन की चर्चा बेमतलब हो गई। ईरान वायर के अनुसार, एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बाघेई ने अमेरिकी-ईरान ज्ञापन में 60 दिन की कड़ी समयसीमा की खबरों को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा, “ज्ञापन में 60 दिन की समयसीमा का कोई जिक्र नहीं है और इस्लामी गणराज्य ईरान कभी भी दबाव, अल्टीमेटम या समय की पाबंदी के तहत अपनी नीतियां नहीं बनाता।”
ईरान-अमेरिका समझौता ज्ञापन में क्या था?
बाघेई के अनुसार, ज्ञापन में केवल 60 दिन की अवधि का जिक्र था ताकि दो मुख्य बिंदुओं, प्रतिबंधों में राहत और परमाणु मुद्दे, पर चर्चा की जा सके। यदि कोई नतीजा नहीं निकला तो अवधि को बढ़ाया जा सकता है। ईरान वायर के अनुसार, प्रवक्ता ने तेहरान और वाशिंगटन के बीच किसी नए मध्यस्थ की भागीदारी के दावों को भी खारिज किया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान और कतर अपनी मध्यस्थता जारी रखे हुए हैं। कुछ यूरोपीय देशों ने द्विपक्षीय संपर्कों के दौरान कहा है कि अगर ईरान और अमेरिका चाहें तो हम बातचीत कराने में मदद को तैयार हैं, लेकिन इसका मतलब किसी नए मध्यस्थ को स्वीकार करना नहीं है।












