नई दिल्ली: रूस के कुछ हिस्सों में फिर से ईंधन की कमी हो गई है। तेल रिफाइनरियों पर ड्रोन हमलों की नई लहर के बाद सप्लाई पर दबाव बढ़ा है। इससे कम से कम 10 इलाकों में अधिकारियों ने पेट्रोल की बिक्री पर पाबंदियां सख्त कर दी हैं।
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, चश्मदीदों ने बताया कि सोमवार को मॉस्को इलाके के कुछ फिलिंग स्टेशनों पर पेट्रोल नहीं मिल रहा था। जबकि ज्यादातर स्टेशनों पर डीजल उपलब्ध था। क्षेत्रीय अधिकारियों और मीडिया रिपोर्टों में भी देश के कई हिस्सों में ईंधन की बिक्री पर फिर से नियंत्रण लागू किए जाने की बात कही गई है।
कुछ हफ्ते पहले कंट्रोल कर लिया था संकट
यह कमी ऐसे समय में आई है जब रूस ने कुछ ही हफ्ते पहले ईंधन के पिछले संकट को कम कर लिया था। वह संकट मई में शुरू हुआ था। फिर जुलाई तक लगभग सभी इलाकों में फैल गया था। दरअसल, ड्रोन हमलों के कारण कई रिफाइनरियों को बंद करना पड़ा था। जबकि उस समय ईंधन की मौसमी मांग बढ़ रही थी।
सरकार ने पेट्रोल और डीजल के निर्यात पर रोक लगाकर, ईंधन की क्वालिटी से जुड़े कुछ नियमों में ढील देकर और घरेलू सप्लाई बढ़ाने के लिए विदेश से पेट्रोलियम उत्पाद मंगाकर स्थिति को संभाला था। जुलाई के अंत तक ईंधन की उपलब्धता में सुधार हुआ था। कुछ इलाकों ने पाबंदियां हटा ली थीं या उनमें ढील दे दी थी।
ड्रोन हमलों का नया सिलसिला
यह सब जुलाई के आखिर और अगस्त की शुरुआत में रूसी रिफाइनरियों को निशाना बनाकर किए गए ड्रोन हमलों की नई सीरीज के बाद हुआ है। इससे उत्पादन फिर से बाधित हुआ। सप्लाई पर दबाव बढ़ा। क्षेत्रीय अधिकारियों को ईंधन की बिक्री को नियंत्रित करने के उपाय फिर से लागू करने पड़े।
कई इलाकों में सप्लाई बनी हुई है मुश्किल
रूसी सरकार ने शुक्रवार को कहा कि कई इलाकों में ईंधन की सप्लाई अभी भी मुश्किल बनी हुई है। ऊर्जा अधिकारियों ने ओरेनबर्ग, लिपेट्स्क, त्वेर, क्रास्नोडार, जबायकाल्स्की, प्रिमोर्स्की, क्रास्नोयार्स्क, ओरियोल, तुवा और खाकसिया में स्थिति की समीक्षा की।
थोक बाजारों में दिख रहा दबाव
यह नया दबाव थोक बाजारों में भी दिख रहा है। एक्सचेंज के आंकड़ों के अनुसार, सेंट पीटर्सबर्ग इंटरनेशनल मर्केंटाइल एक्सचेंज पर गैसोलीन (पेट्रोल) की औसत बिक्री अगस्त की शुरुआत से जुलाई के दूसरे भाग की तुलना में 20% गिर गई है।
ईंधन की यह कमी रिफाइनिंग इंफ्रास्ट्रक्चर पर बार-बार होने वाले हमलों के प्रति रूस के घरेलू ऊर्जा बाजार की कमजोरी को उजागर करती है। रिफाइनरी के बंद होने और मौसमी मांग के एक साथ होने के अलावा ईंधन निर्यात पर पहले से ही पाबंदियां लागू होने के कारण अधिकारियों पर पेट्रोल स्टेशनों पर पर्याप्त सप्लाई सुनिश्चित करने का दबाव फिर से बढ़ गया है।ये नए उपाय ऐसे समय में किए जा रहे हैं जब रूस अपने ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर पर ड्रोन हमलों के व्यापक असर से निपट रहा है। इनमें रिफाइनरियों और तेल से जुड़ी अन्य सुविधाओं को लगातार निशाना बनाया जा रहा है।
भारत ऐसे कर सकता है मदद
रूस में रिफाइनरियों पर हमलों से उपजे ईंधन संकट के बीच भारत अपनी विशाल रिफाइनिंग क्षमता के जरिए रूस को प्रोसेस्ड फ्यूल (गैसोलीन/डीजल) और जरूरी स्पेयर पार्ट्स एक्सपोर्ट कर सकता है। साथ ही रूस के सरप्लस क्रूड को रियायती दरों पर रिफाइन करके ग्लोबल एनर्जी मार्केट को स्थिर रखने और एक कूटनीतिक संतुलन साधने में अहम भूमिका निभा सकता है।










