पटना: राष्ट्रीय जनता दल के कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव आखिरकार लोकभवन मार्च के बहाने नेता प्रतिपक्ष की भूमिका में आ ही गए। सवाल तो यह है कि जिस सिवान फायरिंग को लेकर तेजस्वी यादव सड़क पर हैं, उस मामले में AK-47 से फायरिंग करने वाले पुलिस कांस्टेबल को तुरंत प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। सिवान के पुलिस अधीक्षक (एस पी) का भी तबादला कर दिया गया है।
फिर घटना के इतने दिनों बाद तेजस्वी यादव सड़क पर आखिर क्यों? तेजस्वी यादव यही मार्च अगर घटना (25 जुलाई 2026 ) के कुछ दिन बाद करते तो सवाल नहीं उठते। पर बिहार के सियासी गलियारों में राजद के इस लोक भवन मार्च पर एक नहीं कई सवाल खड़े किए जाने लगे। जानते हैं कैसे कैसे सवालों के घेरे में तेजस्वी यादव का लोकभवन मार्च….?
विपक्ष बने रहने का संकट
देश भर और राज्य में भी हो रही कई ऐसी घटना हुई जब जनता सड़कों पर थी तब तेजस्वी यादव विदेश में थे। विदेश से आते ही लोक भवन मार्च का कार्यक्रम रख भी देते तो सवाल कम उठते। लेकिन बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के परिणाम ने राजद को इस बात का अहसास करा दिया कि जनता किसी का इंतजार एक हद तक ही करती है। और बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में राजद उम्मीदवार रेखा गुप्ता का जमानत जब्त हो जाना और प्रशांत किशोर के जीत जाने के बाद मुख्य विपक्ष की कुर्सी क्या हिली, तेजस्वी यादव सड़क पर आ गए।
राजद के सूत्रों की माने तो पार्टी के शीर्ष नेताओं ने पेपर लीक, भारत एनकाउंटर मामले में मुखर नहीं होना और बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव की हार से विपक्ष की कुर्सी के खतरे में पड़ जाने से तेजस्वी यादव को सड़कों पर उतरने के लिए बाध्य कर दिया।
राजद को जनता के बीच
सवाल तो यह भी है कि पेपर लीक और ए के 47 से गोली चलाने के विरुद्ध सड़कों पर आज राजद के कार्यकर्ता उतर रहे हैं। इस मार्च में महागठबंधन के साथी दल नहीं है। बहुत ही फॉर्मल ढंग से आम जनता का इस मार्च में सहयोग जरूर मांगा गया। सवाल तो राजनीतिक गलियारों में यह भी उठ रहा है कि जब सता के विरुद्ध संघर्ष का आह्वाहन है तो तो महागठबंधन के साथी दल को साथ ले कर इस मार्च की ताकत क्यों नहीं एक बड़े कैनवास में दिखाने की कोशिश हुई। इस से साथी दलों में भी सत्ता के विरुद्ध उत्साह दिखता। फिर ये राजद के झंडे तले इसलिए कि पार्टी पेपर लीक,भारत एनकाउंटर और सिवान ए के 47 मामले में विरोध करने में बहुत पीछे छूट गए? यह एक बड़ा सवाल तो है।
कांग्रेस को राजद का एकला चलो खला
राजद के लोकभवन मार्च मूव को कांग्रेस के नेता गलत नहीं बता रहे है,पर साथ नहीं लेने से झटका तो लगा है। यह दीगर की कांग्रेस ने इस लोकभवन मार्च का नैतिक समर्थन किया है। कांग्रेस के प्रवक्ता असित नाथ तिवारी के कहा भी कि तेजस्वी यादव के लोकभवन मार्च में राष्ट्रीय जनता दल का अपना कार्यक्रम है। इस कार्यक्रम में कांग्रेस की भागीदारी नहीं है। पर नैतिक समर्थन रहेगा। पर यह तो कहूंगा कि निश्चित तौर पे इस प्रोटेस्ट में सम्पूर्ण महागठबंधन होता तो मार्च बढ़िया होता, मजबूत होता। बिहार की जनता के बीच अच्छा संदेश जाता। पर यह राजद का फैसला है तो और वे अकेले सड़क पर उतरना चाहती है तो मेरा नैतिक समर्थन रहेगा
एकला चलो की राह पर राजद
बिहार के सियासी गलियारों में राष्ट्रीय जनता दल का लोकभवन मार्च मूव को एकला चलो… माना जा रहा है। राजद के शीर्ष नेतृत्व को लगता है कि राहुल गांधी ने लोकसभा में पेपर लीक,ए के 47 से गोलीबारी, नीट छात्रा आदि मामले में बाजी मार ली है। राजद इस मामले में पिछड़ गया। इस खाई को भरने के लिए ही राजद ने आज के मार्च को राजद के नाम करने की रणनीति बनाई। तेजस्वी का यह बैकअप प्लान कितना सफल होता है या बैक फायर करता है यह तो समय के गर्भ में है पर महागठबंधन में संशय के बीज तो पनपने लगे।
राजनीतिक पिच पर लेंथ लाइन अलग
राजद के अकेले का लोकभवन मार्च को राजनीतिक गलियारों में अपने अलग अलग पिच पर बल्लेबाजी माना जा रहा है। यह अलग अलग बल्लेबाजी विधानसभा चुनाव 2025 में दोस्ताना संघर्ष के रूप में दिखा। यह भारत एनकाउंटर में दिखा जब कांग्रेस आक्रामक थी और राजद चुपचाप।
बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में महागठबंधन के साथी अलग अलग दिखे। तेजस्वी यादव ने उम्मीदवार उतारने के पहले साथी दलों से कोई बातचीत तक नहीं की। इस उपचुनाव में भी राजद के अकेले बैटिंग की। और अब आज का लोकभवन मार्च भी राजद के बल्लेबाजी के तौर पर संभगतः दिखेगा।











