‘असम को काटना हमारी जिम्मेदारी…’ शरजील के बयान पर फिर बवाल!

नई दिल्ली: देश में ‘दिमागी नक्सल’ की बहस के बीच ‘शरजील इमाम’ का पुराना बयान चर्चा में आ गया है। इस बयान पर केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने तीन दिन पहले तीखी टिप्पणी की थी। उन्होंने लिखा, ‘ऐसे लोगों का समर्थन करने वालों को ही दिमागी नक्सल कहा जाता है।’ उधर शरजील के भाई मुजम्मिल इमाम ने रिजिजू पर उनके भाई के बयान को गलत तरीके से पेश करने का आरोप लगाया है।

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इस बीच सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के वरिष्ठ सलाहकार कंचन गुप्ता ने शरजील इमाम के पुराने भाषण का अंश शेयर किया। उन्होंने लिखा कि शरजील के शब्द थे, ‘हम हिंदुस्तान और नॉर्थ ईस्ट को स्थायी रूप से काट सकते हैं… असम को काटना हमारी जिम्मेदारी है… असम और इंडिया कट के अलग हो जाए।’ इसके बाद कंचन गुप्ता ने सवाल किया कि शरजील के इन्हीं शब्दों को कोट करना क्या उनके बयान को गलत तरीके से पेश करना है। यही सवाल अब राजनीतिक बहस के केंद्र में है।

शरजील के भाई ने जताई कड़ी आपत्ति

उधर मुजम्मिल इमाम ने रिजिजू की टिप्पणी पर कड़ा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि उनके भाई के भाषण को लगातार असम को भारत से अलग करने की अपील के रूप में गलत ढंग से पेश किया जा रहा है। मुजम्मिल के मुताबिक, शरजील का पक्ष लगातार यही रहा है कि वह विरोध के तौर पर ‘चक्का जाम’ की बात कर रहे थे। उनका कहना है कि इसका मतलब भारत से अलगाव या असम को भारत से अलग करने की मांग नहीं था।

‘मामला न्यायालय में विचाराधीन है’

मुजम्मिल ने अपने बयान में कहा कि शरजील के भाषण और उसकी कानूनी व्याख्या अभी न्यायालय में विचाराधीन है। उन्होंने कहा कि अब तक ऐसा कोई अंतिम न्यायिक निष्कर्ष नहीं आया है, जिसमें यह तय किया गया हो कि शरजील ने असम को भारत से अलग करने की वकालत की थी। उन्होंने रिजिजू से कहा कि सबूत और कानून पर फैसला न्यायालय को करने दिया जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि लंबित आपराधिक मुकदमे के दौरान ऐसी सार्वजनिक टिप्पणियां निष्पक्ष सुनवाई के माहौल को प्रभावित कर सकती हैं।

विवाद की जड़ में जनवरी 2020 का भाषण

पूरा विवाद जनवरी 2020 में दिए गए शरजील इमाम के भाषण से जुड़ा है। अभियोजन पक्ष के अनुसार, भाषण में उन्होंने असम और पूर्वोत्तर को देश के बाकी हिस्से से जोड़ने वाले रास्ते को रोकने की बात कही थी। उनके बयान में ‘चक्का जाम’ का संदर्भ भी था। वहीं, बचाव पक्ष इसी संदर्भ पर जोर देता रहा है और इसे विरोध प्रदर्शन के तरीके के रूप में बताता है। शरजील के खिलाफ मामला न्यायालय में विचाराधीन है। ऐसे में अब कंचन गुप्ता के सवाल, रिजिजू की ‘दिमागी नक्सल’ टिप्पणी और मुजम्मिल इमाम के पलटवार ने पुराने भाषण को लेकर राजनीतिक बहस को फिर से तेज कर दिया है।

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