नई दिल्ली। नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ और ग्लेशियर टूटने से मरने वालों की संख्या 1000 पार कर गई है। राहत और बचाव दल भारी मशीनरी, हेलीकॉप्टर और एक्सकैवेटरों की मदद से मलबे में दबे लोगों की तलाश में जुटे हैं।
हाइड्रोपावर परियोजनाओं की सुरंगों में फंसे सैकड़ों कर्मचारियों और श्रमिकों को निकालने के लिए भी अभियान तेज कर दिया गया है। अनुमान है कि अलग-अलग परियोजनाओं की सुरंगों में करीब 639 लोग अब भी फंसे हैं। उन्हें निकालने के लिए नेपाल के करीब 300 बचावकर्मी काम कर रहे हैं, जिन्हें भारत और चीन के विशेषज्ञों की मदद मिल रही है।
हालांकि, लगातार बारिश और खराब मौसम ने बचाव अभियान की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। कई नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है और कुछ जगहों पर पानी का बहाव सामान्य से करीब छह गुना तक तेज हो गया है।
नदियों में बहाव तेज, कई जिलों में बाढ़ का अलर्ट
रॉयटर्स के अनुसार, नदियों की रफ्तार छह मीटर प्रति सेकेंड तक पहुंचने के बाद कई जिलों में बाढ़ का नया अलर्ट जारी किया गया है। रसुवा और नुवाकोट जिलों को सबसे ज्यादा खतरा बताया गया है।
उधर, चीनी अधिकारियों को आशंका है कि ग्लेशियर टूटने की घटना फिर हो सकती है। चीनी मौसम विभाग ने बुधवार तक बारिश जारी रहने का अनुमान जताया है, जिससे छोटी नदियों और झीलों का जलस्तर और बढ़ सकता है।
26 अगस्त को ग्लेशियर का एक हिस्सा टूटने के बाद बर्फ, चट्टान और कीचड़ का विशाल मलबा फ्लैश फ्लड के रूप में नीचे आया था। इसकी चपेट में नेपाल के आठ जिले आए। घटना इतनी तेजी से हुई कि लोगों को संभलने या सुरक्षित स्थान पर जाने का मौका तक नहीं मिला।
आपदा की भयावहता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि ग्लेशियर टूटने के बाद नीचे आया कीचड़ और मलबा कुछ जगहों पर 60 मीटर तक ऊंचा जमा हो गया है। इसकी ऊंचाई करीब 20 मंजिला इमारत के बराबर है।
प्रेट्र के अनुसार, नेपाल में अब तक 1003 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि 4000 से ज्यादा लोग लापता हैं। लापता लोगों में 39 देशों के 590 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। भारतीय विदेश मंत्रालय के अनुसार, नेपाल से 158 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाला जा चुका है।
प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने कहा है कि आपदा में हजारों लोगों के घर, परिवार और संपत्ति तबाह हो गए हैं। दुनियाभर से अब तक करीब 4.2 करोड़ डालर की सहायता मिल चुकी है।
अब तक 11 हजार से ज्यादा लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। कई इलाकों में बिजली और संचार सेवाएं बहाल की गई हैं। सबसे ज्यादा प्रभावित नुवाकोट में बचाव दल ने सड़क संपर्क बहाल करने में भी सफलता हासिल की है।
सुरंगों में फंसे लोगों को निकालना चुनौती
एएनआइ के अनुसार, हाइड्रोपावर परियोजनाओं की सुरंगों में फंसे लोगों को बाहर निकालना बचाव दल के लिए सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है। सुरंगों के मुहाने से पानी निकालने के बाद चट्टानों को तोड़ने वाली मशीनें लगाई गई हैं।
नेपाल सेना के जवान भी सुरंगों के भीतर पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं। त्रिशूली क्षेत्र में सुरंगों को खोलने के लिए बुलडोजर और एक्सकैवेटरों का इस्तेमाल किया जा रहा है। यहां करीब 500 कर्मचारियों के फंसे होने की आशंका है।
भारत की विशेषज्ञ टनल रेस्क्यू टीम लांगटांग और चिलिम स्थित हाइड्रोपावर परियोजनाओं की सुरंगों को खोलने में जुटी है। नेपाल में भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने एक्स पर बताया कि भारतीय दल लांगटांग सुरंग के भीतर 185 मीटर तक आगे बढ़ चुका है।
दक्षिण कोरिया के नौ नागरिक भी नेपाल की एक हाइड्रोपावर परियोजना में फंसे हैं। उन्हें निकालने के लिए 44 सदस्यीय आपात राहत दल के जल्द पहुंचने की उम्मीद है। प्रधानमंत्री शाह के मुताबिक, परियोजनाओं से अब तक 279 कर्मचारियों को सुरक्षित निकाला जा चुका है।
तिब्बत में भी बचाव अभियान मुश्किल
उधर, बाढ़ प्रभावित तिब्बत में चीन ने राहत और बचाव अभियान तेज कर दिया है। नेपाल-चीन सीमा पर स्थित ग्यिरोंग बार्डर को दोबारा खोलने की कोशिश की जा रही है। यह आपदा के दिन से ही बंद है। बाढ़ में बह गई सड़कों को फिर से तैयार किया जा रहा है।
रायटर के अनुसार, तिब्बत में आपदा से अब तक 16 लोगों की मौत हुई है और 546 लोग लापता हैं। इनमें 216 विदेशी नागरिक हैं, जिनमें 49 भारतीय भी शामिल हैं।
घटनास्थल के आसपास दलदली जमीन बन जाने के कारण भारी मशीनरी पहुंचाना मुश्किल हो रहा है। मंगलवार दोपहर तक बचाव दल करीब 800 मीटर ही आगे बढ़ पाया था।











