मॉस्को: अफगानिस्तान को लेकर रूस में आयोजित ‘मॉस्को फॉर्मेट’ की बैठक के दौरान जहां एक तरफ तालिबान और पाकिस्तान के अधिकारियों के बीच बहस हो रही थी वहां भारत ने अपने ‘दोस्त’ का पूरा समर्थन कर दिया है। दरअसल मॉस्को में अफगानिस्तान पर ‘मॉस्को फॉर्मेट कंसल्टेशन’ की आठवीं बैठक में भारत ने अफगानिस्तान की संप्रभुता, एकता और क्षेत्रीय अखंडता का समर्थन किया है। यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब पाकिस्तान बार बार अफगानिस्तान के अंदर हमले कर रहा है।
भारत हर बार पाकिस्तान के अफगानिस्तान में एयरस्ट्राइक की आलोचना करता है और मॉस्को फॉर्मेट की बैठक के दौरान भी नई दिल्ली ने अफगानी लोगों की भलाई के लिए अपनी प्रतिबद्धता भी दोहराई है और अफगानिस्तान की संप्रुभता का समर्थन किया है।
भारत ने अफगानिस्तान की संप्रभुता का किया समर्थन
सोमवार को मॉस्को में रूस की तरफ से आयोजित बैठक में रूस में भारत के राजदूत विनय कुमार और विदेश मंत्रालय में संयुक्त सचिव (PAI) एम. सुरेश कुमार के नेतृत्व में भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने नई दिल्ली का पक्ष रखा। अफगान मामलों के जानकारों का कहना है कि पाकिस्तान की सीमा-पार कार्रवाइयों के बावजूद नई दिल्ली अफगानिस्तान की संप्रभुता का समर्थन करने पर अडिग रही है।
इस बैठक में रूस, भारत, ईरान, कजाकिस्तान, चीन, किर्गिस्तान, पाकिस्तान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान के अधिकारियों ने हिस्सा लिया था जबकि अफगानिस्तान के विदेश मंत्री अमीर खान मुत्ताकी ने अपने देश के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया। बेलारूस और मिस्र ने मेहमानों के तौर पर इसमें भाग लिया।
बैठक के दौरान पाकिस्तान और तालिबान के बीच टकराव
बैठक के दौरान पाकिस्तान और तालिबान के अधिकारियों के बीच कई बार बहस हुई है। पाकिस्तान जहां ‘तालिबान शासन’ कहकर तालिबान के प्रतिनिधियों को संबोधित कर रहा था वहीं अफगानिस्तान के तालिबान प्रतिनिधि पाकिस्तान में ‘सैन्य शासन’ कह रहे थे। बहस इतनी ज्यादा बढ़ गई की अंत कर इस बैठक को लेकर कोई भी संयुक्त बयान जारी नहीं हो पाया।
बैठक के बाद एक प्रेस कॉन्फेंस में अफगानिस्तान के लिए रूस के राष्ट्रपति के विशेष दूत जमीर काबुलोव ने कहा ‘अंतिम संयुक्त बयान का मसौदा तैयार करते समय हमें एक समस्या का सामना करना पड़ा। समस्या यह थी कि हमारे अफगान और पाकिस्तानी सहयोगियों के बीच सहमति नहीं बन पाई। हमें इसका अफसोस है।’
काबुलोव ने बताया कि तालिबान प्रतिनिधिमंडल ने उस शब्दावली पर आपत्ति जताई जिसमें अफगानिस्तान का जिक्र बार-बार आतंकवादी संदर्भ में किया गया था। बैठक में अपने भाषण के दौरान मुत्ताकी ने पाकिस्तानी सेना पर एक नया प्रोजेक्ट शुरू करने का आरोप लगाया जिसका मकसद अफगानिस्तान में अस्थिरता फैलाना है।
अफगानिस्तान को लेकर रूस की राजधानी मॉस्को में आयोजित ‘मॉस्को फॉर्मेट’ की आठवीं बैठक बिना किसी संयुक्त बयान के खत्म हो गई है। इस दौरान पाकिस्तान और तालिबान के अधिकारियों के बीच भारी तनाव देखने को मिला और दोनों एक दूसरे को कोसते नजर आए। सीमा पार आतंकवाद समेत कई मुद्दों पर दोनों के बीच भारी विवाद हुआ। दोनों ने एक दूसरे पर आतंकी समूहों का समर्थन करने के आरोप लगाए।
मॉस्को में हुई बैठक के दौरान पाकिस्तान ने अफगान अधिकारियों को ‘तालिबान शासन’ कहना शुरू कर दिया जिसके बाद अफगानिस्तान के विदेश मंत्री मौलवी अमीर खान मुत्तकी ने पाकिस्तानी सरकार को ‘सैन्य शासन’ कहा। इसके अलावा तालिबान ने पाकिस्तान पर दाएश यानि ISIS का समर्थन करने का भी आरोप लगाया। तालिबान ने दो दिन पहले दो दर्जन से ज्यादा आईएसआईस आतंकियों को मारने का दावा किया है और कहा कि इन आतंकियों को पाकिस्तान ने अफगानिस्तान में अस्थिरता फैलाने भेजा था।
एक दूसरे पर आग उगलते रहे पाकिस्तान और तालिबान के अधिकारी
पाकिस्तानी अधिकारियों पर तीखा हमला बोलते हुए अफगान तालिबान के विदेश मंत्री अमीर मुत्ताकी ने बैठक के दौरान पाकिस्तान को ‘सैन्य शासन’ बताया। वहीं पाकिस्तान काबुल की सरकार को लगातार ‘तालिबान शासन’ कहता रहा। आखिरकार ये विवाद इतना ज्यादा बढ़ गया कि किसी भी संयुक्त घोषणापत्र पर सहमति नहीं बन सकी। रूस ने कहा है कि पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच असहमति की वजह से संयुक्त बयान पर समझौता करना नामुमकिन हो गया था।
रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने बैठक खत्म होने के बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि अफगान सुरक्षा बल इस्लामिक स्टेट और दूसरे आतंकवादी समूहों के खिलाफ ‘सख़्त लड़ाई’ लड़ रहे हैं और ‘काबुल की आतंकवाद-रोधी क्षमता’ को बढ़ाने की जरूरत है।










