मिठाइयां खाइए, दिवाली मनाइएं, वेज-नॉनवेज की बात छोड़िए

नई दिल्लीः सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को गुजरात हाई कोर्ट के एक आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई की; इस आदेश के तहत सोमनाथ मंदिर के आसपास नॉनवेज फूड बनाने, बेचने और रखने पर लगी रोक को हाल ही में फिर से बहाल कर दिया गया था।

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सुप्रीम कोर्ट में नॉनवेज फूड बैन पर हुई सुनवाई

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक याचिकाकर्ता के वकील हुज़ेफ़ा अहमदी ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि इस देश की 80% आबादी मांसाहारी है। हम इतने अति-संवेदनशील क्यों हो रहे हैं कि सरकार ऐसे आदेश जारी कर रही है? अगर कोई बंद जगह के अंदर मांसाहारी भोजन कर रहा है, तो इसमें क्या समस्या है?

इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमें एक संतुलन बनाए रखने की जरूरत है। फिर अहमदी ने दलील दी कि पूरी तरह से प्रतिबंध लगाना अजीब बात है। ‘बिजो इमैनुएल’ मामले में कहा गया था कि हमारा दर्शन हमें सहनशीलता सिखाता है। हमारा संविधान भी हमें सहनशीलता सिखाता है। फिर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम इस पर कुछ नहीं कहेंगे। अहमदी ने कहा कि आप किसी पर खान-पान की आदतें थोप नहीं सकते।

मिठाइयां खाइए, त्योहार मनाइए और याचिका खारिज

इस पर शीर्ष कोर्ट ने कहा कि उम्मीद है कि अनुच्छेद 25 पर हमारा फैसला जल्द ही आ जाएगा। इसका इस मामले पर काफी असर पड़ेगा। सुप्रीम कोर्ट ने मजाक में कहा कि मिठाइयां खाकर रोशनी का त्योहार मनाइए। शाकाहारी या मांसाहारी की बात छोड़िए। फिर कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी।

नॉनवेज फूड बैन का मामला क्या है?

बता दें कि सोमनाथ नगर के छह क्षेत्रों में मांसाहारी भोजन पर प्रतिबंध लगाया गया है। इनमें सोमनाथ मंदिर के 500 मीटर के दायरे और धार्मिक महत्व वाले अन्य क्षेत्र शामिल हैं। यह फैसला इसलिए लिया गया है, ताकि तीर्थयात्रियों की धार्मिक भावनाएं आहत न हों।

बीते 30 अक्तूबर को गुजरात हाई कोर्ट की एकल न्यायाधीश द्वारा प्रसिद्ध सोमनाथ मंदिर के आसपास मांसाहारी भोजन की बिक्री पर लगी पाबंदी हटाए जाने के कुछ घंटों बाद, शुक्रवार को दो न्यायाधीशों की पीठ ने उनके इस फैसले पर रोक लगा दी।

मुख्य न्यायाधीश मनश रंजन पाठक और न्यायमूर्ति निर्जर देसाई की खंडपीठ ने गुजरात सरकार की एक तत्काल अपील पर, न्यायमूर्ति निशा ठाकोर के फैसले पर रोक लगा दी है। साथ ही, यह निर्देश दिया कि मांसाहारी भोजन की बिक्री पर पाबंदी लगाने वाली कलेक्टर की अधिसूचना फिलहाल लागू रहेगी। खंडपीठ इस मामले की अगली सुनवाई 26 दिसंबर को करेगी।

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