कोरोना काल में 80 लाख लोगों का मददगार बनकर उभरा कर्मचारी भविष्य निधि संगठन

नई दिल्ली। कोरोना संकट के बीच लॉकडाउन की वजह से लाखों लोग बेरोजगार हो गए थे। लाखों लोगों की नौकरी चली गई। ऐसे में लोगों को भारी मुश्किलों से राहत देने के लिए कर्मचारी भविष्य निधि संगठन ने लोगों को अपने पीएफ का कुछ हिस्सा एडवांस निकालने की सुविधा दी।

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लॉकडाउन और उसके बाद के दौर में लोगों ने पीएफ से कुल 30,000 करोड़ रुपये निकाल लिए हैं। लोगों को भारी मुश्किलों से राहत देने के लिए कर्मचारी भविष्य निधि संगठन ने लोगों को अपने पीएफ का कुछ हिस्सा एडवांस निकालने की सुविधा दी। इसके अलावा मेडिकल आदि जरूरतों के लिए पीएफ निकालने की व्यवस्था पहले से थी।

कोरोना महामारी और लॉकडाउन के कारण लाखों लोगों की नौकरी चली गई। जिन लोगों की नौकरी चली गई उनके सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया।

ऐसे में प्रविडेंट फंड का पैसा उनके लिए आखिरी उम्मीद है और इसका बड़े पैमाने पर इस्तेमाल भी किया जा रहा है। सरकार ने भी EPFO से कहा है कि वह पीएफ का पैसा जारी करने में तेजी दिखाए। विभाग भी इस दिशा में सराहनीय काम कर रहा है।

एक रिपोर्ट के मुताबिक अप्रैल से जुलाई तक 80 लाख सब्सक्राइबर्स ने EPFO से 30 हजार करोड़ का फंड निकाला है। ईपीएफओ करीब 10 लाख करोड़ का फंड मैनेज करता है और इसके सब्सक्राइबर्स की संख्या करीब 6 करोड़ है। निकासी को लेकर विभाग का कहना है कि इससे चालू वित्त वर्ष में हमारी कमाई पर असर होगा।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लॉकडाउन के बाद पीएफ की निकासी के लिए एक विशेष कोविंड विंडो का ऐलान किया था। इस सुविधा को परेशान लोगों ने हाथोहाथ लिया। कोविड के लिए ईपीएफओ ने पीएफ निकालने की प्रक्रिया को भी काफी आसान रखा था। यह ऑनलाइन था और मंजूर होने के तीन-चार दिन के भीतर ही लोगों के खाते में पैसा पहुंच जाता था।

रिपोर्ट के मुताबिक अप्रैल से जुलाई तक 80 लाख सब्सक्राइबर्स ने EPFO से 30 हजार करोड़ रुपये का फंड निकाला है। ईपीएफओ करीब 10 लाख करोड़ का फंड मैनेज करता है और इसके सब्सक्राइबर्स की संख्या करीब 6 करोड़ है। ईपीएफओ को लगता है कि ऐसी ही मुश्किल आगे जारी रही तो करीब 1 करोड़ लोग पीएफ से आंशिक निकासी कर सकते हैं।

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