वाराणसी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी के नाविकों पर दोहरी मार पड़ी है। पहले लॉकडाउन के चलते गंगा नदी में नौकायन ठप रहा तो अब बाढ़ के चलते 15 सितंबर तक के लिए नाव संचालन पर रोक लगा दी गई है। ऐसे में काशी के 350 नाविक परिवारों के सामने पेट पालने का संकट खड़ा हो गया है। कोई कर्ज लेकर बच्चों के लिए निवाले का इंतजाम कर रहा है तो कोई पत्नी के गहने बेच रहा है।
इन नाविक परिवारों की मदद के लिए बॉलीवुड अभिनेता सोनू सूद सामने आए हैं। काशी के एक समाजसेवी की पहल पर सोनू सूद ने ट्वीट कर लिखा है कि आज के बाद कोई भूखा नहीं सोएगा। आज मदद पहुंच जाएगी। शाम में संस्था ने कई परिवारों तक राशन पहुंचा दिया है।
यूं हुई मदद की पहल
होप वेलफेयर संस्था पूर्वांचल में जरूरतमंद परिवारों को खाद्यान्न पहुंचा रही है। सोमवार को संस्था की टीम काशी के घाट पर थी। तभी समाजसेवी दिव्यांशु को कुछ नाविकों ने घेर लिया और अपनी पीड़ा बताई। कहा कि, लॉकडाउन में जैसे तैसे इंतजाम कर गुजारा किया गया। अनलॉक हुआ तो पर्यटक नदारद रहे। अब बाढ़ के चलते नाव संचालन ठप है। ऐसे में नाविक समुदाय की स्थिति काफी खराब है। अगर राशन का इंतजाम हो जाए तो परिवार का पेट भर जाएगा।
नाविकों की माली हालत देखकर दिव्यांशु ने मंगलवार को दिन 11:15 बजे अभिनेता सोनू सूद को ट्विटर पर टैग करते हुए नाविकों की समस्या को प्रमुखता से उठाया। लिखा कि, वाराणसी के 84 घाटों में 350 कश्ती चलाने वाले परिवार आज दाने-दाने के लिए तरस रहें हैं। इन 350 नाविक परिवारों की आप (सोनू सूद) आखिरी उम्मीद हो। गंगा में बाढ़ आने के कारण और मुश्किलें इनकी बढ़ गई हैं। काशी में 15 से 20 दिन तक इनके बच्चों को भूखे पेट न सोना पड़ा।
इसके महज 39 मिनट पर सोनू सूद की तरफ से रिप्लाई आया कि वाराणसी घाटों के यह 350 परिवारों का कोई भी सदस्य आज के बाद भूखा नहीं सोएगा। आज मदद पहुंच जाएगी। दिव्यांशु ने बताया कि 200 से ज्यादा राशन किट बंटने को आ गई है। जिसमें 7-7 किलो आटा-चावल, चना, तेल, मसाला, नमक आदि सामग्री रहेगी।

तीन परिवारों की कहानी, उनकी जुबानी
- दुर्गा प्रसाद साहनी अस्सी घाट पर नाव चलाते हैं। वे कहते हैं कि भुखमरी की स्थिति का सामना करना पड़ रहा है। अगर एक बेला (समय) खाना बन रहा है तो जरूरी नहीं है कि दूसरी बेला के खाने की व्यवस्था हो पाए। बच्चों की पढ़ाई छूट गई है। नए क्लास में एडमिशन नहीं करवा पाए हैं।
- शिवाला के मुन्नू नाविक ने बताया कि उनके दो बच्चे हैं। मां काफी बीमार है। उनके इलाज में जमा पैसा खर्च हो गया। नाव बंद होने से रोजी रोटी का संकट आ गया। बच्चों की पढ़ाई भी लगता है छूट जाएगी। सोच रहे कर्ज लेकर कोई छोटा सा दुकान खोल लें। कुछ लोगो से बात की है। लेकिन कोई कर्ज भी देने को तैयार नहीं हो रहा है। भगवान और गंगा मईया ही सहारा है।
- बचऊ साहनी दशाश्मेध घाट पर नाव चलाते थे। लॉकडाउन में किसी तरह कर्ज लेकर परिवार का खर्च चलाया। फिर पत्नी का गहना गिरवी रखा है। सूद (ब्याज) भरते रहे। फिर गहना बेच दिया। बच्चों की पढ़ाई भी छूट गयी है।












