यहां जीवित रहने के लिए भावनात्मक रूप से बहुत मजबूत होना पड़ता है : राम कपूर

मुंबई। अभिनेता राम कपूर ने मनोरंजन उद्योग में टीवी, फिल्मों और ओटीटी में काम करते हुए कई उतार-चढ़ाव देखे हैं। वह कहते हैं कि यहां जीवित रहने के लिए व्यक्ति को भावनात्मक रूप से बहुत मजबूत होना पड़ता है। कपूर ने ‘हजारों ख्वाहिशें ऐसी’, ‘गोलमाल रिटर्न्‍स’, ‘उड़ान’, और ‘थप्पड़’ जैसी फिल्मों में काम किया है। हाल ही में वेब सीरीज ‘अभय 2’ और ‘अ सूटेबल बॉय’ में वो नजर आए हैं। राम ने कहा, “अ सूटेबल बॉय में काम करना बहुत अच्छा रहा। यह एक अलग समय की कहानी है।”

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इस इंडस्ट्री में प्रतिस्पर्धा से मानसिक स्वास्थ्य कैसे प्रभावित होता है, इस पर कपूर ने कहा, “शुरूआती संघर्ष के बाद मैं टेलीविजन इंडस्ट्री में नाम कमाने में कामयाब रहा। फिर मैंने ज्यादा काम करने की बजाय अच्छे काम को महत्व देने का निर्णय किया। अब मैं इस तरह की वेब सीरीज में चुनौतीपूर्ण और आकर्षक किरदारों की तलाश करता हूं। हमारे उद्योग में उतार-चढ़ाव, सफलता, पीक सब है लेकिन जब पतन होता है, तो यह वास्तव में बहुत मुश्किल दौर होता है। यदि आप भावनात्मक रूप से मजबूत नहीं हैं, तो उजाले को देखने से पहले अंधेरे से निपटना आपके लिए मुश्किल होगा।”

लॉकडाउन के दौरान कई टेलीविजन कलाकारों जैसे प्रेक्षा मेहता, मनमीत ग्रेवाल, अनुपमा पाठक और समीर शर्मा ने आत्महत्या की। टेलीविजन से शुरूआत करने वाले सुशांत सिंह राजपूत की भी असामयिक मृत्यु हुई, जिसकी सीबीआई जांच चल रही है।

इस पर कपूर ने कहा, “मेहनत जरूरी है लेकिन किस्मत भी जरूरी है। मैं किस्मत वाला हूं कि मुझे सही समय पर अपने टैलेंट को साबित करने के मौके मिले। वो मुझसे कम टैलेंटेड नहीं रहे होंगे लेकिन उन्हें शायद वो मौके नहीं मिले, जिनके वे योग्य थे। या उन्हें दर्शकों से वैसी सराहना नहीं मिल पाई, जैसी मुझे मिली। मैं वाकई में बहुत आभारी हूं कि मुझे इतना कुछ मिला।”

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