सिस्टम से हारकर आत्मदाह करने पहुंच गयी यह महिला..

लखनऊ। योगी सरकार में सरकारी अधिकारी किस तरह निरंकुश होते जा रहे हैं और अपनी मनमानी जनता पर थोप रहे हैं। इसकी एक बानगी फिर लखनऊ में दिखाई दी। उल्लेखनीय है कि डूडा कालोनी परियोजना के अधिकारियों और आवास विकास पर ठगी का आरोप लगाते हुए अपने पति के साथ आई महिला ने हजरतगंज गांधी प्रतिमा के पास खुद पर मिट्टी का तेल छिड़क कर आत्मदाह का प्रयास किया। हालांकि समय रहते मौके पर मौजूद पुलिस कर्मियों ने महिला को दबोच लिया और सिविल अस्पताल में भर्ती कराया है। पीडि़ता का कहना है कि उन्होंने व अन्य लोगों ने परियोजना अधिकारी के कहने पर ज्योति तिवारी और आराधना सिंह को 80 से 90 हजार रुपये आवंटन के लिए दिया था। करीब दो माह बाद उनकी आवंटन कब्जा रसीद को फर्जी करार देकर उन्हें घर से निकाल दिया गया।  हजरतगंज मुख्य चौराहे के पास गांधी प्रतिमा परिसर में दोपहर बाद कुछ महिलायें और पुरूष प्रदर्शन कर रहे थे। इसी दौरान एक महिला ने खुद पर मिट्टी का तेल छिड़क लिया और आग लगाने का प्रयास करने लगी।

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हालांकि समय रहते महिला को पुलिस कर्मियों ने दबोच लिया और सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया। पूछताछ में पीडि़ता ने अपना नाम डूडा कालोनी मवइया पीजीआई निवासिनी 30 वर्षीय रानी पत्नी फहीम बताया है। पीडि़ता ने उक्त मामले की जिलाधिकारी से लेकर मुख्यमंत्री तक शिकायत की थी। मु यमंत्री के कार्यालय से पीजीआई थाने में जांच आई थी। थाना प्रभारी का स्थानान्तरण होने के बाद मौजूदा थानाध्यक्ष मामले की जांच करने से मना कर रहे हैं। पीडि़ता ने बताया कि हैवतमऊ मवइया एसजीपीजीआई रायबरेली रोड पर स्थित डूडा कालोनी में आवास के आवंटन के लिए परिजयोजना अधिकारी के कहने पर उन्होंने 80 से 90 हजार रुपये ज्योति व आराधना को दिए थे। पीडि़तों के आवासों का आवंटन कर दिया गया था। 24 आवंटियों में से कुछ को सहायक परियोजना अधिकारी ने आवांटन रसीद भी दी थी।

एक्सीयन केसी श्रीवास्तव और जेई मनोज कुमार केवट ने उन्हें आवास पर कब्जा दिलवाया था। महज एक माह बाद कब्जा रसीद को अवैध करार देते हुए आवंटन फर्जी बता दिया गया। पीडि़तों ने डूडा और आवास-विकास के कार्यलय में जाकर स पर्क किया था। आरोप है कि अधिकारियों ने उन्हें डरा-धमका कर भगा दिया। पीडि़तों ने मामले को लेकर पीजीआई थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। आरोप है कि एफआईआर में केवल ज्योति और आराधना का नाम लिखा गया है। पीडि़तों ने कई बार जिलाधिकारी से मिलने का प्रयास भी किया, लेकिन पीडि़तों की डीएम से मुलाकात नहीं हो सकी। पीडि़तों का कहना है कि उनकी कहीं सुनवाई नहीं हो रही है। जिसके चलते आत्मदाह और प्रदर्शन करना पड़ा।

पुलिस बल प्रयोग कर किया बेघर

पीडि़ता रानी ने बताया कि उनके आवासों पर नोटिस चस्पा कर शुक्रवार को डूडा और आवास विकास के अधिकारियों ने पुलिस बल प्रयोग कर उनका सामान घर से बाहर फेंक दिया गया। पूछने पर अधिकारियों ने जिलाधिकारी के आदेश पर कार्रवाई किए जाने की बात कही। कुछ लोगों का सामान पीजीआई थाने में जब्त कर लिया गया। अधिकारी रानी, शमों, गुडिय़ा, पुष्पा सिंह के खिलाफ रिपोर्ट दर्र्ज करवाने की धमकी दे रहे हैं।

सीएम जांच आदेश का हमसे सम्बंध नहीं- एसओ पीजीआई

पीडि़ता रानी ने बताया कि लिखित शिकायत करने पर मुख्यमंत्री कार्यालय से पीजीआई थाने में उक्त प्रकरण की जांच के आदेश आये थे। आरोप है कि कुछ लोगों के बयान दर्ज कर फाइल दबा दी गई। थाना प्रभारी का तबादला होने पर नये थानाध्यक्ष का कहना है कि मुख्यमंत्री जांच आदेश का उनसे कोई सम्बंध नहीं है और न ही हम कोई जांच करेगें। आरोप है कि थाना प्रभारी पीडि़तों को झूठे मुकदमें में फंसाने की धमकी दे रहे हैं।

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