पश्चिम एशिया में संघर्ष पर संसद में घमासान के आसार

नई दिल्ली: संसद के बजट सत्र का आज से दूसरा फेज शुरू हो रहा है। पहले दिन लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पद से हटाने संबंधित प्रस्ताव पेश करने के लिए विपक्षी सदस्यों की ओर से दिए गए नोटिस पर विचार करेगी। पहले दिन की कार्यवाही में ही इस विषय को लिस्टेड किया गया है। दूसरी ओर कांग्रेस की ओर से लोकसभा और राज्यसभा में पश्चिम एशिया के घटनाक्रम पर चर्चा को लेकर नोटिस दिया गया है। जानकारी ये भी है कि विदेश मंत्री एस. जयशंकर संसद में इस मुद्दे पर अपनी बात रख सकते हैं।

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मनीष तिवारी ने दिया कार्य स्थगन प्रस्ताव का नोटिस

संसद के बजट सत्र में दूसरे फेज के पहले दिन कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने लोकसभा में स्थगन प्रस्ताव पेश किया है। इस नोटिस में कहा गया है कि मैं प्रस्ताव करता हूं कि पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष से उत्पन्न गंभीर चिंताओं और भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर इसके प्रभावों पर विचार करने के लिए सदन में प्रश्नकाल, शून्यकाल और दिन के अन्य सभी सूचीबद्ध कार्यवाहियों को स्थगित कर दे।

उधर, कांग्रेस सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला ने राज्यसभा में नियम 267 के तहत बिजनेस नोटिस सस्पेंशन का नोटिस दिया है। इसमें पश्चिम एशिया में चल रहे घटनाक्रम और तनाव से भारत पर पड़ने वाले प्रभावों पर तत्काल चर्चा की मांग की गई है।

ओम बिरला के खिलाफ प्रस्ताव पर होगा फैसला

दूसरी ओर, लोकसभा में ओम बिरला के खिलाफ प्रस्ताव पर आज फैसला हो सकता है। इस पर पीठासीन सभापति की ओर से बुलाए जाने पर सदन के 50 सदस्यों को नोटिस के समर्थन में खड़ा होना होगा। फिर प्रस्ताव सदन के विचार के लिए स्वीकृत माना जाएगा। इसके बाद प्रस्ताव पर चर्चा और मतदान होगा। अगर 50 सदस्य नोटिस के समर्थन में खड़े नहीं होते हैं, तो प्रस्ताव पेश नहीं किया जा सकता है।

सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी और मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस दोनों ने अपने-अपने लोकसभा सदस्यों को इस मुद्दे पर विचार के समय सदन में उपस्थित रहने के लिए व्हिप जारी किया है। सदन में संख्या बल सरकार के पक्ष में काफी अधिक है, जिससे यह लगभग तय माना जा रहा है कि प्रस्ताव पराजित हो जाएगा।

प्रस्ताव पर सदन में क्या होगा?

  • ओम बिरला को अध्यक्ष पद से हटाने का प्रस्ताव लाने के लिए कांग्रेस के तीन सदस्य मोहम्मद जावेद, के. सुरेश और मल्लू रवि सदन की अनुमति मांगेंगे।
  • कम से कम 50 सदस्यों का समर्थन मिलने के बाद वे यह प्रस्ताव सदन में चर्चा और मतदान के लिए रखेंगे।
  • संविधान के अनुसार लोकसभा अध्यक्ष नोटिस पर विचार किए जाने के दौरान सदन में उपस्थित रह सकते हैं।
  • वह प्रस्ताव पर अपना पक्ष रख सकते हैं और मतदान भी कर सकते हैं, लेकिन जब इस विषय पर चर्चा होगी तब वे कार्यवाही की अध्यक्षता नहीं कर सकते।
  • ओम बिरला संभवतः सत्तापक्ष की प्रमुख पंक्तियों में बैठ सकते हैं, हालांकि नियम इस बारे में स्पष्ट नहीं हैं।

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