वॉशिंगटन। दुनिया भर को कर्ज बांटने वाली दुनिया की सबसे बड़ी इकोनॉमी अमेरिका पर भी भारीभरकम कर्ज का बोझ है। इसमें सबसे बड़ी बात तो यह है कि उस पर भारत की भी लगभग 216 अरब डॉलर की देनदारी बन रही है। एक अमेरिकी संसद सदस्य के मुताबिक उनके देश पर कर्ज का बोझ इस साल बढ़कर कुल 29 लाख करोड़ डॉलर होने वाला है। अमेरिकी सांसद एलेक्स मूनी के मुताबिक, देश पर कर्ज का बोझ लगातार बढ़ रहा है और उसमें सबसे ज्यादा हिस्सा चीन और जापान का है।
2000 से 2020 के बीच चार गुना हो गया अमेरिका पर कर्ज का बोझ
मूनी के मुताबिक, ‘अमेरिका पर कर्ज का बोझ इस साल बढ़कर 29 लाख करोड़ डॉलर तक पहुंचने वाला है। अमेरिका पर कर्ज के बोझ में किस रफ्तार से बढ़ोतरी हो रही है, उसको लेकर पब्लिक में बहुत भ्रांतियां हैं। हमारे ऊपर सबसे ज्यादा कर्ज जापान और चीन का है जो असल में दोस्त नहीं हैं।’ स्टैटिस्टा के मुताबिक, जनवरी 2021 में अमेरिका पर 27.78 लाख करोड़ डॉलर का कर्ज था जो 2000 से 2020 के बीच चार गुना हो गया।
अमेरिका के हर नागरिक पर पिछले साल 72,309 डॉलर का कर्ज था
2000 में अमेरिका पर सिर्फ 5.6 लाख करोड़ डॉलर का कर्ज था जो मार्च 2020 में 23.4 लाख करोड़ डॉलर हो गया। उस हिसाब से तब वहां के हर शख्स पर पिछले साल 72,309 डॉलर का कर्ज था। यह ओबामा के शासन में डबल हो गया था। अगर हम इसके मुकाबले इंडिया की बात करें तो इस पर 2020 में 2.332 लाख करोड़ डॉलर का कर्ज था। स्टैटिस्टा के मुताबिक भारत पर कर्ज का बोझ इस साल 2.628 लाख करोड़ डॉलर तक पहुंच सकता है।
खतरनाक स्थिति में पहुंच गया है GDP और कर्ज का अनुपात: अमेरिकी सांसद
जनवरी में प्रेसिडेंट जो बाइडेन ने कोविड के चलते हुए नुकसान से इकोनॉमी को संभालने के लिए 1.9 लाख करोड़ डॉलर का कोरोनावायरस पैकेज देने का ऐलान किया था। पैकेज में लोगों को दी गई सीधी आर्थिक राहत, कारोबारियों को दिया गया सपोर्ट और टीकाकरण योजना के लिए दी गई रकम शामिल है। मूनी के मुताबिक राहत पैकेज को मंजूरी देने से पहले सांसदों को GDP और कर्ज के अनुपात को देखना होगा जो खतरनाक स्थिति में पहुंच गया है।











