‘न्यू कैलेडोनिया। न्यूजीलैंड में शुक्रवार की सुबह तीन शक्तिशाली भूकंप दर्ज किया गया। इसके बाद न्यूजीलैंड के तटवर्ती इलाकों के लिए जो चेतावनी जारी की गई थी, प्रशासन ने उसे वापस ले लिया गया है। तीनों भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 7 से अधिक मांपी गई। इनमें सबसे शक्तिशाली भूकंप 8.1 की तीव्रता का था जिसका केंद्र न्यूज़ीलैंड से एक हजार किलोमीटर उत्तर-पूर्व में बताया गया है।
इस मामले में स्थानीय प्रशासन ने कहा है, “शुक्रवार सुबह स्थिति बहुत ही भयावह लग रही थी, लेकिन दोपहर (स्थानीय समय अनुसार) होते-होते खतरा टल गया। सबसे बड़ी लहर अब पार हो चुकी है। जो लोग सुनामी से बचने के लिए ऊंचे स्थानों पर चले गये थे, वो अब अपने घरों की ओर लौट सकते हैं।”खतरा टलने के बाद भी न्यूजीलैंड प्रशासन ने लोगों को समुद्र तटों पर ना जाने की सलाह दी है।
शुक्रवार सुबह, प्रशासन ने न्यूजीलैंड के उत्तरी द्वीप में तट के किनारे रहने वाले लोगों से सुरक्षित स्थानों पर चले जाने की अपील की गई थी।एक के बाद एक आये तीन शक्तिशाली भूकंप के झटकों के बाद यह चेतावनी प्रशासन ने जारी की थी। दरअसल स्थानीय प्रशासन को भूकंप के बाद, सुनामी आने का डर था।
न्यूजीलैंड की राष्ट्रीय आपातकालीन एजेंसी ने खतरे की चेतावनी जारी करते हुए कहा था कि ‘न्यू कैलेडोनिया और वानुअतु द्वीप के लोगों को खतरे का सामना करने के लिए तैयार रहना चाहिए। अनुमान के अनुसार, इनके तटों पर 3 मीटर (करीब 10 फीट) तक ऊंची लहरें देखी जा सकेंगी।
स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, चेतावनी जारी होने के बाद कुछ तटवर्ती शहरों में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। सैकड़ों लोग ऊंचे इलाकों में जाने का प्रयास कर रहे थे जिसकी वजह से कुछ जगहों पर लोगों में झड़प होने की खबरें भी मिलीं।
न्यूजीलैंड के अलावा, पेरू, इक्वाडोर और चिली सहित दक्षिण अमेरिका के कुछ अन्य हिस्सों में भी चेतावनी दी गई थी कि सुनामी के कारण उनके यहां एक मीटर तक लहरें उठ सकती हैं।
हवाई स्थित पेसिफिक सुनामी वार्निंग सेंटर ने कहा कि “सुनामी की लहरें बनती देखी गई हैं, लेकिन अभी तक इनसे कोई नुकसान नहीं हुआ है।”
इस भूकंप के बाद ही, न्यूजीलैंड की राष्ट्रीय आपातकालीन एजेंसी को चेतावनी जारी करने पर मजबूर होना पड़ा।
पिछले सप्ताह ही, न्यूजीलैंड के दक्षिणी द्वीप क्राइस्टचर्च में आये एक बड़े भूकंप के दस साल पूरे हुए हैं जिसने इस द्वीप के कई हिस्सों को तबाह कर दिया था और तब 185 लोगों की मौत हुई थी।











