अलगाव की मांग के लिए पूर्व सरकारों को ठहराया जिम्मेदार

इस्लामाबाद। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने संकेत दिया है कि वह बलूचिस्तान के अलगाववादी संगठनों के साथ वार्ता कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि बलूचिस्तान में अलगाववाद की मुख्य वजह पहले की सरकारों की दूरस्थ प्रांत के विकास में बरती गई लापरवाही है। इससे लोग मुख्यधारा से कट गए।

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इमरान ने ग्वादर में यह बात इलाके के बुजुर्गों और छात्रों के बीच कही। पाकिस्तान के गठन के बाद से ही बलूचिस्तान के लोग उससे अलग होने की मांग कर रहे हैं। इस अलगाववाद को कुचलने के लिए पाकिस्तानी सेना और अन्य बलों ने वहां पर बर्बर अत्याचार किए और दसियों हजार लोग गायब कर दिए या झूठे मुकदमों में जेल में डाल दिए।

हिंगलाज मंदिर के विकास को स्वीकृति नहीं

बलूचिस्तान अवामी पार्टी के सांसद दानेश कुमार ने ऐतिहासिक हिंगलाज माता के मंदिर के मसले पर केंद्र सरकार की निंदा की है। उन्होंने कहा है कि मंदिर के विकास के संबंध में प्रस्तावित सभी योजनाओं को इमरान सरकार ने अस्वीकार कर अपनी संकुचित मानसिकता प्रदर्शित की है। इस मंदिर में दर्शन के लिए देश-विदेश के हजारों लोग हर साल आते हैं। सांसद ने बताया कि उन्होंने मंदिर के विकास के लिए एक दर्जन योजनाओं का प्रस्ताव सरकार को भेजा था लेकिन उसे अस्वीकृत कर दिया गया। सरकार ने मंदिर के विकास और रखरखाव के लिए एक रुपया भी देने से इन्कार कर दिया।

बबलूचिस्तान में आजाद बलूच आंदोलन चल रहा है। इन लोगों की मांग है कि बलूचिस्तान को अलग देश बनाया जाए। वहीं, यहां चीन ने दूरसंचार कंपनियों का जाल बिछाना शुरू कर दिया है, जिसके सहयोग से पाकिस्तान बलूचों की जासूसी भी कर रहा है। इसके अलावा ग्वादर बंदरगाह पर चीन का पूरी तरह अधिकार होने से भी बलूचों में आक्रोश है।

बलूच नेशनल पार्टी के अध्‍यक्ष अख्‍तर मिंगल कई बार यह बात कह चुके हैं कि बलूचिस्‍तान 1947 से पहले तक आजाद था और पाकिस्‍तान ने इस पर अवैध कब्‍जा जमाया हुआ है। उन्होंने कहा कि बलूच लोग लगातार अपनी आजादी के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं।

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