मनी लॉन्ड्रिंग मामले में इमरान मसूद की अंतरिम जमानत 19 तक बढ़ी

गाजियाबाद। धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपित कांग्रेस सांसद इमरान मसूद शनिवार को कोर्ट में पेश हुए। उनकी अंतरिम जमानत 19 अगस्त तक के लिए बढ़ा दी है। वर्ष 2007 में सहारनपुर नगर पालिका परिषद के अध्यक्ष पद पर रहते हुए इमरान मसूद पर आरोप है कि उन्होंने गैर कानूनी तरीके से नगर पालिका परिषद अध्यक्ष रहते हुए पालिका परिषद के खाते से करीब 40 लाख रुपए निकाले थे।

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मामले में नगर पालिका परिषद के अधिशासी अधिकारी यशवंत सिंह ने इमरान मसूद के खिलाफ छह नवंबर 2007 में इस मामले को लेकर मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस ने उनके खिलाफ कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल किया था। ईडी ने भी इमरान मसूद के खिलाफ मनी लांड्रिंग का मुकदमा रजिस्टर्ड किया।

शनिवार को सीबीआइडी न्यायालय में इमरान मसूद के खिलाफ चार्ज फ्रेम हुए। नियमित जमानत दिए जाने के मामले में सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता ने थाने से प्राप्त इमरान मसूद का कोर्ट में अपराधी के इतिहास पेश किया। इमरान मसूद के वकील ने इस संबंध में दस्तावेज दाखिल करने के लिए समय मांगा।

कोर्ट ने अगली सुनवाई तक के लिए इमरान मसूद की अंतरिम जमानत बढ़ा दी है। वहीं ईडी के मामले में इमरान मसूद का सीआरपीसी की धारा 313 के तहत बयान दर्ज किया। कोर्ट ने दोनों मामलों में अगली सुनवाई के लिए 19 अगस्त की तिथि लगाई है।

बीमा कंपनी को शेष बीमा राशि का भुगतान करने का आदेश

उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने चोरी हुए ट्रक की शेष धनराशि 15,949 रुपये भुगतान करने का आदेश दिया। आयोग के अध्यक्ष प्रवीण जैन ने निर्देशित किया कि यदि बीमा कंपनी निर्धारित समय के भीतर राशि का भुगतान नहीं करती तो परिवादी को छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ यह राशि प्राप्त होगी।

इंदिरापुरम निवासी लालमन सिंह ने न्यू इंडिया इंश्योरेंस कंपनी के खिलाफ अदालत में परिवाद दायर किया था, जिसमें बताया गया कि उनका ट्रक 27 जून 2014 को चोरी हो गया। पुलिस रिपोर्ट के बाद बीमा कंपनी से क्लेम की प्रक्रिया शुरू की। बीमा राशि 7,28,099 रुपये थी, जिस पर बीमा कंपनी ने वैल्यू मूल्यांकन कर 5,30,125 का भुगतान किया।

रिपोर्ट के आधार पर केवल 5,30,125 रुपये की क्षति पाई गई

कंपनी का दावा था कि सर्वे रिपोर्ट के आधार पर केवल 5,30,125 रुपये की क्षति पाई गई और इसके लिए परिवाद संतुष्ट हो गया। बीमा कंपनी का कहना था कि उन्होंने सभी दस्तावेजी औपचारिकताओं का पालन किया और 5,30,125 रुपये का भुगतान किया।

अदालत ने परिवादी के पक्ष में निर्णय सुनाते हुए कहा कि बीमा राशि का 75 प्रतिशत के आधार पर भुगतान करना चाहिए था। वैल्यू मूल्यांकन के अनुसार कुल भुगतान 5,46,074 रुपये करना चाहिए था, लेकिन कंपनी ने सिर्फ 5,30,125 का भुगतान किया। इसलिए शेष धनराशि 15,949 रुपये का भुगतान करे।

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