नई दिल्ली: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने देश को फिर से महान बनाने के चक्कर में कई अजीबोगरीब फैसले ले रहे हैं। पहले उन्होंने दुनियाभर के देशों पर जबरदस्त टैरिफ लगाया और अब कंपनियों से भी वसूली करने लगे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक चिप बनाने वाली कंपनियों एनवीडिया और एएमडी ने चीन को एक्सपोर्ट से होने वाली कमाई का 15% सरकार को देने पर सहमति जताई है। इन कंपनियों को एक्सपोर्ट लाइसेंस लेने के लिए इस तरह की बेतुकी शर्त मानने के लिए मजबूर किया जा रहा है।
जानकारों का कहना है कि यह बहुत बड़ा फैसला है। दोनों कंपनियों को अपने रेवेन्यू का 15 फीसदी हिस्सा सरकार को देना होगा। इससे साफ है कि ट्रंप सरकार अब हर कंपनी से इस तरह का मोलभाव करने पर उतर आई है। इससे एक नए तरह का ट्रेड वॉर शुरू हो सकता है। एनवीडिया का कहना है कि दुनिया भर में मार्केटिंग के लिए वह अमेरिकी सरकार के नियमों को मानती है। कंपनी का कहना है कि इससे वह चीन को H20 चिप का एक्सपोर्ट कर सकेगी जो कई महीनों से रुका हुआ है।
सिक्योरिटी पर खुली कलई
एग्रीमेंट के तहत एनवीडिया चीन को एच20 चिप की बिक्री से होने वाली कमाई का 15 फीसदी अमेरिकी सरकार को देना होगा। इसी तरह एएमडी अपने MI308 चिप के रेवेन्यू का 15% हिस्सा देगी। जानकारों ने इस एग्रीमेंट को अभूतपूर्व बताते हुए कहा कि इससे ट्रेड वॉर का एक नया चैप्टर शुरू हो सकता है। इससे पहले अमेरिका ने सुरक्षा चिंताओं के चलते चीन को एनवीडिया के H20 चिप की बिक्री रोक दी थी। इनका यूज आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस एप्लिकेशंस में किया जाता है।
जानकारों का कहना है कि इस ट्रंप सरकार एक्सपोज हो गई है। उनका कहना है कि 15 फीसदी पेमेंट से आपकी सुरक्षा चिंता दूर कैसे हो सकती है। 2023 में बाइडन सरकार ने चीन को चिप की बिक्री पर रोक लगा दी थी। इसके बाद एनवीडिया ने H20 चिप को खासकर चीन के बाजार के लिए विकसित किया था। लेकिन ट्रंप सरकार ने भी अप्रैल में इसकी बिक्री रोक दी। एनवीडिया के सीईओ जेंसन हुआंग ने कई महीनों तक लॉबिंग करने के बाद इसकी बिक्री की बहाली के लिए प्रयास किया था। पिछले हफ्ते ही वह ट्रंप से मिले थे।
कंपनियों पर दबाव
ट्रंप ने कई बड़ी कंपनियों पर अमेरिका में निवेश के लिए दबाव बनाया है। पिछले हफ्ते ऐपल ने अमेरिका में 100 अरब डॉलर का निवेश करने की घोषणा की थी। पहले भी कंपनी अगले चार साल में अमेरिका में 500 अरब डॉलर के निवेश का वादा कर चुकी है। चिप बनाने वाली कंपनी माइक्रोन टेक्नोलॉजी ने जून में अमेरिका में 200 अरब डॉलर के निवेश की बात कही थी। एनवीडिया भी अमेरिका में 500 अरब डॉलर के निवेश से एआई सर्वर बनाने की घोषणा कर चुकी है।











