नई दिल्ली: मुख्य कोच गौतम गंभीर की अगुवाई में भारतीय क्रिकेट टीम ने इंग्लैंड दौरे पर जबरदस्त खेल का प्रदर्शन किया। खास तौर से अंतिम टेस्ट मैच में जिस तरह से टीम इंडिया ने मैच को पलटा वो कमाल था। उस जीत के कारण ही भारतीय टीम ने सीरीज को 2-2 से ड्रॉ करने में सफल रही।
मुकाबले के बाद गौतम गंभीर ने टीम इंडिया के लिए प्रेस कॉन्फ्रेंस में अपना दबंग अंदाज दिखाया। ऐसा जरूरी भी था क्योंकि अंतिम टेस्ट मैच के पहले चार दिन को देखें तो इसमें इंग्लैंड की टीम पूरी तरह से हावी थी। ऐसे में गौतम गंभीर प्रेस कॉन्फ्रेंस में सिर्फ अपनी खुशी या राहत जाहिर करने के लिए नहीं आए थे। बल्कि वह यह बताने के लिए आए थे कि जो लोग उनकी रणनीतियों पर शक करते हैं उन्हें उनके बारे में पूरी तरह कुछ पता ही नहीं है।
गौतम गंभीर एक ऐसे कोच हैं जो चुनौतियों से प्रेरित होते हैं। इंग्लैंड से 2-2 के स्कोर के साथ वापस आकर, उन्होंने टेस्ट क्रिकेट में भारत के प्रदर्शन को बेहतर बनाने के लिए गए कुछ कड़े फैसलों को सही साबित किया है। ऐसे में अब अगले छह महीने गंभीर लिमिटेड ओवरों पर ज्यादा फोकस करेंगे, जिसकी शुरुआत एशिया कप से होगी। यह पहला ऐसा मौका होगा जब गंभीर को टी20 टीम पर लंबे समय तक काम करने का मौका मिलेगा। हालांकि, उनके लिए इस फॉर्मेट में टीम को संभालना ज्यादा मुश्किल नहीं होनी चाहिए क्योंकि इस टीम को लगभग गंभीर ने ही सेट किया है।
युवा खिलाड़ियों पर गंभीर दिखाते हैं भरोसा
भारतीय क्रिकेट टीम में गौतम गंभीर के टी20 फॉर्मेट की बात की जाए तो उसकी शुरुआत एक बड़े बदलाव से हुई। बदलाव ये था कि रोहित शर्मा के संन्यास के बाद हार्दिक पंड्या कप्तानी की रेस में सबसे आगे थे, लेकिन सूर्यकुमार यादव को कमान मिली। वहीं रोहित और विराट कोहली जैसे खिलाड़ी के नहीं होने से गंभीर ड्रेसिंग रूम में आसानी से अपनी सोच को लागू कर पाए।
भारतीय टीम में अपनी भूमिका संभालने से ठीक पहले गंभीर ने रविचंद्रन अश्विन के यूट्यूब चैनल पर कहा था कि, ‘भारत के लिए टी20 वर्ल्ड कप टीम का चयन IPL से होना चाहिए।’ ऐसे में ये साफ है कि गंभीर अभी कुछ बड़ा बदलाव नहीं करना चाहते, लेकिन ये भी तय है कि वह बड़े खिलाड़ियों को उनके कंफर्ट जोन से बाहर निकालने में बिलकुल नहीं हिचकिचाते।
सिर्फ इतना ही नहीं, वह नए खिलाड़ियों को जिम्मेदारी देने में भी पीछे नहीं हटते। चाहे वह 2014 में केकेआर में सूर्यकुमार यादव और मनीष पांडे हों या लखनऊ सुपर जायंट्स में आयुष बडोनी को सपोर्ट करना हो। इसका एक बड़ा उदाहरण वॉशिंगटन सुंदर हैं, जिन्हें एक टेस्ट ऑलराउंडर के तौर पर परिपक्व करने में बहुत हद तक गंभीर के अटूट समर्थन का योगदान माना जाता है।
सभी फॉर्मेट के लिए बना सकते हैं एक कप्तान
गौतम गंभीर एक ऐसे कोच हैं जो खिलाड़ियों से निरंतरता चाहते हैं। भारतीय क्रिकेट में यह चर्चा है कि वह जल्द ही सभी फॉर्मेट के लिए एक कप्तान पर अपनी बात रखेंगे, ताकि अलग-अलग खिलाड़ियों के बीच एक ही तरह का माहौल बनाया जा सके। गंभीर का नजरिया बिल्कुल साफ है। वह टी20 टीम को एक नया रूप देना चाहते थे।
भारत पर अक्सर इस फॉर्मेट में समय के साथ नहीं चल पाने का आरोप लगता रहा है। गंभीर ने टी20 विशेषज्ञों कहे जाने वाले खिलाड़ियों के साथ इस समस्या को हल करने का फैसला किया है। उन्हें खिलाड़ियों का ग्रुप बड़ा होने से कोई दिक्कत नहीं है। यही कारण है कि पिछले साल रमनदीप सिंह और मयंक यादव को मौका दिया गया। पिछले 12 महीनों में भारत का आक्रामक टी20 क्रिकेट इस बात का सबूत है कि दिल्ली का यह खिलाड़ी कैसे काम करना चाहता है।
यही वह फॉर्मेट है जिसने उन्हें एक रणनीतिकार के रूप में पहचान दिलाई। उन्होंने एक दशक से भी पहले केकेआर के कप्तान के रूप में दो आईपीएल खिताब जीते थे, जिसके बाद 2024 में एक मेंटर के रूप में लौटकर उन्होंने टीम को तीसरा खिताब दिलाया। जो लोग गंभीर के साथ ड्रेसिंग रूम में रहे हैं वे कहते हैं कि कोच पूरे मैच को 20 ओवर की तरह देखने के बजाय इसे 120 गेंदों में बांटकर देखते हैं। ‘हर गेंद का असर होना चाहिए’ उनका पसंदीदा जुमला है। एशिया कप से हमें यह पता चल सकता है कि वह अगले कुछ महीनों में कैसे काम करना चाहते हैं, लेकिन अभी कुछ भी तय नहीं है।










