बाहरी दिल्ली। बाहरी दिल्ली में जमीन अधिग्रहण को लेकर दिल्ली के राजस्व विभाग की ओर से निकाले गए पब्लिक नोटिस के बाद तीर्थंकर नगर जैन कॉलोनी, कराला के कश्मीरी ब्लॉक में रहने वाले करीब 150 मकान मालिकों की नींद उड़ गई है।
उत्तर-पश्चिम जिला मजिस्ट्रेट की ओर से बताया गया कि सरकार भूमि के लिए नए अधिग्रहण की कार्यवाही शुरू करने का इरादा रखती है। इस जमीन को सार्वजनिक उद्देश्य के लिए अधिग्रहित किया जाना है। मुआवजे और आपत्ति के लिए जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय से संपर्क करने को कहा गया है। इस नोटिस पर लोगाें ने नाराजगी जाहिर की है।
लोगों का कहना है कि 1990 से लोग रह रहे हैं। सरकार ने सभी मूलभूत सुविधाएं दे रखी हैं। यही नहीं, उनकी कालोनी का नाम पीएम उदय योजना में भी दर्ज है। इस क्षेत्र में कई विस्थापित कश्मीरी पंडित भी रह रहे हैं। एक प्रशासनिक अधिकारी ने बताया कि यह एक प्रक्रिया है, अगर किसी को कोई आपत्ति और परेशानी है तो लिखित में अवगत कराना चाहिए।
गत 31 जुलाई को जारी किए गए इस नोटिस में पिछले साल मई माह में सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए उत्तर-पश्चिम क्षेत्र के पांच खसरा नंबर का उल्लेख किया गया है। नोटिस में बताया गया है कि सरकार आरएफसीटीएलएआरआर अधिनियम, 2013 के तहत नए सिरे से अधिग्रहण करना चाहती है। जमीन अधिग्रहण के इस नोटिस के बाद प्रभावित लोग लामबंद होने लगे हैं।
वहीं, लोगों ने इक्ट्ठा होकर संबंधित अधिकारियों से मुलाकात की है और कुछ लोगों ने प्रधानमंत्री, गृहमंत्री और मुख्यमंत्री को पत्र लिखे हैं। तीर्थंकर नगर जैन कालोनी के कश्मीरी ब्लाक में रहने वाले वरिष्ठ नागरिक महाराज शाह ने बताया कि वे कश्मीरी पंडित हैं। 1990 में यहां आकर बसे थे।
इस दौरान सरकार ने सड़क, सीवर, बिजली-पानी आदि सुविधाएं उपलब्ध कराई हैं। लोग वर्षों से रह रहे हैं और अब सरकार जमीन लेना चाहती है। उन्होंने बताया कि नोटिस में जिस 54/22 खसरा नंबर का जिक्र किया गया है, उसमें लगभग 150 मकान बने हुए हैं।
यह कॉलोनी पीएम उदय योजना के साथ-साथ दिल्ली की 1731 अनाधिकृत कालोनी की सूची में 1064 नंबर के साथ दर्ज है। शाह ने बताया कि वे प्रापर्टी का मालिकाना हक मिलने की उम्मीद कर रहे थे, लेकिन इस नोटिस ने सबकी परेशानी बढ़ा दीै है।
तेज किशन कौल ने बताया कि उन्होंने 1990 में यहां जमीन ली थी और पांच साल बाद मकान बनाया, तब से यहां रह रहे हैं। अब कहां जाएं, समझ में नही आ रहा है। यहीं रहने वाले रविंद्र व हरीश बताते हैं कि वे इस कालोनी में 2006 व 2007 से रह रहे हैं, अब सरकार जमीन अधिग्रहण करना चाहती है। मतदाता पहचान-पत्र, आधार कार्ड आदि इसी पते पर हैं।













