नई दिल्ली: फेस्टिव सीजन चल रहा है। ग्राहकों को लुभाने के लिए जूलर की तरह-तरह की स्कीमें शुरू हो गई हैं। इनमें गहनों पर ‘0% मेकिंग चार्ज’ वाली स्कीम भी काफी लोकप्रिय है। हालांकि, यह मार्केटिंग ट्रिक के अलावा कुछ नहीं है। निवेश बैंकर सार्थक अनुजा ने इसकी पोल-पट्टी खोली है। उन्होंने सोने के गहनों पर ‘0% मेकिंग चार्ज’ के दावे को लेकर ग्राहकों को आगाह किया है।
उन्होंने लिंक्डइन पर इसे लेकर एक पोस्ट किया। इसमें उन्होंने बताया कि यह मार्केटिंग ट्रिक है। ग्राहक अक्सर इस झांसे में आकर ज्यादा पैसे दे देते हैं। सार्थक अनुजा ने पांच छिपे हुए तरीके बताए हैं जिनसे जूलर ज्यादा कमाई करते हैं। उन्होंने ग्राहकों को सलाह दी है कि वे हमेशा एचयूआईडी कोड की जांच करें।
अनुजा के अनुसार, जौहरी सोने की दरें बढ़ा-चढ़ाकर बताते हैं। ग्राहक भले ही गूगल पर सोने का भाव देखें। लेकिन, जौहरी अक्सर प्रति ग्राम 200 रुपये ज्यादा बताते हैं। 50 ग्राम सोने की खरीद पर यह 10,000 रुपये का अतिरिक्त शुल्क होता है। यह असल में 2% का छिपा हुआ चार्ज है।
वेस्टेज चार्ज से करते हैं वसूली
दूसरा तरीका है अलग से वेस्टेज चार्ज लेना। सोने के गहनों में वास्तविक वेस्टेज 2-3% होता है। लेकिन, जूलर अक्सर 5% तक बिल करते हैं। वे कहते हैं कि डिजाइन जटिल है। इससे भी बुरा यह है कि यह चार्ज आज की ऊंची सोने की दर पर लगता है। न कि उस दर पर जब गहना बना था।
तीसरा तरीका है महंगे पत्थर बेचना। जिन गहनों पर ‘0% मेकिंग चार्ज’ का विज्ञापन होता है, उनमें जड़े हुए पत्थर या सजावट की कीमत बहुत ज्यादा होती है। यह छोड़ी गई फीस की भरपाई कर देता है।
खराब बायबैक की शर्तें
चौथा तरीका है खराब बायबैक शर्तें। कुछ जूलर 90% सोने के मूल्य पर बायबैक का वादा करते हैं। लेकिन, ‘0% मेकिंग चार्ज’ वाले गहनों के लिए यह 70-80% तक गिर जाता है। यह ग्राहकों के लिए एक और नुकसान है।
पांचवां तरीका है थोक मार्जिन साझा न करना। जूलर सोना कम थोक दरों पर खरीदते हैं। लेकिन, इसका फायदा ग्राहकों को नहीं मिलता। अनुजा ने कहा कि हमेशा बीआईएस केयर ऐप पर HUID देखकर कोई गहना खरीदना चाहिए। यह कोड भारत की हॉलमार्किंग प्रणाली के तहत शुद्धता और प्रामाणिकता की पुष्टि करता है।










