ईरान के मिनी B-2 बॉम्बर… खामेनेई की फौज ने अमेरिकी तकनीक चुराकर बनाया

तेल अवीव: इजरायल और ईरान के बीच हालिया समय में लगातार तनातनी देखी गई है। खासतौर से ईरान के हथियारों को लेकर इजरायल और अमेरिका की ओर से कई दावे किए जाते रहे हैं। एक नया दावा सामने आया है, जिसमें कहा गया है कि खतरनाक स्टील्थ ड्रोन का बेड़ा तैयार कर लिया है। ईरान ने इन ड्रोन को अमेरिका से चुराई तकनीक से बनाया है। इन ड्रोन को अमेरिका के B-2 बॉम्बर की तरह खतरनाक माना जा रहा है। ऐसे में इनको मिनी B-2 कहा गया है।

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इजरायली मीडिया वायनेट के मुताबिक, ईरान ने स्टील्थ ड्रोन बनाने का काम दिसंबर, 2011 में शुरू किया था। दरअसल अफगानिस्तान के ऊपर परीक्षण मिशन उड़ा रहा अमेरिकी RQ-170 सेंटिनल स्टील्थ ड्रोन अचानक रास्ता भटक गया और ईरान में घुस गया। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) ने ड्रोन के संचार को जाम कर दिया और इसके जीपीएस सिग्नल की नकल करके सुरक्षित रूप से अपने इलाके में से गए।

ईरान का ड्रोन बेड़ा

रिपोर्ट कहती है कि पकड़े गए सेंटिनल ने तेहरान को अमेरिका के सबसे उन्नत स्टील्थ डिजाइनों में से एक तक पहुंच प्रदान की। अगले कुछ ही वर्षों में इसकी कॉपी शहीद-171 सिमोर्ग के तौर पर तैयार हो गई। शाहिद-171 इसकी हूबहू प्रतिकृति है। यह लंबी दूरी की टोही के लिए डिजाइन किया गया है। इसमें एक सिंथेटिक अपर्चर रडार लगा है, जो 3D जमीनी तस्वीरें बनाता है और इसकी रेंज 2,200 किलोमीटर है।

ईरान के लिए अमेरिकी सिमोर्ग स्टील्थ ड्रोनों की पूरी फैमिली का आधार बन गया। विश्लेषकों ने निगरानी, हमले और आत्मघाती अभियानों के लिए विकसित कम से कम पांच ऑपरेशनल वेरिएंट की पहचान की है। इस समूह का शाहिद-191 चार निर्देशित बम या ग्लाइड हथियार ले जा सकता है। यह 500 किलोमीटर तक उड़ता है। शाहिद-181 हल्के पिस्टन इंजन का उपयोग करता है, जिससे टोही के लिए इसकी सीमा दोगुनी हो जाती है।

ईरान के छोटे किलर्स

ईरान ने स्टील्थ ड्रोन की एक दूसरी छोटी श्रृंखला विकसित की, जिसका आकार 60 प्रतिशत कम है। शाहिद-161 एक जेट-संचालित आत्मघाती ड्रोन है, जो जीपीएस और एक ऑप्टिकल सेंसर से निर्देशित होता है। यह 300 किलोमीटर की सीमा में जहाजों या काफिलों पर हमला करने के लिए आदर्श है। इसका साथी शाहिद-141 मुख्य रूप से एक टोही यान के रूप में काम करता है। यह एक छोटा विस्फोटक भार ले जाता है।

एक्सपर्ट का कहना है कि ईरान ने ड्रोन पर काफी काम किया है और उसका स्टील्थ बेड़ा काफी हद तक परिष्कृत है। इजरायल के कई विशेषज्ञ इस पर चेतावनी देते हैं कि अगर ये ड्रोन ईरान ने बड़े पैमाने पर तैनात किए गए तो ये ड्रोन इजरायल की वायु रक्षा प्रणालियों के लिए मुश्किल का सबब बन सकते हैं। इनको रोकने में इजरायल के एयर डिफेंस फेल तक हो सकते हैं।

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