नई दिल्ली: भारत दुनिया की तेजी से उभरने वाली बड़ी ताकत बन रहा है। वह अभी दुनिया की चौथी बड़ी अर्थव्यवस्था है। 2027 तक भारत जर्मनी को पीछे छोड़कर दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा। ऑपरेशन सिंदूर में भारत ने सैन्य और रक्षा तैयारियों के मामले में भी पाकिस्तान को धूल चटा दी थी।
चीन के बड़े-बड़े हथियार और फाइटर जेट भी पानी मांगने लग गए थे। भारत की इसी ताकत को आंकते हुए चीन अब एक नया पैंतरा चल रहा है। यह काम वो गुपचुप तरीके से बरसों से कर रहा है। वह अमेरिका की तर्ज पर अपने लिए नया ‘इजरायल’ तैयार कर रहा है। भारत को इसी इजरायल के दम पर चीन घेरने की प्लानिंग कर रहा है। वेडनेसडे बिग टिकट में इसे विस्तार से समझते हैं
भारत को लेकर चीन को सता रहा है यह डर
यूरेशियन टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत वर्तमान में दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। हालांकि, 2027 तक भारत जर्मनी को पीछे छोड़कर दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा। इसके अलावा भारत वर्तमान में दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था है और निकट भविष्य में चीन से भी तेजी से बढ़ने वाला है।
दक्षिण एशिया और हिंद प्रशांत में टकराव संभव
यूरेशियन टाइम्स की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत पहले से ही दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला देश है, जिसने 2023 में चीन को पीछे छोड़ दिया है। हालांकि चीनी अर्थव्यवस्था भारतीय अर्थव्यवस्था से लगभग छह गुना बड़ी है, लेकिन मानव पूंजी के मामले में, नई दिल्ली अमेरिका की तुलना में चीन के लिए कहीं अधिक मजबूत चुनौती है। जैसे-जैसे भारत मजबूत होता जाएगा दक्षिण-पूर्व एशिया, हिंद-प्रशांत, दक्षिण एशिया और मध्य एशिया सहित विभिन्न क्षेत्रों में भारत और चीन के हितों के टकराव की संभावना है।
तिब्बत बन रहा चीन की कमजोर नस
मध्य एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया दोनों में भारत के ऐतिहासिक सांस्कृतिक संबंध और गहनता है। हालांकि, अमेरिका और चीन की तुलना में भारत एक कमजोर आर्थिक और सैन्य शक्ति है, फिर भी इन क्षेत्रों में भारत का सांस्कृतिक प्रभाव अद्वितीय है। उदाहरण के लिए, चीन के भीतर भी तिब्बत जैसे क्षेत्रों में भारत का ऐतिहासिक और सांस्कृतिक प्रभाव चीन की तुलना में कहीं अधिक गहरा है। तिब्बत के निर्वासित दलाई लामा भारत में ही रहते हैं।
ऐसे में चीन को यह डर है कि तिब्बत में चीन के खिलाफ विद्रोह की चिंगारी न भड़क जाए। यही वजह है कि वह जब-तब तिब्बती बौद्ध धर्म के प्रभाव वाले अरुणाचल प्रदेश पर भी अपना दावा करता रहता है। इसे लेकर भारत ने चीन को कड़े शब्दों में कई बार सुना दिया है और कह दिया है कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न अंग है।
चीन-भारत के बीच 3800 किलोमीटर लंबी सीमा
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि भारत और चीन लगभग 3,800 किलोमीटर लंबी विवादित सीमा साझा करते हैं। दोनों देशों ने 1962 में एक खूनी युद्ध लड़ा था। 1967 में नाथू ला दर्रे पर एक बड़ा संघर्ष हुआ था। 2018 में डोकलाम में 73 दिनों तक संकट रहा था। वहीं, 2020 में लद्दाख के गलवान क्षेत्र में एक बड़ा खूनी संघर्ष हुआ था। जैसे-जैसे भारत की अर्थव्यवस्था और प्रभाव बढ़ रहा है, यह अनसुलझा सीमा विवाद फिर से भड़क सकता है।
पाकिस्तान को नया इजरायल बना रहा चीन
डिफेंस एनालिस्ट लेफ्टिनेंट कर्नल (रि.) के अनुसार, चीन एक नई रणनीति विकसित कर रहा है, जो सीधे अमेरिकी रणनीति से प्रेरित है। यानी भारत को असंतुलित रखने के लिए चीन अब पाकिस्तान को अपना इजरायल बना रहा है। इस काम में वह पाकिस्तान के साथ-साथ बांग्लादेश को भी तैयार कर रहा है।
इस रणनीति में चीन अब पाकिस्तान को अपनी नवीनतम और सबसे शक्तिशाली हथियार प्रणाली की सप्लाई, अपने उपग्रह नेटवर्क के माध्यम से पाकिस्तान के युद्ध प्रयासों का समर्थन, पाकिस्तान की युद्धकालीन रणनीति का नेतृत्व, भारत-पाकिस्तान टकराव का उपयोग अपनी हथियार प्रणालियों का युद्ध परीक्षण करने, पाकिस्तान को कर्जे और वित्तीय सहायता, संयुक्त राष्ट्र जैसे अंतर्राष्ट्रीय निकायों में उसे राजनयिक संरक्षण प्रदान करना और पाकिस्तानी सेना के साथ संयुक्त सैन्य अभ्यास करना शामिल है।
पाकिस्तान-बांग्लादेश को मोहरा बना रहा चीन
हथियारों पर नजर रखने वाली संस्था SIPRI के अनुसार, 2020 और 2024 के बीच करीब 81% पाकिस्तानी हथियार चीन से आए। इससे पता चलता है कि आज पाकिस्तान चीनी हथियारों पर इजरायल की अमेरिकी हथियारों पर निर्भरता से कहीं ज्यादा निर्भर है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान, पाकिस्तान ने न केवल JF-17 और J-10C जैसे चीनी युद्धक विमानों, PL-15 जैसी हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलों, HQ-9 और HQ-16 जैसी वायु रक्षा प्रणालियों और ड्रोन का इस्तेमाल किया, बल्कि अपनी ‘किल-चेन’ को पूरा करने के लिए चीनी बेईदो नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम का भी इस्तेमाल किया। वहीं, चीन अब बांग्लादेश को भी भर-भरकर हथियार दे रहा है। इसके लिए जल्द ही 2.2 अरब डॉलर का समझौता होने वाला है।
बांग्लादेश को भर-भर देगा चीन अपने हथियार
इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के अनुसार, बांग्लादेश 20 चीनी J-10CE फाइटर जेट खरीदने की योजना बना रहा है। यह डील करीब 2.2 अरब डॉलर (19,521 करोड़ रुपये भारतीय मुद्रा) की है। इसमें प्रशिक्षण, रखरखाव और अन्य खर्च भी शामिल होंगे। ये जेट 2026 और 2027 में बांग्लादेश एयर फोर्स को दिए जाएंगे। चीनी J-10CE, J-10C का निर्यात संस्करण है। पाकिस्तान ने मई में भारत के साथ चार दिन के सैन्य संघर्ष में J-10C का इस्तेमाल किया था। चीन जहां अमेरिका के साथ आधिपत्य के लिए प्रतिस्पर्धा कर रहा है, वहीं बीजिंग यह भी मानता है कि भारत एशिया और वैश्विक स्तर पर उसका दीर्घकालिक भू-रणनीतिक और भू-राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी है।
भारत को उलझाए रखना चीन की रणनीति
वास्तव में चीन की यह रणनीति है कि पाकिस्तान और बांग्लादेश को पूरी तरह से हथियारबंद करना और उनकी युद्ध-क्षमताओं को बढ़ाना ताकि भारत दक्षिण एशिया में उलझा रहे। इसका मकसद है कि नई दिल्ली अंतर्राष्ट्रीय मंच पर चीन के लिए एक विश्वसनीय चुनौती न बन सके। भारत एक ही मोर्चे पर, दो देशों की संयुक्त क्षमताओं और सामर्थ्यों पर लड़ रहा है। इस बीच, चीन भारत के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर आक्रामक तैनाती बनाए रखकर भारतीय सेनाओं को विचलित रख सकता है।










