मॉस्को: चीन, रूस, ईरान, भारत और पाकिस्तान समेत दस प्रभावशाली देशों ने अमेरिका की अफगानिस्तान की वापसी का विरोध किया है। इन देशों ने कहा है कि वह अफगानिस्तान के बगराम एयरबेस पर फिर से नियंत्रण हासिल करने के अमेरिका के प्रयास के खिलाफ हैं। खास बात यह है कि इस मामले में पाकिस्तान और भारत ने एक मंच पर आते हुए जैसी बात कही है। दोनों देश हालिया समय में एक-दूसरे पर लगातार आक्रामक हैं लेकिन अफगानिस्तान के मुद्दे पर एक साथ हैं। रूस की राजधानी मॉस्को में इन देशों ने यह बयान जारी किया है।
अफगानिस्तान पर मॉस्को फॉर्मेट के बाद जारी संयुक्त बयान में अमेरिका का स्पष्ट रूप से नाम लिए बिना इन देशों ने अपना संदेश दिया है। इन देशों ने अफगानिस्तान और पड़ोसी देशों में अपने सैन्य बुनियादी ढांचे को तैनात करने के प्रयासों को अस्वीकार्य बताया है। बयान में इसे क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के हितों के खिलाफ कहा गया है। मॉस्को में नई दिल्ली के दूत विनय कुमार ने बैठक में भाग लिया।
मॉस्को में हुई बैठक
अफगानिस्तान की तालिबान सरकार से बगराम एयरबेस पर नियंत्रण वापस लेने के विरोध में आए देशों में भारत, पाकिस्तान, रूस के अलावा ईरान, कजाकिस्तान, चीन, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान शामिल हैं। बगराम स्थित सैन्य अड्डे पर नियंत्रण वापस पाने के अमेरिकी कदमों का विरोध में अफगानिस्तान पर मॉस्को फॉर्मेट परामर्श की सातवीं बैठक के बाद जारी किया गया। यह बैठक विशेष प्रतिनिधियों और वरिष्ठ अधिकारियों के स्तर पर मॉस्को में आयोजित हुई।
अमेरिका का अफगानिस्तान के बगराम बेस पर करीब दो दशक नियंत्रण रहा है। अगस्त 2021 में अफगानिस्तान से सैनिकों की वापसी के दौरान अमेरिका ने बगराम एयर बेस को छोड़ दिया था। हालिया दिनों में ट्रंप ने बार-बार बगराम स्थित बेस पर नियंत्रण की इच्छा जाहिर की है। ट्रंप ने हाल ही में कहा था कि उनका प्रशासन बगराम एयर बेस का नियंत्रण तालिबान से वापस लेगा। हालांकि भारत-पाकिस्तान जैसे पड़ोसी इसके विरोध में उतर आए हैं।
क्यों खास है ये बेस
बगराम अफगानिस्तान का सबसे बड़ा एयरबेस है। यह राजधानी काबुल से 60 किलोमीटर उत्तर में सामरिक महत्व वाले परवान प्रांत में स्थित है। परवान को अफगानिस्तान के बड़े हिस्से को नियंत्रित करने की चाबी कहा जाता है। यहां ये 2.6 किलोमीटर लंबी सलांग सुरंग काबुल को मजार शरीफ और उत्तर के दूसरे शहरों से जोड़ती है। दक्षिण में गजनी और कंधार और पश्चिम में बामियान तक यहां से रोड जाते हैं। इस बेस के जरिए पूरे क्षेत्र को नियंत्रित किया जा सकता है। इससे कुछ दूरी पर चीन की सीमा लगती है। चीन इसी इलाके में परमाणु बम से जुड़ी गतिविधियां करता है। ट्रंप इस पर भी नजर रखना चाहते हैं।










