पहलाम के हमलावर आतंकियों को लेकर डीजीएमओ ने किया बड़ा खुलासा

नई दिल्ली : ऑपरेशन सिंदूर को लेकर भारतीय सेना की तरफ से मंगलवार को अहम जानकारी दी गई। सैन्य अभियान महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान नियंत्रण रेखा पर पाकिस्तान के 100 से अधिक सैनिक हताहत हुए थे। 14 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर उन्हें ‘मरणोपरांत दिए गए पुरस्कारों की संख्या’ को देखते हुए यह बात कही गई है।

Advertisement

उन्होंने कहा कि पाकिस्तानियों ने संभवतः अनजाने में पिछले महीने 14 अगस्त को अपने पुरस्कारों की सूची जारी कर दी थी। उनकी तरफ से दिए गए मरणोपरांत पुरस्कारों की संख्या से हमें अब यह पता चलता है कि नियंत्रण रेखा पर उनके हताहतों की संख्या भी 100 से अधिक थी… नियंत्रण रेखा पर कार्रवाई की गई और हम इसके लिए तैयार थे। ले. जनरल घई ने पहलगाम हमले को अंजाम देने वाले आतंकियों के अंत को लेकर अहम बात भी बताई।

‘हमने आतंकियों को चैन से नहीं रहने दिया’

पहलगाम हमले के अपराधियों के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि हमें 96 दिन लग गए लेकिन हमने उन्हें चैन से नहीं रहने दिया। जब इन तीनों को ढूंढा गया और उनका मेडिकल टेस्ट किया गया तो ऐसा लग रहा था जैसे वे दौड़ते-भागते थक गए हों और वे बहुत कुपोषित भी लग रहे थे… अक्सर लोग पलटकर हमसे पूछते हैं कि वे कहां गायब हो गए हैं। लेकिन कभी-कभी यह भूसे के ढेर में सुई ढूंढने जैसा होता है।

सेना ने पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में ऑपरेशन सिंदूर चलाया। पहलगाम में 26 नागरिक मारे गए थे। इस अभियान में लश्कर-ए-तैयबा के गढ़ सहित नौ आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया। दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय वार्ता के बाद 10 मई को सैन्य अभियान रोक दिया गया था।

तब दबाव में थे पाकिस्तानी सेना प्रमुख

पाक सेना प्रमुख असीम मुनीर का सीधे नाम लिए बिना डीजीएमओ ने कहा कि यह फैक्ट कि उस समय पाकिस्तानी सेना और उसके प्रमुख दबाव में थे, सभी को पता है। उन्हें न केवल अपनी छवि, बल्कि पाक सेना की छवि को भी पुनर्जीवित करने की आवश्यकता थी। सबसे अच्छा और एकमात्र तरीका जो उन्हें ज्ञात है, वह वही करना था जो उन्होंने किया, चाहे वह कितना भी कायरतापूर्ण क्यों न रहा हो।

सैन्य सटीकता और कूटनीतिक कुशलता

ऑपरेशन सिंदूर के बारे में उन्होंने कहा कि यह सैन्य सटीकता और कूटनीतिक कुशलता, सूचनात्मक श्रेष्ठता और आर्थिक प्रभाव का सम्मिश्रण था… मैं 1960 की सिंधु जल संधि की बात कर रहा हूं, जिसे पहलगाम में आतंकवादी हमले के समय ही स्थगित कर दिया गया था। ले. जनरल घई ने कहा कि हमारी सैन्य कार्रवाइयां लक्षित, नियंत्रित और गैर-बढ़ाने वाली थीं, और हमने अपनी विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए उन्हें खुले तौर पर स्वीकार किया। हमने यह भी सुनिश्चित किया कि हम दबाव बनाने के लिए महत्वपूर्ण और महत्वपूर्ण पारंपरिक उपाय लागू करें।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here