नई दिल्ली: केंद्र सरकार की ओर से शनिवार को यह जानकारी दिए जाने के बाद कि संसद का शीतकालीन सत्र इस बार मात्र 1 दिसंबर से 19 तक का होगा, कांग्रेस ने मोदी सरकार पर सवालों की बौछार कर दी है। कांग्रेस का दावा है कि इतना छोटा संसद सत्र सिर्फ चुनावों से पहले ही देखने को मिलता है। पार्टी नेता जयराम रमेश ने आरोप लगाया है कि पहली बार संसद के इतने छोटे सत्र की घोषणा की गई है, जो कि प्रभावी तौर पर सिर्फ 15 दिनों का होगा। इसी के साथ उन्होंने यहां तक आशंका जता दी है कि क्या यह लोकसभा के मध्यावधि चुनाव के संकेत हैं?
छोटे संसद सत्र पर भड़की कांग्रेस
कांग्रेस सांसद और पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने न्यूज एजेंसी एएनआई से कहा है, ‘मैं बहुत ही हैरान हूं कि शीतकालीन सत्र इतनी देर से बुलाई गई है। आमतौर पर यह 20 और 23 नवंबर से 24 दिसंबर तक बुलाई जाती है, जो कि तीन से चार हफ्तों की होती है। मैं आश्चर्यचकित हूं कि इस बार यह सत्र 1 दिसंबर से शुरू होगा और सिर्फ 15 दिनों तक चलेगा…।’
छोटे सत्र पर कांग्रेस के सात सवाल
उन्होंने सवाल किया कि संसद का सत्र इतना छोटा क्यों किया जा रहा है। उन्होंने एक के बाद एक करके सात सवाल पूछे हैं कि क्या सरकार इन वजहों से सत्र को इतना छोटा रख रही है। जयराम रमेश ने इसको लेकर सरकार से सात सवाल किए हैं-
1) सरकार किस चीज से भाग रही है?
2) क्या दिल्ली के प्रदूषण की वजह से बच रही है?
3) क्या सरकार के पास विधेयक या बिल नहीं है?
4) क्या सरकार के पास बहस के लिए कोई विषय नहीं है?
5) क्या ट्रंप के बयानों से डरे हुए हैं?
6) क्या चीन पर कोई बहस नहीं चाहते?
7) क्या लोकसभा के मध्यावधि चुनाव के संकेत हैं?
‘क्या मिड-टर्म पोल होने वाला है?’
उन्होंने आरोप लगाया है कि सरकार जल्द से जल्द संसद सत्र की औपचारिकता पूरी करना चाहती है। उनका सबसे बड़ा सवाल मध्यावधि चुनाव को लेकर है। उन्होंने कहा है, “…चुनाव के पहले सत्र छोटे होते हैं। क्या ये संकेत देता है कि लोकसभा के चुनाव आने वाले हैं? क्या कोई मिड-टर्म पोल होने वाला है?”
सरकार का सार्थक सत्र की उम्मीद
इससे पहले संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने X पर 1 दिसंबर से 19 दिसंबर तक संसद का शीतकालीन सत्र के आयोजन की जानकारी दी। उन्होंने लिखा, ‘भारत की माननीया राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने 1 दिसंबर, 2025 से 19 दिसंबर, 2025 तक संसद के शीतकालीन सत्र आयोजित करने के सरकार के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। एक ऐसे रचनात्मक और सार्थक सत्र की आशा है, जो हमारे लोकतंत्र को मजबूत करेगा और लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करेगा।’
संसद के शीतकालीन सत्र के तारीखों की घोषणा हो चुकी है। तारीखों की घोषणा के साथ ही सत्र का विरोध शुरू हो गया है। विरोध की शुरुआत कांग्रेस की तरफ से की गई है। खास बात है कि कांग्रेस को विपक्षी साथी तृणमूल कांग्रेस का भी समर्थन मिल गया है। कांग्रेस ने शनिवार को कहा कि एक दिसंबर से शुरू होने वाले संसद के शीतकालीन सत्र में ‘असामान्य रूप से देरी और कटौती’ की गई है, क्योंकि सरकार के पास कोई विधायी कामकाज नहीं है तथा चर्चा भी नहीं होने दी जाएगी। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि इस साल शीतकालीन सत्र में महज 15 कार्य दिवस होंगे।
पारित करने के लिए कोई विधेयक ही नहीं
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि कहा, ‘अभी घोषणा की गई है कि संसद का शीतकालीन सत्र एक दिसंबर से 19 दिसंबर तक होगा। इसमें असामान्य रूप से देरी और कटौती की गई है। यह केवल 15 कार्य दिवस होंगे।’ रमेश ने सवाल किया कि क्या संदेश दिया जा रहा है? उन्होंने दावा किया, ‘ स्पष्ट रूप से सरकार के पास कोई विधायी कामकाज नहीं है, पारित करने के लिए कोई विधेयक नहीं है और चर्चा की अनुमति नहीं है।’
टीएमसी का मिला साथ
संसद के शीतकालीन सत्र की तारीखों की घोषणा के बाद, तृणमूल कांग्रेस नेता डेरेक ओ ब्रायन ने भी कांग्रेस का साथ दिया। टीएमसी नेता ने दावा किया कि सत्तारूढ़ बीजेपी नीत सरकार संसद का सामना करने से डर रही है। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू द्वारा शीतकालीन सत्र की तारीखों की घोषणा के ठीक बाद तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य ब्रायन ने सरकार पर निशाना साधा।
ब्रायन ने ‘एक्स’ पर कहा कि संसद का डर सता रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उनकी टीम को संसद का सामना करने से डर लगता है।’’ उन्होंने कहा: ’15 दिवसीय शीतकालीन सत्र की घोषणा की गई है। यह संदिग्ध रिकॉर्ड स्थापित कर रहा है।’ इससे पहले, दिन में संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने घोषणा की कि संसद का शीतकालीन सत्र एक से 19 दिसंबर तक आयोजित किया जाएगा। पिछले साल शीतकालीन सत्र 25 नवंबर से 20 दिसंबर तक आयोजित किया गया था।













