पाकिस्तान को बड़ा झटका, वाखान कॉरिडोर को एक्टिवेट करेगा तालिबान

काबुल: अफगानिस्तान को भारत के और करीब लाने के लिए तालिबान ने बड़ी तैयारी की है। इसके लिए अफगानिस्तान में तालिबान के नेतृत्व वाले इस्लामिक अमीरात ने वाखान कॉरिडोर को एक्टिवेट करने का फैसला किया है। तालिबान के इस फैसले से पाकिस्तान की बेचैनी बढ़ गई है। इसका प्रमुख कारण यह है कि वाखान कॉरिडोर भारत के जम्मू और कश्मीर की सीमा से सटा हुआ है, जिसके एक बड़े हिस्से पर पाकिस्तान ने अवैध रूप से कब्जा जमाया हुआ है। इस कॉरि़डोर के एक्टिव होने से तालिबान का चीन और उज्बेकिस्तान के साथ जमीनी संपर्क कायम हो जाएगा।

Advertisement

वाखान कॉरिडोर खोलेगा तालिबान

तालिबान समर्थित मीडिया ने बताया है कि इस्लामिक अमीरात सरकार वाखान कॉरिडोर को जल्द सक्रिय करने जा रहा है। इसके लिए उज्बेकिस्तान के साथ एक आर्थिक समझौता भी होने वाला है। इस समझौते के तहत वाखान कॉरिडोर को एक्टिवेट करने की तैयारी की जा रही है। इस कॉरिडोर के एक्टिवेट होने से अफगानिस्तान को विदेशी व्यापार में सहूलियत मिलेगी और वह मध्य एशिया के बाजारों तक अपनी पहुंच को बढ़ा सकेगा।

वाखान कॉरिडोर क्या है

वाखान कॉरिडोर अफगानिस्तान के बदख्शां प्रांत में स्थित जमीन के एक पतली पट्टी है। यह गलियारा अफगानिस्तान के पूर्व की ओर फैला है, जो उसे चीन के शिनजियांग प्रांत से जोड़ता है। इस कॉरिडोर के उत्तर में ताजिकिस्तान के गोर्नो-बदख्शां स्वायत्त क्षेत्र स्थित है। इस गलियारे के दक्षिण में पाकिस्तान खैबर पख्तूनख्वा सूबा और अवैध कब्जे वाला भारतीय क्षेत्र गिलगित-बाल्टिस्तान स्थित है।

वाखान कॉरिडोर का महत्व जानें

वाखान कॉरिडोर एक महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्ग रहा है। इस रास्ते से होकर व्यापारियों का कारवां दक्षिण एशिया, मध्य एशिया और यूरोप आते-जाते थे। इस क्षेत्र में कई ऊंची घाटियां हैं, जो 4,923 मीटर तक ऊंची हैं। यह गलियारा 1893 में ब्रिटिश राज के मोर्टिमर डूरंड और अफगानिस्तान के अमीर अब्दुर रहमान खान के बीच एक समझौते के बाद अब पाकिस्तान से ब्रिटिश क्षेत्र के बाहर बनाया गया था, ताकि रूसी साम्राज्य (अब ताजिकिस्तान) ब्रिटिश साम्राज्य (अब पाकिस्तान) को न छुए। इस समझौते ने डूरंड रेखा भी बनाई जो आज पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सीमा है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here