मुजफ्फरपुर: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा एक महिला चिकित्सक का हिजाब हटाने का मामला अब कानूनी गलियारों में पहुंच गया है। पटना के एक सरकारी कार्यक्रम में घटी इस घटना के विरोध में मुजफ्फरपुर के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (CJM) के न्यायालय में एक परिवाद दायर किया गया है। यह शिकायत बिहार प्रदेश कांग्रेस अल्पसंख्यक मोर्चा के प्रदेश महासचिव मोहम्मद राजू नैयर की ओर से दर्ज कराई गई है।
परिवादी का आरोप है कि मुख्यमंत्री का ये कृत्य न केवल एक महिला का अपमान है, बल्कि इससे पूरे समाज की धार्मिक और व्यक्तिगत भावनाएं आहत हुई हैं। इस मामले में उत्तर प्रदेश के मत्स्य मंत्री संजय निषाद को भी आरोपी बनाया गया है, जिन्होंने सार्वजनिक रूप से मुख्यमंत्री के इस कार्य का समर्थन किया था।
गंभीर धाराओं में शिकायत दर्ज
परिवादी मोहम्मद राजू नैयर के अधिवक्ता सूरज कुमार ने जानकारी दी कि ये परिवाद भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 76, 352, 79, 299 और 302 के तहत दाखिल किया गया है। अधिवक्ता के अनुसार, न्यायालय ने इस परिवाद को स्वीकार कर लिया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने साक्ष्यों और दलीलों पर विचार करने के लिए 3 जनवरी की अगली तिथि निर्धारित की है। परिवादी पक्ष का तर्क है कि संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति द्वारा इस तरह का व्यवहार अशोभनीय और दंडनीय है।
‘महिला समाज का अपमान हुआ’
मोहम्मद राजू नैयर ने मीडिया से बातचीत में कहा कि नियुक्ति पत्र वितरण के दौरान नवनियुक्त आयुष चिकित्सक नुसरत जहां का हाथ पकड़ने और उनका हिजाब खींचने का प्रयास करना निंदनीय है। उन्होंने कहा, ‘इस घटना से बिहार की महिलाएं स्वयं को अपमानित महसूस कर रही हैं। एक मुख्यमंत्री से ऐसे आचरण की अपेक्षा नहीं की जा सकती। यूपी के मंत्री संजय निषाद ने जिस तरह इस घटना का बचाव किया, उसने जख्मों पर नमक छिड़कने का काम किया है, इसलिए उन्हें भी इस कानूनी कार्रवाई के दायरे में लाया गया है।’
‘हिजाब’ पर अब कानूनी संग्राम
ये विवाद तब शुरू हुआ था जब पटना में नियुक्ति पत्र वितरण के दौरान मुख्यमंत्री ने एक महिला डॉक्टर का हिजाब हटाकर उनका चेहरा देखने का प्रयास किया था। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद से ही विपक्ष लगातार हमलावर है। अब मुजफ्फरपुर कोर्ट में मामला पहुंचने के बाद सरकार की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। 3 जनवरी को होने वाली सुनवाई पर सबकी निगाहें टिकी हैं, जहां न्यायालय ये तय करेगा कि मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया कैसे बढ़ेगी।













