मुद्दों ने खूब बढ़ाया ताप, शीतकालीन सत्र में ठिठका न काम; क्या-क्या हुआ खास?

नई दिल्ली। सियासी मुद्दों की गर्मी के बावजूद शीत सत्र में एसआइआर विवाद के संदर्भ में ‘चुनाव सुधार’ पर चर्चा ने गतिरोध की स्थिति नहीं बनने दी। वहीं वंदे मातरम के 150 वर्ष पूर्ण होने पर विशेष चर्चा के बहाने भी सत्ता पक्ष और विपक्ष ने अपना-अपना मोर्चा मजबूती से संभाले रखा।

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यही दो मुद्दे इतने महत्वपूर्ण रहे कि सत्र पटरी पर आया और राजनीतिक ताप भी इन्हीं मुद्दों ने बढ़ाया, लेकिन विधायी कार्य बाधित नहीं हुआ। तकरार और सुलह की धूप-छांव में चले सत्र के दौरान सरकार कई विधेयक पारित कराने में सफल रही। इनमें सबसे अधिक विवाद मनरेगा की जगह लाया गया विकसित भारत गारंटी फार रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) विधेयक (वीबी- जी राम जी) रहा।

विपक्ष ने लगातार किया विरोध

खास तौर पर कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस के जबर्दस्त विरोध के बाद भी सरकार ने इसे पारित कराने में सफलता अवश्यक पा ली, लेकिन खाली हाथ विपक्ष भी नहीं रहा और सड़क पर संघर्ष के लिए वह एक मुद्दा लेकर निकला है।

राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम के 150 वर्ष पूर्ण होने पर विशेष चर्चा पर और चुनाव सुधारों के बहाने एसआइआर पर चर्चा में जो तथ्य चर्चा में दोनों पक्षों द्वारा सामने लाए गए, उनसे किसे राजनीतक लाभ हुआ और किसे हानि यह तो भविष्य में तय होगा। मगर चर्चा में सभी दलों की भागीदारी ने सकारात्मक संदेश जरूर दिया।

शून्य काल और प्रश्न काल में जनहित से जुड़े मुद्दे भी दोनों सदनों में उठ सके और संबंधित मंत्रियों की ओर से जवाब दिए गए सूत्रों के अनुसार, सरकार की तैयारी इस सत्र में लगभग 14-15 विधेयक पारित कराने की थी।

इतने तो नहीं हो सके, लेकिन वीबी- जीराम जी विधेयक- 2025, सेस्टेनेबल हार्नेसिंग एंड एडवांसमेंट आफ न्यूक्लियर एनर्जी फार ट्रांसफार्मिंग इंडिया (शांति) बिल- 2025, सबका बीमा, सबकी रक्षा विधेयक- 2025, मणिपुर जीएसटी (दूसरा संशोधन) विधेयक- 2025, सेंट्रल एक्साइज (संशोधन) विधेयक- 2025 और रिलीलिंग एंड अमेंडिंग बिल- 2025 दोनों सदनों से पारित हो गए, जबकि सिक्युरिटीज मार्केट्स कोड बिल-2025 लोकसभा से संसद की स्थायी समिति को भेज दिया गया। इनमें सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच सबसे अधिक तकरार वीबी जी राम जी बिल को लेकर हुई। विपक्ष ने इस योजना से महात्मा गांधी का नाम हटाए जाने के खिलाफ सत्ता पक्ष के विरुद्ध सदन में और बाहर भी प्रदर्शन किया।

आंकड़ों में सफलता

  • सत्र के कुल दिन- 19
  • बैठकें- 15
  • लोकसभा की उत्पादकता- 111 प्रतिशत
  • राज्य सभा की उत्पादकता- 121 प्रतिशत

सीपी राधाकृष्णन ने विपक्ष को दी आत्मचिंतन की सलाह नवनियुक्त उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन के लिए राज्य सभा के सभापति के रूप में यह पहला सत्र था। सत्र के समापन पर उन्होंने कहा कि यह सत्र मेरे लिए विशेष महत्व रखता है, क्योंकि पद संभालने के बाद मैंने पहली बार राज्य सभा का सभापतित्व किया।

पूरे सत्र की उपलब्धियों का ब्योरा और दोनों को सहयोग के आभार व्यक्त करने के साथ ही उन्होंने कहा कि कल की बैठक के दौरान कुछ विपक्षी सदस्यों द्वारा नारेबाजी करना, तख्तियां प्रदर्शित करना, मंत्री द्वारा चर्चा का उत्तर देने को बाधित करना, पत्र फाड़ना और उन्हें सभापीठ के समक्ष रिक्त स्थान पर फेंकना, यह आचरण संसद सदस्यों की गरिमा के प्रतिकूल था।

मैं आग्रहपूर्वक आशा करता हूं कि सदस्य आत्ममंथन करेंगे और भविष्य में इस प्रकार के अव्यवस्थित एवं अनुचित आचरण की पुनरावृत्ति नहीं करेंगे। इसी तरह लोकसभा में अध्यक्ष ओम बिरला ने वहां की उत्पादकता के संबंध में सदस्यों को जानकारी देते हुए सभी दलों के सहयोग की सराहना की।

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