‘दो बेगम की जंग’ अब खत्म! कभी दोनों में थी राइवलरी

ई दिल्ली। बांग्लादेश की राजनीति में दशकों तक एक-दूसरे के खिलाफ खड़ी रहने वाली दो बड़ी शख्सियतों शेख हसीना और खालिदा जिया के बीच का लंबा रिश्ता अब एक दुखद मोड़ पर पहुंच गया है। पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के निधन पर निर्वासित शेख हसीना ने गहरा दुख जताया है। हसीना ने इसे बांग्लादेश की राजनीतिक दुनिया के लिए ‘गहरा नुकसान’ बताया है।

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यह संदेश आवामी लीग के एक्स अकाउंट पर पोस्ट किया गया। इस पोस्ट हसीना ने खालिदा जिया को देश की राजनीतिक इतिहास की अहम हस्ती के तौर पर याद किया।

शेख हसीना ने क्या कहा?

शेख हसीना ने अपने मैसेज में कहा कि खालिदा जिया बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री थीं और लोकतंत्र स्थापित करने की लड़ाई में उनकी भूमिका अहम रही है। हसीना ने लिखा, “बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री के रूप में लोकतंत्र की स्थापना के संघर्ष में उनकी भूमिका के लिए राष्ट्र के प्रति उनका योगदान महत्वपूर्ण था और इसे हमेशा याद किया जाएगा।”

हसीना ने आगे कहा कि जिया का निधन बांग्लादेश की राजनीति के लिए “एक गहरा नुकसान” है और बीएनपी की नेतृत्व क्षमता के लिए भी बड़ा झटका है।

हसीना ने खालिदा जिया की आत्मा की शांति के लिए दुआ की और उनके परिवार को संवेदना जाहिर की है। इसमें जिया के बेटे और बीएनपी के कार्यवाहक चेयरमैन तारिक रहमान का नाम विशेष रूप से लिया गया। हसीना ने कहा, “मैं उम्मीद करती हूं कि अल्लाह उन्हें इस मुश्किल वक्त में धैर्य, ताकत और सुकून दें।”

दोनों नेताओं की लंबी दुश्मनी

खालिदा जिया और शेख हसीना तीन दशकों से ज्यादा समय तक बांग्लादेश की राजनीति पर छाई रहीं हैं। दोनों ने बारी-बारी से देश का नेतृत्व किया और अपनी पार्टियों बीएनपी और आवामी लीग के बीच लंबी लकीर खींच कर रखी थी।

बांग्लादेश में इन्हें ‘दो बेगम’ कहा जाता था। दोनों मिलकर देश के 54 साल के इतिहास में 30 साल से ज्यादा समय तक प्रधानमंत्री रहीं। विदेशी मीडिया में उनकी इस राइवलरी को ‘दो बेगम की जंग’ कहा जाता था।

जॉय ने भी जताया दुख

हसीना के बेटे सजीब वाजेद जॉय ने भी खालिदा जिया के परिवार को संवेदना दी। अमेरिका में रहने वाले जॉय ने फेसबुक पर लिखा कि जिया ने राजनीतिक जीवन में कई सफलताएं हासिल कीं और देश के लिए कई नीतियां बनाईं।

जॉय ने कहा कि राष्ट्र निर्माण में उनका योगदान याद किया जाएगा और इस समय उनका निधन बांग्लादेश को स्थिर करने में बड़ा झटका है। जॉय पहले अपनी मां की सरकार में आईसीटी मामलों के सलाहकार रह चुके हैं।

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