ईरान में बिगड़ रहे हालात, आज भी प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाकर्मियों में हिंसक झड़प

People take part in a protest following the death of Mahsa Amini, in London, Britain October 1, 2022. REUTERS/Maja Smiejkowska

ईरान में बीते 6 दिनों से हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। देश के कई शहरों में जनता सड़कों पर उतर आई है और सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामनेई के शासन के खिलाफ खुलकर विरोध कर रही है। प्रदर्शन अब केवल आर्थिक नाराज़गी तक सीमित नहीं रहे, बल्कि कई जगहों पर यह टकराव और हिंसा में बदल चुके हैं।

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आज भी अलग-अलग इलाकों से प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के बीच झड़प की खबरें सामने आई हैं। बढ़ती हिंसा को देखते हुए सरकार ने देशभर में स्कूल, विश्वविद्यालय और कई सरकारी संस्थानों को अस्थायी रूप से बंद कर दिया है।

दो दिनों में 7 मौतें, शहर-शहर फैल रहा आक्रोश

प्रदर्शन के दौरान बीते दो दिनों में कम से कम 7 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। हालात ऐसे हैं कि छोटे शहरों से लेकर बड़े शहरी इलाकों तक लोग सड़कों पर उतर रहे हैं। कई स्थानों पर प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षा बलों के खिलाफ नारेबाज़ी की, जबकि कुछ इलाकों में हालात इतने बिगड़ गए कि पुलिस और सुरक्षाबलों को बल प्रयोग करना पड़ा।

हमादान में बड़ा दावा, IRGC बेस पर कब्जे की बात

पश्चिमी ईरान के हमादान प्रांत के असदाबाद से एक बड़ा दावा सामने आया है। यहां प्रदर्शनकारियों ने कहा है कि उन्होंने ईरानी रिवॉल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) के एक बेस पर कब्जा कर लिया है। हालांकि, सरकारी स्तर पर इस दावे की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन यह खबर विरोध की गंभीरता को दिखाती है।

आर्थिक बदहाली बनी विरोध की जड़

ईरान में विरोध की असली वजह देश की डूबती अर्थव्यवस्था मानी जा रही है। हालात ऐसे हैं कि ईरानी मुद्रा रियाल ऐतिहासिक गिरावट पर पहुंच गई है।

  • ईरान में एक अमेरिकी डॉलर करीब 14 लाख रियाल तक पहुंच चुका है
  • अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर 42 हजार रियाल के स्तर को पार कर चुका है
  • देश में महंगाई दर करीब 40 प्रतिशत तक पहुंच गई है

यही वजह है कि आम नागरिकों का गुस्सा अब खुलकर सड़कों पर दिखने लगा है।

सरकार का कदम, सेंट्रल बैंक में बड़ा बदलाव

बढ़ते असंतोष के बीच सरकार ने हालात संभालने की कोशिश की है। राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन की कैबिनेट ने पूर्व अर्थशास्त्र मंत्री अब्दोलनासर हेम्मती को ईरान के सेंट्रल बैंक का नया गवर्नर नियुक्त किया है।

सरकार का कहना है कि यह फैसला अर्थव्यवस्था को स्थिर करने और रियाल की गिरावट रोकने के लिए लिया गया है, लेकिन प्रदर्शनकारियों का गुस्सा अब भी कम नहीं हुआ है।

खामनेई के खिलाफ नारे, राजशाही की मांग उठी

प्रदर्शनों के दौरान कई जगहों पर लोगों को सीधे सुप्रीम लीडर खामनेई के खिलाफ नारे लगाते सुना गया। कुछ समूहों ने इससे भी आगे बढ़ते हुए ईरान में राजशाही की बहाली की मांग की है, जो शासन के लिए एक गंभीर राजनीतिक संकेत माना जा रहा है।

सुरक्षा बलों से तीखी झड़पें, हालात तनावपूर्ण

ईरान के कई हिस्सों से प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के बीच तीखी झड़प की खबरें आई हैं। कुछ इलाकों में सुरक्षा बलों ने भीड़ को तितर-बितर करने की कोशिश की, जबकि प्रदर्शनकारी लगातार सरकार विरोधी नारे लगाते रहे।

स्थिति को देखते हुए कई शहरों में सुरक्षा बढ़ा दी गई है, लेकिन हालात अब भी पूरी तरह काबू में नहीं हैं।

अमेरिका-इजरायल पर आरोप, लारिजानी का बयान

ईरान के सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव और वरिष्ठ नेता अली लारिजानी ने इन प्रदर्शनों के पीछे अमेरिका और इजरायल का हाथ होने का आरोप लगाया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, “ट्रंप को यह समझना चाहिए कि ईरान के घरेलू मामलों में अमेरिका का दखल पूरे क्षेत्र को अस्थिर कर देगा और अमेरिकी हितों को नुकसान पहुंचाएगा। इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत ट्रंप ने ही की है और उन्हें अपने सैनिकों की सुरक्षा पर ध्यान देना चाहिए।”

ईरानी अधिकारी पहले भी ऐसे प्रदर्शनों के लिए विदेशी हस्तक्षेप का आरोप लगाते रहे हैं।

आगे क्या?

फिलहाल ईरान में हालात बेहद नाजुक बने हुए हैं। प्रदर्शन थमने के बजाय फैलते जा रहे हैं और सरकार के सामने आर्थिक संकट के साथ-साथ राजनीतिक चुनौती भी खड़ी हो गई है। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि सरकार इन हालातों को बातचीत से संभाल पाती है या फिर सख्ती का रास्ता अपनाया जाता है।

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