नई दिल्ली: भारत की नौसेना हर दिन कम से कम 1000 जहाजों को हिंद महासागर में चल रहे ‘अदृश्य’ युद्ध से बचा रही है। हर दिन कम से कम 1000 जहाज मुख्य समुद्री रास्तों पर GPS जैमिंग की जाल में फंस रहे हैं। इन्फॉर्मेशन फ्यूजन सेंटर–इंडियन ओशन रीजन (IFC-IOR) समुद्री कॉरिडोर से गुजरने वाले जहाजों को ऐसे अदृश्य हमलों से बचा रही है। रिपोर्ट के मुताबिक इन जहाजों का GPS जाम कर दिया जाता है, जिससे जहाजों के भटकने का खतरा काफी बढ़ जाता है। ऐसे में भारतीय नौसेना का ये सेंटर गड़बड़ियों को ट्रैक करती है, डेटा का अध्ययन करती है और क्षेत्रीय पार्टनर्स के साथ मिलकर शिपिंग समुद्री कॉरिडोर में कारोबार का रक्षा करती है।
नवभारत टाइम्स को भारतीय नौसेना से पता चला है कि यह सेंटर, जो दक्षिण पूर्व एशिया से अफ्रीका तक समुद्री घटनाओं को ट्रैक करता है, वो गड़बड़ियों की रिपोर्ट करने, ऑटोमैटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (AIS) ट्रैक को वेरिफाई करने और कमर्शियल शिपिंग और राष्ट्रीय अधिकारियों को सुरक्षा सलाह जारी करने के लिए एक प्राइमरी नोड बन गया है।
समंदर में जहाजों को कैसे बनाया जा रहा निशाना?
हिंद महासागर क्षेत्र से गुजरने वाले जहाजों की भारी मात्रा में शिकायत आ रही है कि GPS और साइबर हमलों की वजह से AIS पोजीशन 295 नॉटिकल मील तक अंदर की ओर शिफ्ट हो रही हैं। ऐसा होने से ये जहाज गलत तरीके से ईरानी बंदरगाहों, ओमान के रेगिस्तानों या दुबई के पास आबादी वाले इलाकों में दिखाई देने लगते हैं। ऐसा GPS में हेरफेर होने की वजह से हो रही है। सबसे खास बात ये है कि एक ही समय में सभी तरह के जहाज इससे प्रभावित हो जाते हैं, जिनमें टैंकर जहाज, बल्क कैरियर और पैसेंजर फेरी जहाज भी शामिल होते हैं।
खासकर हिंद महासागर काफी ज्यादा महत्वपूर्ण है। दुनिया का लगभग 80 से 90 प्रतिशत व्यापार समुद्र के रास्ते होता है और हिंद महासागर दुनिया के कुछ सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा शिपमेंट को ले जाता है। अकेले होर्मुज जलडमरूमध्य से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापार होने वाले तेल का लगभग पांचवां हिस्सा गुजरता है। इतनी ज्यादा आवाजाही की वजह से GPS जैमिंग सिर्फ एक तकनीकी परेशानी नहीं है, यह वैश्विक सप्लाई चेन के सुचारू कामकाज के लिए खतरा है। इन्फॉर्मेशन फ्यूजन सेंटर – इंडियन ओशन रीजन हाफ-ईयरली ओवरव्यू (जनवरी-जून 2025) में बताया कि 2025 के पहले छह महीनों में 140 समुद्री डकैती और सशस्त्र डकैती की घटनाओं, 568 तस्करी के मामलों, 359 IUU मछली पकड़ने के उल्लंघनों और 109 अनियमित प्रवासन की घटनाओं को दर्ज किया।
IFC-IOR की भूमिका समंदर में कैसे बढ़ गई है ज्यादा?
ऐसी घटनाओं को रोकने में अब FC-IOR की भूमिका काफी ज्यादा बढ़ गई है। ये सेंटर साप्ताहिक और मासिक समुद्री सुरक्षा अपडेट जारी करता है, भागीदार देशों के साथ सत्यापित घटना डेटा शेयर करता है, और जहाजों को चल रही या उभरती GPS खराबियों के बारे में अलर्ट करता है। भारतीय नौसेना ने 2018 में इसकी स्थापना की थी और IFC-IOR एक ऐसे सिद्धांत पर आधारित है, जो भारत की समुद्री कूटनीति के लिए केंद्रीय बन गया है। इसका सेंटर हरियाणा के गुरुगांव में है। ये सेंटर भागीदार देशों के संपर्क अधिकारियों, क्षेत्रीय समुद्री फ्यूजन हब, कानून प्रवर्तन एजेंसियों और वाणिज्यिक हितधारकों को एक साथ लाता है ताकि समुद्र में गतिविधि की एक पारदर्शी, वास्तविक समय की तस्वीर बनाई जा सके।
GPS जैमिंग की घटनाओं में कैसे हो रहा इजाफा?
रिपोर्ट्स में बताया गया है कि AIS ट्रांसमिशन तट से 295 नॉटिकल माइल तक जमीन की ओर दिखाई दिया। क्षेत्र में व्यापक GPS जैमिंग के कारण AIS सिग्नल ईरानी बंदरगाहों, ओमान के रेगिस्तान और दुबई के आसपास तेज़ी से दिखाई दे रहे थे। ये घटनाएं न सिर्फ होर्मुज जलडमरूमध्य को प्रभावित कर रहा है, बल्कि अरब सागर, पूर्वी अफ्रीका के रास्ते और यहां तक कि दक्षिण एशिया और दक्षिण पूर्व एशिया को जोड़ने वाले समुद्री मार्गों से गुज़रने वाले जहाजों को भी प्रभावित कर रहा है। इतने सारे कमर्शियल जहाजों के संकरे रास्तों से गुजरने की वजह से स्थिति काफी मुश्किल बन जाती है। जिससे समंदर में जहाजों के बीच टक्कर या कम पानी में फंसने का खतरा काफी ज्यादा बढ़ जाता है, ऐसे में दुनिया के कुछ सबसे व्यस्त टैंकर और कार्गो आवाजाही होती है।
भारतीय नौसेना अपनी पहल से लगातार अपनी कूटनीति का विस्तार कर रही है। ऐसे जहाजों को बचा रही है और सुरक्षा की पहली रेखा तैयार करती है। इससे भारतीय नौसेना की गुपचुप डिप्लोमेसी का पता चलता है कि कैसे भारत, हिंद महासागर में जहाजों की रक्षा करने वाला फर्स्ट रिस्पाउंडर है। ये भारतीय नौसेना की मजबूत शक्ति को दर्शाता है, जो समुद्र की शांत लहरों के बीच भी डिप्लोमेसी चलाती रहती है।











