‘बंद दरवाजों के पीछे न्याय रो रहा है’, सुप्रीम कोर्ट में सीएम ममता की दलीलें

नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्य में चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया को चुनौती देते हुए भारत निर्वाचन आयोग के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में एक रिट याचिका दायर की है।

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इस याचिका को सुनवाई मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ कर रही है।सुनवाई के दौरान सीएम ममता ने कोर्ट में एसआईआर को लेकर कहा कि न्याय बंद दरवाजों के पीछे रो रहा है।

‘मैं कोई अहम महत्वपूर्ण व्यक्ति नहीं हूं’

याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश ने कहा, ‘पश्चिम बंगाल राज्य ने भी अपने अधिकार से याचिका दायर की है। इस न्यायालय के सर्वश्रेष्ठ वकीलों में से एक सिब्बल उपस्थित हैं…19 जनवरी को श्री सिबल ने राज्य की प्रक्रियात्मक कठिनाइयों और पश्चिम बंगाल के वास्तविक निवासियों को बाहर किए जाने की राज्य की वास्तविक आशंकाओं को स्पष्ट किया।’

इसपर सीएम ममता बनर्जी ने कहा, ‘मैं आपकी कृपा से यहाँ हूं…न्यायाधीशों को मेरा प्रणाम…बहुत-बहुत धन्यवाद…विरोधी वकीलों को भी मेरा विनम्र प्रणाम…समस्या यह है कि जब सब कुछ खत्म हो जाता है, जब हमें न्याय नहीं मिलता, तब न्याय बंद दरवाजे के पीछे रो रहा होता है। तब हमें लगता है कि हमें कहीं न्याय नहीं मिलेगा। मैंने चुनाव आयोग को पत्र लिखे हैं…मैं कोई बहुत महत्वपूर्ण व्यक्ति नहीं हूं, मैं अपनी पार्टी के लिए नहीं लड़ रही हूं।’

SIR पर सीएम ममता की दलीलें

सीएम ममता ने कहा, “यह प्रक्रिया केवल नाम हटाने के लिए है। नाम में विसंगति केवल सरनेम में ही नहीं है… यह अनियोजित है… मान लीजिए बेटी शादी के बाद ससुराल जाती है… तो वह पति के सरनेम का इस्तेमाल क्यों करेगी… यह भी विसंगति है।”

इसपर सीजीआई सूर्यकांत ने टोकते हुए कहा, “ऐसा नहीं हो सकता।”

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बंगाल के लोग आपसे खुश हैं: सीएम ममता

फिर सीएम ममता बनर्जी ने कहा, “उन्होंने यही किया है…कुछ बेटियां ससुराल चली गईं…उनके नाम भी हटा दिए गए। कभी-कभी गरीब लोग पलायन कर जाते हैं। बंगाल के लोग बहुत खुश हैं कि इस अदालत ने आदेश दिया है कि आधार कार्ड भी दस्तावेजों में से एक होगा…अन्य राज्यों में निवास प्रमाण पत्र मान्य है…जाति प्रमाण पत्र मान्य है…उन्होंने चुनाव की पूर्व संध्या पर सिर्फ बंगाल को निशाना बनाया।”

सीएम ममता ने कहा, ‘4 राज्यों में चुनाव हो रहे हैं, 24 साल बाद, 3 महीने में यह सब करने की क्या जल्दी थी? जब फसल कटाई का मौसम चल रहा है। जब लोग यात्रा कर रहे हैं…100 से अधिक लोग मारे गए! बीएलओ की मौत हो गई, कई लोग अस्पताल में भर्ती हैं। असम क्यों नहीं?’

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