ढाका। बांग्लादेश निर्वाचन आयोग ने 13वें संसदीय चुनाव के अंतिम परिणाम घोषित कर दिए हैं, जिसमें बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने ऐतिहासिक बहुमत हासिल किया है। चुनाव आयोग के सचिव अख़्तर अहमद ने शुक्रवार को अगरगांव स्थित मुख्यालय में परिणामों की आधिकारिक घोषणा की। संसदीय सीटों के साथ-साथ देश में हुए महत्वपूर्ण संवैधानिक जनमत संग्रह में भी जनता ने ‘हाँ’ के पक्ष में भारी मतदान किया है। चुनावी नतीजों का गणित : BNP गठबंधन का दबदबा आयोग द्वारा 297 सीटों पर घोषित परिणामों के अनुसार, BNP अकेले 209 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। अपने सहयोगियों के साथ मिलकर पार्टी ने कुल 212 सीटों पर कब्ज़ा जमाया है।
जमात-ए-इस्लामी : इस चुनाव में बांग्लादेश जमात-ए-इस्लामी दूसरी बड़ी ताकत बनी है, जिसने 68 सीटें जीती हैं। इसके सहयोगियों को भी 9 सीटों पर सफलता मिली है।
अन्य दल : एनसीपी ने 6, बांग्लादेश ख़लीफ़ा मजलिस ने 2, और पांच अन्य छोटे दलों ने एक-एक सीट पर जीत दर्ज की है। वहीं, 7 सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवारों ने परचम लहराया है।
चटगांव का मामला : चटगांव-2 और चटगांव-4 की सीटों पर BNP के उम्मीदवारों ने अनौपचारिक जीत हासिल की है, लेकिन कोर्ट में अपील लंबित होने के कारण इनके नतीजे अभी आधिकारिक नहीं किए गए हैं।
जनमत संग्रह : नई सरकार के लिए ‘जुलाई चार्टर’ अनिवार्यचुनावों के साथ ही हुए जनमत संग्रह के नतीजे भी बेहद चौंकाने वाले रहे। सचिव अख़्तर अहमद ने बताया कि लगभग 5 करोड़ लोगों ने ‘हाँ’ के पक्ष में वोट दिया, जबकि ‘नहीं’ का विकल्प चुनने वालों की संख्या इससे लगभग आधी रही।
इस जनमत संग्रह की सफलता का अर्थ है कि अब नई सरकार को ‘जुलाई चार्टर’ के तहत प्रस्तावित 84 संवैधानिक सुधारों को लागू करना ही होगा। इस चार्टर का मुख्य उद्देश्य बांग्लादेश में भविष्य के किसी भी राजनीतिक एकाधिकार (Dictatorship) को रोकना और शासन की शक्तियों का विकेंद्रीकरण करना है।
क्या बदलेगा बांग्लादेश में?
जनमत संग्रह में मिली मंजूरी के बाद अब बांग्लादेश की संसद में निम्नलिखित बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे:
द्विसदनीय व्यवस्था : अब संसद में ऊपरी और निचले, दो सदन होंगे।
शक्तियों का संतुलन : कार्यपालिका के अधिकारों को कम कर शासन की विभिन्न शाखाओं के बीच नियंत्रण (Checks and Balances) मजबूत किया जाएगा।
अनिवार्य सुधार : नई संसद कानूनी रूप से उन सभी सुधारों को लागू करने के लिए बाध्य होगी जो जुलाई चार्टर में सूचीबद्ध हैं।
बांग्लादेश के राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह चुनाव केवल सरकार बदलने के लिए नहीं, बल्कि देश के लोकतांत्रिक ढांचे को पूरी तरह नया रूप देने के लिए याद किया जाएगा।
BNP की प्रचंड जीत, जनमत संग्रह में ‘जुलाई चार्टर’ को मिली जनता की मंजूरी
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