नेप्यीडॉ: रूसी फाइटर जेट्स, खुफिया जानकारी और यूक्रेन युद्ध से सीखी गई रणनीतियां अपनाकर म्यांमार की सैन्य सरकार गृहयुद्ध को जीतने की कोशिश कर रही है। म्यांमार का गृहयुद्ध अब छठे साल में प्रवेश कर चुका है और सेना की सत्ता को मानने से देश का ज्यादातर हिस्सा इनकार कर चुका है। म्यांमार में कई छोटे छोटे मिलिशिया संगठन बन चुके हैं जो आपस में भी और सेना के खिलाफ भी पिछले पांच सालों से जंग लड़ रहे हैं। म्यांमार के सैन्य जनरलों के साथ साथ अलग अलग मिलिशिया जातीय सशस्त्र समूहों पर चीन का काफी प्रभाव है लेकिन रूसी फाइटर जेट्स, हेलीकॉप्टर और गोला बारूद इस युद्ध में काफी अहम भूमिका निभा रहे हैं।
सिंगापुर के ISEAS-Yusof Ishak Institute के सीनियर फेलो और ‘Putin’s Russia and Southeast Asia’ किताब के लेखक इयान स्टोरी ने लिखा है कि मॉस्को म्यांमार की सरकार का सबसे अहम रक्षा पार्टनर बनकर उभरा है। उन्होंने कहा कि म्यांमार की सेना के हाथों में मौजूद रूसी हथियारों का इस्तेमाल न सिर्फ विद्रोही ठिकानों के खिलाफ किए जा रहे हैं बल्कि उनका इस्तेमाल स्कूलों, अस्पतालों और आम नागरिक जगहों पर भी तबाही मचाने के लिए किया जा रहा है। म्यांमार की सेना बेरहमी से आम लोगों को मार रही है और मरने वालों का आंकड़ा चौंकाने वाला है।
म्यांमार में सेना आम नागरिकों से कैसे कर रही क्रूरता?
म्यांमार की सेना ने रूसी सैनिकों की यूक्रेन युद्ध नीति को अपनाया है और ‘मीट असॉल्ट’ की रणनीति जमीन पर देखी जा रही है। इसमें दुश्मन की रक्षा पंक्तियों पर पैदल सैनिकों की लहरें भेजी जाती हैं और जान-माल के नुकसान की जरा भी परवाह नहीं की जाती। म्यांमार की सेना (जुंटा) मे सैनिकों की संख्या बढ़ाने के लिए देशभर में अनिवार्य भर्ती 2024 में लागू कर दिया था। इससे सैनिकों की संख्या में एक लाख की बढ़ोतरी हुई है। यानि म्यांमार की जुंटा को मरने के लिए सैनिक मिल गये हैं। रूस ने यूक्रेन युद्ध के लिए भी यही स्ट्रैटजी अपना रखी है।
म्यांमार की सेना ने 1 फरवरी 2021 को देश की सरकार को बर्खास्त कर सैन्य तख्तापलट किया था। उसके बाद से ही देश में गृहयुद्ध भड़क उठा था। रूस ने 24 फरवरी 2022 को यूक्रेन युद्ध शुरू किया था। रूस ने सबसे पहले म्यांमार में सैन्य तख्तापलट का स्वागत किया था और म्यांमार की सेना के सीनियर जनरल मिन आंग ह्लाइंग को क्रेमलिन में बतौर मेहमान स्वागत किया था। राष्ट्रपति पुतिन ने उनसे मुलाकात भी की थी। रूस उसके बाद से लगातार म्यांमार को सैन्य सहायता दे रहा है, जिनमें मोर्टार के गोले, टैंकों के गोले, हेलीकॉप्टर और फाइटर जेट्स हैं। हाल ही में रूस ने Su-30 फाइटर जेट भी म्यांमार की सेना को सौंपे हैं।
म्यांमार को कैसे सैन्य मदद दे रहा है रूस?
म्यांमार गृहयुद्ध में अभी तक आधिकारिक तौर पर 96 हजार लोग मारे गये हैं। वास्तविक आंकड़ा इससे कहीं ज्यादा हो सकता है। मॉस्को ने म्यांमार की सेना को गोला-बारूद, ड्रोन और ड्रोन-रोधी प्रणालियां आपूर्ति की हैं। संघर्ष निगरानी समूह ACLED के मुताबिक इस सेना ने एक गृहयुद्ध में अपने विरोधियों और आम नागरिकों, दोनों के खिलाफ लगातार हिंसक अभियान चलाया है। रूस ने म्यांमार को 6 Su-30 फाइटर जेट दिए हैं। जबकि संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि म्यांमार में आम नागरिकों की मौतों का सबसे बड़ा कारण हवाई हमले थे और 2025 में हवाई हमलों से होने वाली मौतों की संख्या पिछले वर्ष की तुलना में 52 प्रतिशत बढ़ गई।
म्यांमार संघर्ष पर नजर रखने वाली संस्था ACLED ने बताया है कि 1 फरवरी 2021 से 13 मार्च 2026 के बीच म्यांमार की सेना की तरफ से आम नागरिकों और विद्रोहियों के खिलाफ 5,912 हवाई हमले दर्ज किए गए जिनमें कम से कम 4,865 लोगों की मौत की खबर है। इसके अलावा ACLED ने इसी दौरान 931 ड्रोन हमले भी दर्ज किए जिनके कारण कम से कम 366 लोगों की मौत की सूचना मिली। इस महीने की शुरुआत में सेना से लड़ रहे करेन जातीय सशस्त्र समूहों ने बताया कि सरकारी बलों ने म्यांमार के सबसे बड़े शहर यांगून के उत्तर-पूर्व में स्थित बागो क्षेत्र में कम से कम 30 ग्रामीणों को मार डाला जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे।










